अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई को तेज करते हुए अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में एक कड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेन्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि 23 सितंबर तक दुनिया भर में सभी ईरानी एयरलाइंस का परिचालन बंद कर दिया जाएगा। इस कड़े कदम के साथ ही अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और सेवा प्रदाताओं को सीधी चेतावनी जारी की गई है कि यदि वे ईरानी विमानों के साथ किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक या तकनीकी सहयोग जारी रखते हैं, तो उन्हें वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग कर दिया जाएगा।
बेसेन्ट ने सोमवार को कहा, "23 सितंबर को दुनिया भर में सभी ईरानी एयरलाइंस बंद कर दी जाएंगी।" इसके साथ ही उन्होंने प्रतिबंधों का दायरा स्पष्ट करते हुए आगे कहा, "यदि वे उतरते हैं, तो आप उन्हें ईंधन नहीं दे सकते, आप उन्हें लैंडिंग सेवाएं प्रदान नहीं कर सकते, आप उन्हें टिकट नहीं बेच सकते, अन्यथा आपको डॉलर प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा।" यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा तेहरान के खिलाफ शुरू किए गए व्यापक आर्थिक अभियान की सबसे हालिया कड़ी है, जो अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के साये में लगातार आगे बढ़ रहा है।
कच्चे तेल के बाजार पर वैश्विक भू-राजनीति का असर
भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों की इस घोषणा के बीच ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत 0.41% की दैनिक बढ़त के साथ $92.18 प्रति बैरल पर दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में WTI क्रूड एक बेहद महत्वपूर्ण मानक माना जाता है, जो वैश्विक आपूर्ति और मांग की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकने वाला WTI क्रूड ऑयल का एक प्रमुख प्रकार है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ WTI उन तीन मुख्य किस्मों में शामिल है जिनका दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार होता है। अपने अपेक्षाकृत कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण WTI को 'लाइट' और 'स्वीट' क्रूड भी कहा जाता है। इसे एक उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे रिफाइन करना काफी आसान होता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। मीडिया और ऊर्जा व्यापार में WTI की कीमतों को मानक बेंचमार्क के रूप में लगातार उद्धृत किया जाता है।
तेल की कीमतों को तय करने वाले मुख्य कारक
अन्य सभी वित्तीय परिसंपत्तियों की तरह WTI क्रूड ऑयल की कीमतों का मुख्य आधार भी आपूर्ति और मांग का संतुलन है। वैश्विक आर्थिक विकास में तेजी आमतौर पर तेल की मांग बढ़ाने का कारण बनती है, जबकि कमजोर वैश्विक वृद्धि मांग को घटाने का काम करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों पर सीधा असर डालते हैं।
इसके अलावा पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी कीमतों को दिशा देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। WTI कच्चे तेल की कीमत पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य का भी गहरा प्रभाव पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से खरीदारों के लिए तेल अधिक किफायती हो जाता है, जबकि मजबूत डॉलर तेल की कीमतों को अन्य मुद्राओं के मुकाबले महंगा बना देता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका
तेल बाजार की दिशा निर्धारित करने में अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी (EIA) द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है। इन्वेंट्री में होने वाले बदलाव आपूर्ति और मांग के उतार-चढ़ाव को रेखांकित करते हैं। यदि डेटा इन्वेंट्री में गिरावट दर्शाता है, तो यह बढ़ी हुई मांग का संकेत हो सकता है, जिससे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरी ओर, इन्वेंट्री में बढ़ोतरी अतिरिक्त आपूर्ति को दर्शाती है, जो कीमतों पर दबाव बनाती है।
API की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी की जाती है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA का डेटा अगले दिन यानी बुधवार को सार्वजनिक होता है। आमतौर पर दोनों के नतीजे एक समान दिशा दिखाते हैं और 75% समय इनके आंकड़ों में अंतर 1% के भीतर ही रहता है। एक सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA के डेटा को बाजार में अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
दूसरी ओर, 12 तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक हर साल आयोजित होने वाली दो बैठकों में अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा कम करने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक आपूर्ति सीमित हो जाती है और WTI तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके विपरीत जब संगठन उत्पादन बढ़ाता है, तो उसका उल्टा प्रभाव देखने को मिलता है। ओपेक+ इस संगठन का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों के रुख
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और डॉलर के मजबूत रुख के बीच विदेशी मुद्रा बाजारों में भी कई हलचलें देखने को मिल रही हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर बनी रही। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर की कड़ी मौद्रिक टिप्पणियों के बावजूद निवेशक ट्रंप और शी के बीच सप्ताह के अंत में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक की प्रतीक्षा में सतर्क दिखे। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख डॉलर को मजबूती प्रदान कर रहा है।
जापानी मुद्रा के मोर्चे पर USD/JPY का स्तर एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य से नीचे स्थिर रहा। सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन में बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद की। हालांकि बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) द्वारा 31 वर्षों के उच्चतम स्तर पर की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बावजूद नीतिगत लहजा नरम होने के कारण येन पर दबाव बना रहा। BoJ ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के कदम के तहत 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो कि कई हफ्तों से बाजार की आम अपेक्षाओं के अनुरूप था।
सोने की चाल और बॉन्ड यील्ड का तनाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने एशियाई सत्र के दौरान फिर से सकारात्मक बढ़त हासिल की, लेकिन ठोस खरीदारी की कमी के कारण यह $4,400 के स्तर से नीचे ही रहा। तेल की कीमतों में नरमी ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को कम किया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और गैर-ब्याज वाली इस पीली धातु को कुछ सहारा मिला। इसके बावजूद फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और मध्य पूर्व का बढ़ता तनाव डॉलर को जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बनाए हुए है, जिससे सर्राफा बाजार की तेजी सीमित बनी हुई है।
तीसरी तिमाही के अंतिम सप्ताहों में वैश्विक वित्तीय बाजार एक असामान्य स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां अनिश्चितता और अस्थिरता हावी है। सरकारी बॉन्ड बाजार में तनाव केंद्रित बना हुआ है, जहां शुक्रवार को यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड में एक बार फिर उछाल देखने को मिला था।

















