बीमा क्षेत्र के नियामक की तरफ से प्रस्तावित नए नियमों ने ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर मंचों से जुड़े निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा इंश्योरेंस उत्पादों के वितरण, कमीशन और संबंधित खर्चों को लेकर एक नया मसौदा सामने रखे जाने के बाद पीबी फिनटेक (पॉलिसीबाजार) के शेयरों में बाजार में तेज बिकवाली देखी गई। नियामक के इस कदम से कंपनी के भविष्य के मार्जिन और मुनाफे पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका गहरा गई, जिसके चलते महज दो कारोबारी सत्रों के दौरान स्टॉक में 40 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक में भारी गिरावट
बुधवार के कारोबारी सत्र की समाप्ति पर पीबी फिनटेक का शेयर तकरीबन ₹1,893 के स्तर पर बंद हुआ था। अगले दिन यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही शेयरों में आक्रामक बिकवाली शुरू हो गई। सत्र के दौरान स्टॉक का भाव लुढ़ककर ₹1,207.20 के अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि कारोबार के अंतिम समय में बाजार में हल्की रिकवरी देखी गई, फिर भी शेयर दिन के अंत में लगभग 35 फीसदी के नुकसान के साथ ₹1,244 के आसपास बंद हुआ।
बिकवाली का यह सिलसिला शुक्रवार को भी थमता नजर नहीं आया। शुक्रवार के शुरुआती सत्र में शेयर में 4 फीसदी से ज्यादा की और कमजोरी दर्ज की गई और यह ₹1,125 के स्तर के इर्द-गिर्द कारोबार करता दिखाई दिया। बुधवार के बंद भाव की तुलना में देखा जाए तो निवेशकों ने दो ही दिनों के भीतर शेयर के भाव में 40 फीसदी से अधिक का नुकसान झेला।
बाजार मूल्यांकन में ₹32,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
शेयरों की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण को गहरा झटका दिया है। केवल एक ही कारोबारी सत्र के दौरान कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹33,000 करोड़ से भी ज्यादा घट गया। इस पूरे दबाव के बाद कंपनी का कुल मार्केट कैप शुक्रवार के कारोबारी समय में घटकर लगभग ₹55,310 करोड़ के स्तर पर आ गया, जिससे यह हाल के दौर की सबसे बड़ी वेल्थ इरोशन घटनाओं में शामिल हो गया।
आईआरडीएआई के प्रस्ताव और निवेशकों की चिंताएं
कंपनी के शेयरों में मचे इस भूचाल की मुख्य वजह आईआरडीएआई द्वारा कमीशन ढांचे, डिस्ट्रीब्यूशन पेमेंट और समग्र परिचालन खर्चों से जुड़े नियमों में संशोधन की तैयारी है। नियामक के प्रस्ताव में जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और मोटर बीमा सहित सभी प्रमुख बीमा श्रेणियों में दिए जाने वाले कमीशन और वितरण भुगतानों पर सीमा तय करने की बात शामिल है। इसके अलावा, कर्ज या लोन उत्पादों के साथ बेचे जाने वाले बीमा के मामलों में मौजूदा भुगतान व्यवस्था और ढांचे को बदलने का भी सुझाव दिया गया है। शेयर बाजार के विश्लेषकों और निवेशकों को आशंका है कि वितरण मार्जिन सीमित होने से पॉलिसीबाजार जैसी इंटरमीडियरी कंपनियों के राजस्व संग्रह और परिचालन मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।
ब्रोकरेज फर्म जैफरीज का आकलन
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस जैफरीज ने भी नियामक के इस कदम को पूरे बीमा वितरण क्षेत्र के लिए एक बड़ा संभावित जोखिम करार दिया है। फर्म के विश्लेषकों का मानना है कि यदि कमीशन दरों में 10 फीसदी की कटौती लागू की जाती है, तो इसका सीधा प्रभाव पीबी फिनटेक और टर्टलमिंट जैसी वितरण कंपनियों की आय पर पड़ सकता है, जिससे उनकी आय में करीब 10 से 12 फीसदी तक की कमी आने की संभावना है।



















