सेंट्रल एंड ईस्टर्न यूरोप में मौद्रिक नीति का परिदृश्य लगातार जटिल होता जा रहा है, जहाँ विदेशी मुद्रा दरों में बदलाव सीधे तौर पर घरेलू मुद्रास्फीति को प्रभावित कर रहा है। बीएनवाई के विश्लेषक जेफ यू के विश्लेषण के अनुसार EUR/PLN मुद्रा जोड़े में मजबूती की वजह से पोलैंड में आयातित वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि पोलैंड की मॉनेटरी पॉलिसी काउंसिल (एनबीपी) ने चालू वर्ष की शेष अवधि के लिए नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रखने का संकेत दिया है, लेकिन वित्तीय बाजार का अनुमान इसके विपरीत है। वायदा बाजार के संकेत बताते हैं कि मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को 4% के स्तर से ऊपर ले जाना अनिवार्य होगा। यही कारण है कि पोलैंड इस समय पूरे मध्य और पूर्वी यूरोपीय क्षेत्र में सबसे सख्त मौद्रिक जोखिम का सामना कर रहा है, जिससे भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की सभी संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो गई हैं।
पोलैंड में आयात लागत का दबाव और घरेलू मांग में उछाल
पोलैंड में सख्त मौद्रिक नीति की संभावना का मुख्य कारण आयातित वस्तुओं की लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। मार्च से मई के बीच जारी आंकड़ों से पता चलता है कि EUR/PLN में बड़े उछाल से पहले ही पोलैंड के आयात मूल्यों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा चुकी थी। अब तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान यूरो की विनिमय दर मजबूत होने से आने वाले समय में आयातित महंगाई का जोखिम और अधिक गहरा गया है। पड़ोसी देश हंगरी की तुलना में पोलैंड की स्थिति भिन्न है, क्योंकि हंगरी को आर्थिक पुनर्मूल्यांकन का लाभ मिला था जिससे वहाँ बिना नीतिगत बदलाव के विदेशी पूंजी का प्रवाह हुआ और मुद्रा को मजबूती मिली। इसके विपरीत, पोलैंड को ऐसा कोई पूंजीगत सहारा नहीं मिल सका है।
इसके साथ ही पोलैंड में मजबूत राजकोषीय प्रोत्साहन और सरकारी खर्चों के कारण घरेलू उपभोक्ता मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जब किसी अर्थव्यवस्था में आयातित उत्पाद महंगे हो रहे हों, तब मजबूत घरेलू मांग महंगाई के दबाव को और अधिक बढ़ा देती है। जेफ यू का मानना है कि इन आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में कटौती का विचार पूरी तरह से अव्यवहारिक है और केंद्रीय बैंक को दर कटौती की योजनाओं को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए।
यूरोपीय केंद्रीय बैंकों की रणनीति: एनबीपी, ईसीबी और रिक्सबैंक
नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड (एनबीपी) की आगे की रणनीति काफी हद तक यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के रुख पर निर्भर करेगी। जून के महीने में एनबीपी द्वारा एहतियाती कदम उठाना संभव था, लेकिन आयात कीमतों में जारी उछाल को देखते हुए आगे अधिक आक्रामक नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता पड़ेगी। यदि यूरोपीय स्तर पर महंगाई का दबाव बना रहता है या ईसीबी का रुख सख्त रहता है, तो पोलैंड के केंद्रीय बैंक को दरों को स्थिर रखने के बजाय एक लंबे कड़े दौर से गुजरना पड़ सकता है।
पोलैंड के अलावा विश्लेषक स्वीडन के केंद्रीय बैंक रिक्सबैंक की नीतियों पर भी नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। उत्तरी यूरोप में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए रिक्सबैंक द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही, EUR/PLN और EUR/SEK जैसे मुद्रा जोड़ों में और अधिक तेजी की सीमाएं तय मानी जा रही हैं, क्योंकि अत्यधिक विनिमय दरें अंततः केंद्रीय बैंकों को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर करती हैं, जिससे मुद्रा के अवमूल्यन पर अंकुश लगता है।
जैक्सन होल में फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के संबोधन से पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में स्थिरता
यूरोप में केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर जारी बहस के बीच वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखा जा रहा है। गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान GBP/USD अपने साप्ताहिक निचले स्तर के करीब 1.3600 के आंकड़े से नीचे बना रहा। हालांकि, शुक्रवार को जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के भाषण से पहले व्यापारी कोई भी बड़ा नया दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे GBP/USD को निचले स्तरों पर समर्थन मिला हुआ है।
दूसरी ओर, EUR/USD गुरुवार के सत्र में 1.1650 के स्तर के आसपास एक सीमित दायरे में बना हुआ है। हाल ही में जारी अमेरिकी PCE मुद्रास्फीति आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती के बावजूद, ईसीबी की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों से यूरो को सहारा मिल रहा है। इस समय विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशकों की निगाहें मध्य पूर्व के तनाव और अमेरिका के बेरोजगारी दावों के नए आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।
जैक्सन होल नीतिगत संकेतों की प्रतीक्षा में सोना $4,600 के स्तर पर रुका
कॉमोडिटी बाजार में सोना गुरुवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान $4,600 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास बना रहा, जो कि बुधवार को दर्ज किए गए इसके साप्ताहिक निचले स्तर के बेहद करीब है। हालांकि, फेड अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श के पहले जैक्सन होल भाषण से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट रुक गई है।
फेड प्रमुख के तौर पर जैक्सन होल में केविन वॉर्श का यह पहला संबोधन है, और वित्तीय बाजारों को उम्मीद है कि उनके भाषण से केवल सितंबर की मौद्रिक समीक्षा ही नहीं, बल्कि भविष्य की ब्याज दर नीति का पूरा रोडमैप स्पष्ट होगा। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए इसकी कीमतें अमेरिकी डॉलर की चाल और फेड की ब्याज दर नीति से अत्यधिक प्रभावित होती हैं। यदि केविन वॉर्श सख्त रुख का संकेत देते हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है और सोने पर दबाव पड़ेगा, जबकि उदार नीति के संकेत से सोने में नई तेजी देखने को मिल सकती है।



















