अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में बुधवार को ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (AUD/USD) 0.7050 के स्तर के आसपास समेकन के चरण में प्रवेश कर गई है। यह स्तर 17 जून के बाद का सबसे उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक वित्तीय बाज़ार में कई परस्पर विरोधी आर्थिक कारकों के कारण इस करेंसी पेयर की आवाजाही एक सीमित दायरे में बंध गई है। एक ओर जहां अमेरिकी डॉलर की ओर निवेशकों का आकर्षण फिर से देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को कम किया है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर आ रहे मिले-जुले संकेतों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को पुनर्जीवित कर दिया है। इस मांग के कारण ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ऊपरी बढ़त पर अंकुश लग गया है। हालांकि, अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें गिरकर लगभग चार सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की सस्ती दरों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद बंधी है।
मुद्रास्फीति की चिंताओं में कमी आने के कारण वित्तीय बाज़ार के कारोबारियों ने अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आगे और सख्ती किए जाने की संभावनाओं को कम कर दिया है। केंद्रीय बैंक की ओर से और अधिक सख्त नीति न अपनाए जाने की उम्मीदों से अमेरिकी डॉलर में किसी भी बड़े उछाल को रोकने में मदद मिली है। इसके परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलियन डॉलर को नीचे गिरने से सहारा मिला है, लेकिन कई अन्य कारक इसे ऊपर जाने से रोक रहे हैं।
चीन के सेवा क्षेत्र के आंकड़ों से ऑस्ट्रेलियन डॉलर पर दबाव
ऑस्ट्रेलियन डॉलर की ऊपरी सीमा तय करने वाला मुख्य कारक चीन से सामने आया निराशाजनक आर्थिक आंकड़ा है। चीन के रेटिंगडॉग सर्विसेज पीएमआई आंकड़े में जुलाई महीने के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले महीने के 54.1 से घटकर जुलाई में 50.4 पर आ गया है। सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में आई यह सुस्ती चीन की आर्थिक गति को धीमा दर्शाती है। ऑस्ट्रेलिया के लिए चीन एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर पड़ता है और यह आंकड़े ऑस्ट्रेलियन डॉलर में नई तेज़ी लाने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
यूरोपीय सत्र में यूरो और ब्रिटिश पाउंड का प्रदर्शन
वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो मंगलवार के यूरोपीय ट्रेडिंग सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड पर बिकवाली का दबाव देखा गया। पाउंड अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के विपरीत 0.1% गिरकर लगभग 1.3420 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इसके विपरीत, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) ने सोमवार की गिरावट को पलटते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा ली है और मंगलवार को 1.1500 की बाधा को पार कर आगे बढ़ गई है। मध्य पूर्व संकट के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर पर हल्का दबाव बनाए रखा, जिससे यूरो को उबरने में मदद मिली।
भारतीय रिज़र्व बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय पर नजर
एशियाई बाज़ार में निवेशकों का ध्यान भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर भी टिका हुआ है। रिज़र्व बैंक बुधवार को सुबह 10:00 बजे भारतीय मानक समय (04:30 GMT) पर अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा निर्णय की घोषणा करने वाला है। यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की अवधि और उसके आर्थिक प्रभावों को लेकर उच्च अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाज़ार की अनिश्चितता और कच्चे तेल के बदलते रुख के बीच केंद्रीय बैंक का यह निर्णय क्षेत्रीय मुद्रा बाज़ारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



















