अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में सर्वसम्मति से की गई ब्याज दर बढ़ोतरी ने केंद्रीय बैंक की साख को अस्थायी सहारा दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली है। इस ताजा घटनाक्रम के बीच कमर्शबैंक की विश्लेषक थू लैन गुयेन ने यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) के लिए वर्ष के अंत का पूर्वानुमान 1.17 से घटाकर 1.15 कर दिया है। बाजार में फिलहाल ग्रीनबैक का दबदबा दिख रहा है, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि को लेकर विश्लेषकों का आकलन बताता है कि आने वाले समय में मुद्रा परिदृश्य में बदलाव देखने को मिल सकता है। कमर्शबैंक का मानना है कि वर्ष 2027 के दौरान अमेरिका और यूरो क्षेत्र दोनों में ब्याज दरों से जुड़ी अपेक्षाओं में कटौती की जाएगी, जिसका अंतिम असर यूरो की तुलना में डॉलर पर अधिक नकारात्मक होगा और इससे EUR/USD धीरे-धीरे मजबूत हो सकेगा।
अगले वर्ष मौद्रिक सख्ती में नरमी और दर कटौती की संभावना
आगामी वर्ष के मौद्रिक परिदृश्य पर विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कमर्शबैंक ने स्पष्ट किया है कि फेडरल रिजर्व उतनी आक्रामकता से मौद्रिक नीति को सख्त नहीं करेगा, जितनी उम्मीद मौजूदा समय में वित्तीय बाजार लगा रहे हैं। यदि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट धीरे-धीरे शांत होता है, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है, तो महंगाई का मौजूदा झटका भी अगले वर्ष के दौरान कमजोर पड़ जाएगा। ऐसी स्थिति में आगे और ब्याज दरें बढ़ाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। कमर्शबैंक का आकलन है कि दिसंबर में फेड की ओर से केवल एक और दर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसके बाद वर्ष 2027 के अंत तक ब्याज दरें अपरिवर्तित बनी रहेंगी। इसके साथ ही इस बात की प्रबल संभावना भी जताई गई है कि केंद्रीय बैंक 2027 के अंत तक दरों में कटौती का चक्र शुरू कर दे।
व्हाइट हाउस और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर उठते सवाल
यूरोपीय मुद्रा के संदर्भ में भी कमर्शबैंक का मानना है कि यूरो क्षेत्र में दर अपेक्षाओं में होने वाला नीचे की ओर समायोजन अगले वर्ष यूरो पर दबाव डाल सकता है। इसके बावजूद 2027 के दौरान EUR/USD में बढ़त की उम्मीद क्यों की जा रही है, इस पर विश्लेषकों ने दोहरे कारणों की ओर इशारा किया है। अमेरिकी मुद्रा को केवल ब्याज दर कटौती की अपेक्षाओं से ही झटका नहीं लगेगा, बल्कि व्हाइट हाउस द्वारा फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता को कमजोर किए जाने की नए सिरे से उभरती चिंताएं भी डॉलर पर भारी पड़ेंगी। अटलांटिक के दोनों किनारों पर मौद्रिक नरमी के अनुमानों के बावजूद, राजनीतिक दबाव और स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं के कारण अंततः अमेरिकी डॉलर को यूरो की तुलना में अधिक दबाव का सामना करना पड़ेगा।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में उठापटक का दौर
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों पर भी अमेरिकी नीति और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर देखा जा रहा है। शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) रात भर 200-दिवसीय एसएमए के नीचे खिसकने के बाद अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने नए निचले स्तर पर आ गया और 0.7000 के स्तर के पास काफी कमजोर नजर आया। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच कच्चे तेल की कीमतों में दो दिन की तेजी ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इन भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया है, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की दर बढ़ोतरी की संभावनाओं को पीछे छोड़ते हुए इस जोड़ी पर गहरा दबाव बनाया है।
येन पर संभावित हस्तक्षेप की नजर और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत समानता
डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान मामूली कमजोरी के साथ 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर ठहर गया, क्योंकि जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप की आशंका के चलते येन में बिकवाली करने वाले ट्रेडर सतर्क हो गए हैं। हालांकि, तेल जनित महंगाई और अमेरिकी यील्ड के चलते डॉलर की मजबूती बरकरार है। वहीं बैंक ऑफ जापान (BOJ) द्वारा पिछले सप्ताह की गई 25 आधार अंकों की अपेक्षाकृत नरम ब्याज दर बढ़ोतरी ने भी येन की तेजी को सीमित किया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले सप्ताह एक जैसी कार्रवाई करते हुए दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की है, दोनों ही मुद्रास्फीति जोखिमों का सामना कर रहे हैं और दोनों ने ही भविष्य के कदमों को आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर बताया है।
कमोडिटी और डिजिटल परिसंपत्ति बाजार की स्थिति
मुद्रा बाजार के अतिरिक्त अन्य वित्तीय बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। सोने की कीमतों में सप्ताह के अंत में कुछ लिवाली देखने को मिली और यह मामूली बढ़त दर्ज करने में सफल रहा, जिससे सप्ताह की गिरावट की कुछ हद तक भरपाई हुई। इसके बावजूद पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के प्रमुख स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। डॉलर में आई हल्की बिकवाली और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट ने सोने को इस सीमित सुधार में सहारा दिया है। उधर क्रिप्टो बाजार में शुक्रवार को स्थिरता का माहौल रहा, जहां बिटकॉइन 84,000 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर अपने नुकसान की भरपाई करता दिखा, जबकि एथेरियम में भी बीटीसी के अनुरूप गिरावट रही। रिपल (XRP) ने इस रुख से अलग व्यवहार प्रदर्शित किया। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD फिलहाल 1.14 के स्तर पर सपाट कारोबार कर रहा है, जहां दैनिक आरएसआई 30 पर ओवरसोल्ड स्थिति दर्शाता है और 52-सप्ताह का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच बना हुआ है।

















