अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वित्तीय बाजारों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिल रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान से जुड़े कई संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बीजिंग ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ चीन की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में है और इसमें किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा। इस बीच, वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर ने सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे फॉरेक्स और कमोडिटी मार्केट में मिश्रित संकेत मिले हैं।
ईरान पर अमेरिकी पाबंदियां और चीन का पलटवार
अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में ईरान के आर्थिक नेटवर्क को प्रभावित करने के उद्देश्य से 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और समुद्री जहाजों को लक्षित करते हुए पाबंदियों का नया दौर शुरू किया है। वॉशिंगटन का उद्देश्य ईरान की मुख्य वित्तीय धाराओं को रोकना है, हालांकि इन उपायों में सबसे कठोर संभव प्रतिबंध शामिल नहीं किए गए हैं। इसके जवाब में चीन ने कड़ा रुख अपनाया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चीन अपने जायज अधिकारों और हितों की पूरी तरह से रक्षा करेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दो संप्रभु राष्ट्रों के बीच वैध आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। बीजिंग की इस टिप्पणी के बाद वैश्विक बाजार सहभागियों ने बदलती परिस्थितियों का तुरंत आकलन करना शुरू कर दिया।
अमेरिकी डॉलर की स्थिति और मौद्रिक नीति का ढांचा
चीनी बयानों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच, अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) दिन के निचले स्तरों से उबरते हुए 99.00 के करीब पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो दुनिया भर में लगभग 88 प्रतिशत दैनिक विदेशी मुद्रा लेनदेन में इस्तेमाल होता है। यह दैनिक आंकड़ा लगभग 6.6 ट्रिलियन डॉलर के कारोबार को दर्शाता है।
डॉलर की मजबूती के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियां सबसे बड़ा कारक होती हैं। फेडरल रिजर्व का मुख्य उद्देश्य महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर बनाए रखना और पूर्ण रोजगार सुनिश्चित करना होता है। जब महंगाई दर इस स्तर से ऊपर जाती है, तो ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनती है, जिससे डॉलर को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, सुस्त अर्थव्यवस्था या उच्च बेरोजगारी दर के समय दरों में कटौती से करेंसी पर दबाव बनता है।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग और टाइटनिंग का बाजार पर प्रभाव
फेडरल रिजर्व की अपरंपरागत नीतियों में क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) शामिल हैं। असाधारण परिस्थितियों में, जैसे 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय, फेडरल रिजर्व ने तरलता बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में सरकारी बॉन्ड खरीदे थे। इस प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव ईज़िंग कहा जाता है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है।
दूसरी ओर, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) के तहत केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड से मिलने वाली राशि का पुनर्निवेश नहीं करता। यह नीति बाजार से नकदी को वापस खींचती है और आमतौर पर डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है।
फॉरेक्स, गोल्ड और क्रिप्टोकरेंसी मार्केट की स्थिति
मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों पर भी डॉलर की रिकवरी का प्रभाव देखा गया। GBP/USD की जोड़ी लगातार दूसरे दिन 1.3650 के नीचे सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई। वहीं, EUR/USD की जोड़ी 1.1650 के स्तर के आसपास संघर्ष करती दिखी, जहां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी ने यूरो पर दबाव डाला।
कीमती धातुओं में, सोना $4,700 के हालिया उच्च स्तर से थोड़ा फिसलकर $4,650 के नीचे आ गया। ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिससे सोने की तेजी थमी है। इसके विपरीत, क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला, जहां बिटकॉइन की कीमत $80,000 के ऊपर बनी रही। इस दौरान Aerodrome Finance (AERO) और Virtuals Protocol (VIRTUAL) जैसे टोकन में भी अच्छा प्रदर्शन देखा गया।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा तरलता कदम
वित्तीय तंत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। विभाग ने 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक बॉन्ड बाजार में तरलता सहायता संचालन को दोगुना करने का निर्णय लिया है।
9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू रहने वाली इस योजना के तहत, ट्रेजरी प्रति ऑपरेशन बाईबैक की अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन करेगी। इस कदम का उद्देश्य बॉन्ड बाजार में बढ़ते यील्ड को नियंत्रित करना और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।



















