भारत में विदेशी पूंजी का प्रवाह लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की मजबूत आर्थिक स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत किए गए 12 वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से देश में अब तक कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगभग 843 अरब डॉलर यानी करीब 81 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का यह भरोसा निरंतर बढ़ता जा रहा है, जिसका सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन हालिया समय में देखने को मिला जब एक ही वित्त वर्ष के दौरान देश में एफडीआई का प्रवाह 95 अरब डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच गया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा वित्त वर्ष 2025-26 का विदेशी निवेश
वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 94.53 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर दर्ज हुआ है। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 तक के पूरे कालखंड में कुल निवेश प्रवाह 843 अरब डॉलर रहा। ‘मेक इन इंडिया’ पहल की 12वीं वर्षगांठ के मौके पर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह प्रगतिशील वृद्धि देश के विनिर्माण और समग्र व्यापारिक परिवेश के लिए एक बेहद उत्साहवर्धक तस्वीर पेश करती है। इस अवधि में विदेशी कंपनियों ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाई है।
पीएलआई योजनाओं से उत्पादन, निर्यात और रोजगार में उछाल
विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने में केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 31 मार्च तक प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इन योजनाओं के अंतर्गत 2.40 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष वास्तविक निवेश धरातल पर उतरा है। इस ठोस पूंजीगत निवेश के चलते 23.8 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई, जबकि 15.2 लाख करोड़ रुपये का माल विदेशों में निर्यात हुआ। इसके अलावा, रोजगार सृजन के मोर्चे पर भी इन योजनाओं ने गहरा असर डाला है, जिसके जरिए अब तक 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को मिला सीधा फायदा
पीएलआई व्यवस्था का सबसे व्यापक लाभ उन्नत विनिर्माण तथा तकनीकी क्षेत्रों को प्राप्त हुआ है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर तथा विशेष इस्पात जैसे सेक्टरों में उत्पादन क्षमताओं का तेजी से विस्तार हुआ है। इन उच्च मूल्य वाले उद्योगों ने न केवल घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए भी प्रेरित किया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट औद्योगिक शहरों में भारी पूंजी
भारत में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर निरंतर बल दिया जा रहा है, जो विदेशी निवेशकों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत देश भर में नए औद्योगिक स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं। इन अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में विदेशी निवेशक भारी मात्रा में पूंजी लगा रहे हैं, जिससे एफडीआई के आंकड़ों में भारी उछाल आया है। यदि निवेश के स्रोतों पर नजर डालें तो भारत में सबसे बड़ा एफडीआई प्रवाह सिंगापुर से दर्ज किया जाता है, जिसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और विभिन्न यूरोपीय देश प्रमुख निवेशक के रूप में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
















