अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो बनाम ब्रिटिश पाउंड (EUR/GBP) की विनिमय दर 0.8550 के स्तर के पास अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रही है। इस जोड़ी में खरीदारी करने वाले निवेशक तीन हफ्ते के उच्चतम स्तर की ओर रुख कर रहे हैं। इस मजबूती के पीछे कच्चे तेल के दामों में आई गिरावट और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा अपनाई गई सख्त मौद्रिक नीति मुख्य वजह मानी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ, ब्रिटेन के सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव और बैंक ऑफ इंग्लैंड की अनिश्चित ब्याज नीति ने ब्रिटिश पाउंड की रफ्तार को थाम दिया है।
यूरो-पाउंड जोड़ी में मजबूती के प्रमुख कारण
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने और संघर्ष विराम की स्थिति बनने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ऊर्जा आयात पर निर्भर यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए तेल का सस्ता होना एक बड़ी राहत बनकर आया है, जिससे साझा मुद्रा यूरो को सीधा समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की हालिया मौद्रिक नीति बैठक में अपनाए गए कड़े रुख ने भी बाजार में यूरो की साख को बढ़ाया है। सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने के संकेतों से यूरो के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और ब्याज दर परिदृश्य
वित्तीय संस्थान आईएनजी के अर्थशास्त्रियों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा जल्द ब्याज दरें घटाने की संभावनाओं पर संदेह जताया है। आईएनजी के विश्लेषकों का मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड के नए अनुमानों में मुद्रास्फीति चालू वर्ष की दूसरी छमाही और अगले वर्ष की शुरुआत में 3 प्रतिशत के करीब रह सकती है। यह आंकड़ा सेंट्रल बैंक के सहनशीलता क्षेत्र के भीतर माना जाता है।
आईएनजी का मूल अनुमान है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड वर्ष 2026 तक अपनी नीतिगत ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा। दरों में कटौती और मौद्रिक नीति में ढील की प्रक्रिया अब वर्ष 2027 की वसंत ऋतु तक टलती दिख रही है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि यह पूरा खाका इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले शरद ऋतु बजट में यूके सरकार द्वारा कोई बड़ा राजकोषीय प्रोत्साहन न दिया जाए।
ब्रिटेन की राजकोषीय चुनौतियां और राजनीतिक असर
ब्रिटिश पाउंड की कमजोरी का एक प्रमुख कारण देश के राजकोषीय ढाँचे को लेकर बनी चिंताएँ हैं। नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम द्वारा घोषित जन कल्याणकारी खर्च योजनाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। बर्नहैम ने परिवहन किरायों और बिजली के बिलों की ऊपरी सीमा तय करने यानी कैप लगाने का ऐलान किया है। इन घोषणाओं के बाद से वित्तीय बाजारों में इस बात को लेकर हलचल तेज हो गई है कि इन योजनाओं के लिए धन कहाँ से आएगा। साल 2022 में पूर्व प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस के कार्यकाल में हुए वित्तीय उथल-पुथल के बाद से यूके का सार्वजनिक वित्त बाजार के लिए बेहद संवेदनशील विषय बन चुका है।
ब्रिटिश पाउंड का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक बाजार ढांचा
ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग (GBP) दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से चला आ रहा है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और वैश्विक विदेशी मुद्रा (FX) बाजार में चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली करेंसी है। वर्ष 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में पाउंड की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जिसका दैनिक कारोबार औसतन 630 अरब डॉलर रहता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड के तीन प्रमुख ट्रेडिंग जोड़े सबसे प्रमुख हैं
- GBP/USD: जिसे फॉरेक्स बाजार में 'केबल' के नाम से जाना जाता है, यह कुल फॉरेक्स कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है।
- GBP/JPY: जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' कहते हैं, यह 3 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।
- EUR/GBP: यूरो और पाउंड का यह जोड़ा पूरे वैश्विक मुद्रा कारोबार का 2 प्रतिशत हिस्सा संभाले हुए है।
पाउंड स्टर्लिंग के नियमन और इसे जारी करने की पूरी जिम्मेदारी ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) के पास होती है।
आर्थिक आंकड़े और व्यापार संतुलन का मुद्रा पर प्रभाव
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मानक लगभग 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर तय किया गया है। इसे हासिल करने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में बदलाव का सहारा लेता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो बैंक दरों में बढ़ोतरी करता है ताकि कर्ज महंगा हो और बाजार से नकदी घटे। ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं, जिससे पाउंड मजबूत होता है। इसके विपरीत, महंगाई कम होने पर आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरें घटाई जाती हैं।
ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई (PMI) तथा रोजगार के आंकड़े पाउंड की दिशा तय करते हैं। मजबूत आंकड़े अर्थव्यवस्था की बेहतरी दिखाते हैं, जिससे पाउंड में तेजी आती है। इसी प्रकार, व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) भी एक अहम संकेतक है। जब किसी देश के निर्यात की मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उस देश की मुद्रा खरीदने से उसकी कीमत बढ़ती है। सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती देता है, जबकि व्यापार घाटा उसे कमजोर करता है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों की व्यापक हलचल और अन्य संपत्ति वर्ग
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के अन्य हिस्सों में भी अनिश्चितता देखी जा रही है
- GBP/USD: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक से पहले डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे GBP/USD जोड़ी 1.3300 के स्तर के पास दबाव में है।
- EUR/USD: यूरो-डॉलर जोड़ी 1.1300 के मध्य स्तर के पास सीमित दायरे में कारोबार कर रही है।
- सोना: कीमती धातुओं में सोने की कीमत 0.85 प्रतिशत घटकर 4,050 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई है, जो पहले 4,100 डॉलर का स्तर पार करने में विफल रही थी।
- डिजिटल एसेट्स: क्रिप्टो बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है, जहां रिपल (XRP) 4 प्रतिशत से अधिक और स्टेलर (XLM) 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुके हैं।



















