हंगरी के केंद्रीय बैंक यानी नेशनल बैंक ऑफ हंगरी की तरफ से होने वाले नीतिगत फैसले को लेकर विश्लेषकों ने अपने आकलन साझा किए हैं। जानकारों का मानना है कि मंगलवार को होने वाली ब्याज दर की घोषणा गर्मियों के दौरान चल रहे छोटे स्तर के कटौती चक्र का आखिरी चरण साबित हो सकती है, लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि मौद्रिक ढील का यह दौर यहीं थम जाएगा। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, नीतिगत दरों में नरमी का सिलसिला आगे भी बना रहने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि व्यापक आर्थिक संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है।
जुलाई के महंगाई आंकड़े और सितंबर की रिपोर्ट
अर्थशास्त्रियों ने इस बात पर जोर दिया है कि जुलाई महीने में मुद्रास्फीति की दर घटकर 1.2 प्रतिशत पर आ गई है। यह आंकड़ा नेशनल बैंक ऑफ हंगरी के जून महीने के पूर्वानुमान वाले अनिश्चितता दायरे से बाहर है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि देश की समग्र मुद्रास्फीति की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आईएनजी के विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर में आने वाली आधिकारिक इन्फ्लेशन रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय बैंक अपनी भावी रणनीति तय करेगा और हंगेरियन बेस रेट साल 2026 के अंत तक गिरकर 4.75 प्रतिशत के स्तर तक आ सकता है।
सावधानी और वैश्विक अनिश्चितताएं
विशेषज्ञों का यह भी आकलन है कि अगस्त महीने की ब्याज दर बैठक में वर्तमान परिस्थितियों के अलावा किसी अन्य बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। केंद्रीय बैंक ने पहले ही कई बार स्पष्ट किया है कि मौद्रिक नीति को आगे बढ़ाने या रोकने का अंतिम निर्णय सितंबर की रिपोर्ट के विस्तृत अध्ययन के बाद ही लिया जाएगा। एमआई वarga और उनके साथी अधिकारी मौजूदा वैश्विक माहौल में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में कोई पूर्व घोषणा करने से बच रहे हैं। बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हलचल के बीच बैंक पूरी सतर्कता बरत रहा है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और व्यापक आर्थिक परिदृश्य
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। ब्रिटिश पाउंड कमजोर वैश्विक रुख के बीच दबाव में कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी डॉलर में रिकवरी दर्ज की जा रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण जोखिम भरे परिसंपत्तियों पर असर पड़ रहा है। यूरोपीय सत्र के दौरान यूरो की चाल भी सुस्त बनी हुई है, क्योंकि पिछले सप्ताह अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक प्लान के बाद से बाजार में सतर्कता का माहौल है।
सोने की चाल और अमेरिकी ट्रेजरी का बायबैक कदम
दूसरी ओर, बहुमूल्य पीली धातु यानी सोना यूरोपीय बाजार में मजबूत स्थिति में बना हुआ है और तीन महीने के अपने उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और अमेरिका-कनाडा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच सोने को समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकतम सीमा दो अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम चार अरब डॉलर कर दी गई है, जो 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगी।



















