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अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त यूरो, लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट की ओरबाज़ार
25 सित॰ 2026, 8:45 pm (1 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त यूरो, लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट की ओर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और ट्रेजरी यील्ड में उछाल के चलते डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे यूरो पर लगातार तीसरे हफ्ते दबाव देखा जा रहा है।

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तकनीकी विश्लेषण25 सितंबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

EUR/USD अभी 1.14 पर है, जबकि EMA20 1.15, EMA50 1.15 और EMA200 1.16 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 (1.15) के पास थम सकती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थमने से यूरो में हल्की बढ़त दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद यह साझा यूरोपीय मुद्रा लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट दर्ज करने की कगार पर खड़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने के संकेत और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने ग्रीनबैक यानी डॉलर को मजबूत सहारा दिया है। मुद्रा कारोबारी अब अपनी नजरें आगामी आर्थिक आंकड़ों पर टिकाए हुए हैं, जिनमें अमेरिका का पीसीई मुद्रास्फीति डेटा, नॉनफार्म पेरोल और यूरोज़ोन का एचआईसीपी इन्फ्लेशन आंकड़ा शामिल है, जिससे केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों का रुख तय होगा।

अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापता है, गुरुवार को 101.40 के स्तर को छूने के बाद 101 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह स्तर पिछले करीब दो महीनों का उच्चतम बिंदु है। वहीं दूसरी ओर, 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.22 प्रतिशत के आसपास मंडरा रहा है, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, EUR/USD की मौजूदा दर 1.14 के आसपास है, जो अपने पिछले बंद 1.14 के मुकाबले 0.16 प्रतिशत ऊपर है। इसका 14-दिवसीय आरएसआई 29 पर दर्ज किया गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शाता है, जबकि 200-दिवसीय ईएमए 1.16 और 50-दिवसीय ईएमए 1.15 पर मौजूद हैं, जो लंबे समय के डाउनट्रेंड और डेथ क्रॉस की ओर इशारा करते हैं।

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अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की मिली-जुली तस्वीर

शुक्रवार को जारी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने बाजार में मिला-जुला परिदृश्य पेश किया। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के उपभोक्ता धारणा सूचकांक में सितंबर के दौरान सुधार देखा गया और यह 47.8 से बढ़कर 48.1 पर पहुंच गया, जिसने बाजार के 47.6 के अनुमान को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही उपभोक्ता अपेक्षा सूचकांक भी 45.8 से सुधरकर 46.3 हो गया। हालांकि, महंगाई को लेकर आम लोगों की अपेक्षाओं में कोई खास बदलाव नहीं आया। 1 साल के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जबकि 5 साल का परिप्रेक्ष्य 3.4 प्रतिशत पर यथावत दर्ज किया गया।

इन मिले-जुले आंकड़ों के बीच व्यापारियों का ध्यान अब आगामी सप्ताह जारी होने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े, आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) और नॉनफार्म पेरोल्स (एनएफपी) रिपोर्ट पर लगा हुआ है। ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अक्टूबर बैठक की रणनीति को दिशा देने का काम करेंगे। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नीति निर्माताओं द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना लगभग 66 प्रतिशत आंकी जा रही है।

मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की नीति का गणित

अर्थव्यवस्था में महंगाई यानी मुद्रास्फीति का मतलब वस्तुओं और सेवाओं की एक प्रतिनिधि टोकरी की कीमतों में होने वाली आम बढ़ोतरी से होता है। हेडलाइन मुद्रास्फीति को आमतौर पर महीने-दर-महीने और साल-दर-साल आधार पर प्रतिशत बदलाव के रूप में व्यक्त किया जाता है। वहीं कोर मुद्रास्फीति में भोजन और ईंधन जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को बाहर रखा जाता है, क्योंकि भू-राजनीतिक और मौसमी कारणों से इनमें अक्सर तेज बदलाव आते हैं। अर्थशास्त्री मुख्य रूप से कोर मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और केंद्रीय बैंक भी इसी आंकड़े को साधने का प्रयास करते हैं, जिनका सामान्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखना होता है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) समय के साथ चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में आने वाले बदलावों का पैमाना है। जब कोर सीपीआई केंद्रीय बैंकों के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से ऊपर निकल जाता है, तो बैंक इसे काबू करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाते हैं। इसके विपरीत जब यह 2 प्रतिशत से नीचे गिरता है, तो दरों में कटौती की जाती है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर किसी भी मुद्रा के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षक रिटर्न मिलता है, जिससे उस मुद्रा की मांग और मूल्य दोनों बढ़ते हैं।

सोने के रुख में बदलाव और ब्याज दरों का प्रभाव

ऐतिहासिक रूप से उच्च मुद्रास्फीति के दौर में निवेशक अपनी पूंजी का मूल्य सुरक्षित रखने के लिए सोने का रुख करते थे। हालांकि अत्यधिक बाजार उथल-पुथल के समय सोने की मांग एक सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन के रूप में अब भी बनी रहती है, लेकिन आम तौर पर परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करते हैं, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव सोने पर पड़ता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण ब्याज देने वाली वित्तीय संपत्तियों या नकद जमा खातों की तुलना में बिना किसी ब्याज वाले सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, मुद्रास्फीति में कमी आने पर ब्याज दरें घटती हैं, जिससे सोने की चमक दोबारा लौटती है। सप्ताहांत में डॉलर में हल्की नरमी और बॉन्ड यील्ड में मामूली गिरावट के चलते सोने में सीमित खरीदारी देखी गई, हालांकि यह अब भी 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर से नीचे बना हुआ है।

अन्य वैश्विक मुद्राओं और क्रिप्टो बाजार का हाल

अन्य विदेशी मुद्राओं में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई कारोबारी सत्र में अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया। 200-दिवसीय एसएमए से नीचे टूटने के बाद यह 0.7000 के स्तर के पास बेहद कमजोर नजर आ रहा है। फेडरल रिजर्व के कड़े रुख, कच्चे तेल की कीमतों में दो दिन की तेजी से लौटी महंगाई की चिंता और भू-राजनीतिक जोखिमों ने ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को दबा दिया है। उधर जापानी येन (USD/JPY) 159.00 के तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद सुस्त पड़ा, क्योंकि येन विक्रेताओं को जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप का डर सता रहा है। हालांकि, फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले हफ्ते ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और दोनों ने ही भविष्य के कदमों को आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर बताया है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार की बात करें तो शुक्रवार को इसमें स्थिरता देखी गई। बिटकॉइन मामूली सुधार के साथ 84,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। इथेरियम में भी बिटकॉइन के अनुरूप ही रुख देखने को मिला, जबकि रिपल (XRP) ने बाजार में एक अलग चाल प्रस्तुत की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय उच्च स्तर और डॉलर की मजबूती ने फिलहाल तमाम जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना रखा है।

सवाल-जवाब

EUR/USD की गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख और 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.22 प्रतिशत पर पहुंचने से डॉलर को भारी मजबूती मिल रही है, जिससे यूरो पर दबाव है।
अगले सप्ताह बाजार किन प्रमुख आंकड़ों पर नजर रखेगा?
व्यापारी अमेरिकी पीसीई मुद्रास्फीति रिपोर्ट, आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, नॉनफार्म पेरोल और यूरोज़ोन एचआईसीपी आंकड़ों पर नजर रखेंगे।
फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की कितनी संभावना है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 66 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है।
ऊंची ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
ब्याज दरें ऊंची होने पर बिना ब्याज वाले सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिससे निवेशक सरकारी बॉन्ड और नकद जमा की ओर आकर्षित होते हैं और सोने पर दबाव बनता है।
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