आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तहलका मचाने वाले चैटबॉट चैटजीपीटी की मूल कंपनी ओपनएआई ने अमेरिकी शेयर बाजार में कदम रखने की औपचारिक शुरुआत कर दी है। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग, यानी एसईसी के समक्ष कंपनी ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से जुड़े गोपनीय शुरुआती दस्तावेज जमा कराए हैं। सिलिकॉन वैली की प्रमुख तकनीकी कंपनियों में सार्वजनिक मंच पर आने की मची होड़ के बीच यह कदम उठाया गया है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कंपनी ने पुष्टि की कि उसने बाजार नियामक के पास अपने प्रारंभिक कागजात औपचारिक तौर पर दाखिल कर दिए हैं।
पब्लिक होने के समय और तारीख पर अंतिम फैसला बाकी
दस्तावेज नियामक के पास पहुंच जाने के बावजूद प्रबंधन ने अभी तक बाजार में शेयर उतारने की निश्चित तारीख का ऐलान नहीं किया है। गोपनीयता बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया के उलट खुद सामने आकर जानकारी साझा करने पर कंपनी ने अपना पक्ष भी साफ किया। कंपनी के अनुसार, उन्हें यह आशंका थी कि यह संवेदनशील जानकारी बाहर लीक हो सकती है, इसलिए उन्होंने खुद ही सार्वजनिक तौर पर इसकी घोषणा करना उचित समझा।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका समय अभी जानबूझकर तय नहीं किया गया है क्योंकि कई महत्वपूर्ण रणनीतिक काम ऐसे होते हैं जिन्हें एक निजी कंपनी के तौर पर संभालना कहीं ज्यादा सुगम और लचीला होता है। प्रबंधन का मानना है कि यह एक बेहद जटिल निर्णय है, लेकिन कागजात जमा कराने से उन्हें यह सुविधा मिल जाती है कि परिस्थितियां अनुकूल होते ही वे बिना समय गंवाए बहुत जल्द पब्लिक हो सकें। गौर करने वाली बात यह भी है कि ओपनएआई की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी एंथ्रोपिक ने भी जून की शुरुआत में सार्वजनिक निर्गम लाने की दिशा में अपने दस्तावेज दाखिल किए थे।
स्पेसएक्स की योजना और भारी पूंजी जुटाने की चुनौती
बाजार में केवल सॉफ्टवेयर कंपनियां ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स भी एआई को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है और संभावित सार्वजनिक निर्गम की तैयारी में जुटी हुई है। ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने पिछले साल आईपीओ को सबसे संभावित रास्ता बताया था। ऑल्टमैन का मानना था कि बड़े पैमाने पर एडवांस एआई मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए विशाल वित्तीय संसाधनों और भारी पूंजी की सख्त जरूरत है।
कंपनी का सफर बेहद दिलचस्प रहा है, जहां साल 2015 में एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में शुरू हुआ यह उपक्रम आज लगभग 852 अरब अमेरिकी डॉलर के विशाल मूल्यांकन तक पहुंच चुका है। इतनी बड़ी मूल्यांकन सीमा तक पहुंचने के बाद अब कंपनी को सार्वजनिक निवेशकों से नए सिरे से पूंजी जुटाने की जरूरत महसूस हो रही है।
कंप्यूटिंग लागत, घाटा और एजीआई का विजन
वित्तीय मोर्चे पर नजर डालें तो ओपनएआई ने अभी तक अपने कुल राजस्व या मुनाफे को लेकर विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। भारी भरकम कंप्यूटिंग क्षमता, महंगे सर्वर और उन्नत डेटा प्रोसेसिंग के चलते कंपनी पर खर्चों का जबर्दस्त दबाव है और वह फिलहाल नुकसान में चल रही है। इस आर्थिक दबाव के बीच भी वह एंथ्रोपिक जैसी मजबूत प्रतिस्पर्धी कंपनियों से हर मोर्चे पर लोहा ले रही है।
सैम ऑल्टमैन ने एक अलग बयान में कंपनी के दीर्घकालिक विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य एक पूर्ण स्वचालित एआई शोधकर्ता तैयार करना, वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार को तेज करना और हर इंसान की पहुंच में पर्सनल आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि एजीआई कई जटिल कार्यों में इंसानों के बराबर या उनसे भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होगा और आने वाले वक्त में यह तकनीक व्यक्तिगत तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ कराई जाएगी।



















