अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती धमक के बीच प्रमुख विदेशी मुद्राओं में व्यापक फेरबदल देखने को मिल रहा है। यूरो इस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे साप्ताहिक घाटे की ओर बढ़ रहा है। विनिमय दर में 1.14 के अहम स्तर से नीचे गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते तकनीकी विश्लेषकों का ध्यान महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर टिक गया है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD की मौजूदा कीमत 1.14 के करीब है, जो पिछले बंद स्तर 1.14 से मामूली 0.09 प्रतिशत ऊपर है। 14-दिवसीय RSI संकेतक 28 के स्तर पर आकर ओवरसोल्ड क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि मौजूदा सुधारात्मक गिरावट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच सकती है। हालांकि, तकनीकी मोर्चे पर 50-दिवसीय और 200-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज क्रमशः 1.15 और 1.16 पर बने हुए हैं, जो दीर्घकालिक मंदी के रुख और डेथ क्रॉस की स्थिति को दर्शाते हैं।
यूरोपीय आंकड़ों की अनदेखी और तकनीकी स्तर
यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतकों में सुधार के बावजूद बाजार का रुख निराशाजनक बना हुआ है। सितंबर महीने के लिए जर्मनी और फ्रांस के सर्विसेज पीएमआई आंकड़ों में मजबूती दर्ज की गई थी। इसके साथ ही जर्मन आईएफओ बिजनेस सर्वे में भी हालिया बढ़त देखने को मिली थी। आम तौर पर ऐसे सकारात्मक आर्थिक आंकड़े मुद्रा को निचले स्तरों पर खरीदारी का सहारा प्रदान करते हैं, लेकिन इस बार इन आंकड़ों के सामने आने के बाद भी निवेशकों ने निचले स्तरों पर लिवाली से दूरी बनाए रखी। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 100-सप्ताह के मूविंग एवरेज 1.1356 का बचाव और तकनीकी संकेतकों का अत्यधिक बिकवाली दर्शाना यह बताता है कि यह गिरावट फिलहाल थम सकती है। इस समय मुद्रा जोड़ी के लिए 1.1270 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1.1450 पर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दोतरफा मार
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी भारी बिकवाली देखी गई। AUD/USD जोड़ी अगस्त की शुरुआत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई और रात भर के कारोबार में 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बेहद कमजोर नजर आई। इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारक सक्रिय हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताओं को फिर से भड़का दिया है। इसने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया, जिसने रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया और ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को भारी दबाव में ला दिया।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का रुख
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच का समीकरण भी काफी उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान USD/JPY में मामूली नरमी आई, जिससे हाल ही में 159.00 के तीन सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंचे इसके मजबूत सफर पर अस्थायी ब्रेक लग गया। जापानी येन में गिरावट पर दांव लगाने वाले ट्रेडर्स अब सतर्क हो गए हैं क्योंकि बाजार में सरकारी हस्तक्षेप का डर गहराने लगा है। दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व के सख्त दृष्टिकोण और कच्चे तेल से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबाव के चलते अमेरिकी डॉलर में तेजी का मजबूत रुझान बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि फेड और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले सप्ताह एक जैसा कदम उठाते हुए ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी। दोनों ही केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के जोखिमों का सामना कर रहे हैं और दोनों ने ही संकेत दिया है कि उनके भविष्य के फैसले पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। हालांकि, बैंक ऑफ जापान की पिछली बढ़ोतरी का लहजा नरम माना गया था, जो येन की बढ़त को सीमित रख सकता है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स के मोर्चे पर भी मिला-जुला रुख दिखाई दे रहा है। सर्राफा बाजार में सोने को सप्ताह के अंत में कुछ खरीदारों का समर्थन मिला और इसमें मामूली बढ़त दर्ज की गई। इस बढ़त से सोने ने अपने साप्ताहिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की, हालांकि यह अभी भी प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। ग्रीनबैक पर ताजा बिकवाली दबाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट ने पीली धातु की इस हल्की बढ़त को आधार प्रदान किया है। दूसरी तरफ, व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार शुक्रवार को स्थिरता के दौर से गुजरता दिखा। बिटकॉइन 84,000 डॉलर के स्तर से थोड़ा ऊपर स्थिर होकर अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करता नजर आया। इथेरियम भी बिटकॉइन की तर्ज पर गिरावट दर्ज करता दिखा। हालांकि, रिपल यानी एक्सआरपी ने इस सामान्य रुझान से अलग तस्वीर पेश की और बाजार में अपनी अलग दिशा बनाई।



















