मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर चंदेरी स्थित प्रसिद्ध किला कोठी परिसर में एक बड़े प्रशासनिक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। खुद को केंद्र और राज्य सरकार के शीर्ष मंत्रालयों में उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी बताकर युवाओं को आकर्षक वेतन वाली सरकारी नौकरियां दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाली मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके सगे भाई सुधांशु सिंह राजपूत को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। भोपाल निवासी यह महिला ठग चंदेरी के चार स्थानीय युवकों से मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सीधी भर्ती और स्थायी नौकरी का झांसा देकर 9 लाख 80 हजार रुपये की मोटी रकम नकद ऐंठ चुकी थी। जब पीड़ितों को धोखाधड़ी का अहसास हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, तब जिला पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में एक सुनियोजित घेराबंदी करके दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पुलिस के सामने फर्जी पहचान पत्र, कूटरचित दस्तावेज, लग्जरी वाहनों का इस्तेमाल और सरकारी अमले जैसा कृत्रिम रुतबा कायम करने का पूरा संगठित ताना-बाना उजागर हुआ है।
चंदेरी के किला कोठी में रची गई ठगी की प्रारंभिक पटकथा
पुलिस जांच में सामने आई विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत करीब एक वर्ष पूर्व हुई थी। 7 अप्रैल 2025 को मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत, उसका भाई सुधांशु सिंह राजपूत, तथा उनके दो अन्य साथी तनुज बैश्य और अंजली सिंह चंदेरी पहुंचे थे। इन चारों आरोपियों ने चंदेरी के प्रतिष्ठित पर्यटन स्थल किला कोठी में एक आलीशान कमरा किराए पर लिया और वहां प्रवास किया। इसी प्रवास के दौरान आरोपियों की मुलाकात चंदेरी क्षेत्र के रहने वाले चार शिक्षित युवाओं से हुई, जिनमें पसियापुरा निवासी जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी शामिल थे।
शुरुआती बातचीत के दौरान तृप्ति सिंह राजपूत ने खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग (पर्यटन विभाग) की एडिशनल डायरेक्टर के रूप में प्रस्तुत किया। उसने अपने बात करने के लहजे, प्रशासनिक शब्दावली और रुतबेदार व्यवहार से युवकों को प्रभावित किया। जब युवकों ने अपनी शिक्षा और करियर की चिंताओं को साझा किया, तो तृप्ति और उसके साथियों ने उन्हें केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) में उच्च वेतन वाली ग्रुप-ए और प्रशासनिक नौकरियों में सीधी नियुक्ति दिलाने का प्रलोभन दिया। तृप्ति ने आगे बढ़कर दावा किया कि वह स्वयं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की हेड (प्रमुख) के रूप में भी कार्यरत है और उसके पास मंत्रालयों में कई सीटें आवंटित करने का सीधा विवेकाधिकार है।
लाखों की नकदी और शैक्षणिक दस्तावेजों की मांग
सरकारी नौकरी की लालसा और अधिकारी के आभामंडल में आकर चारों युवा आरोपियों के बिछाए जाल में फंस गए। आरोपियों ने नौकरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और आधिकारिक नियुक्ति पत्र जारी करवाने के एवज में प्रत्येक उम्मीदवार से लगभग 3 लाख रुपये की मांग रखी। कुल मिलाकर चारों उम्मीदवारों से 12 लाख रुपये की कुल डील तय की गई, जिसमें से 9 लाख 80 हजार रुपये नकद अग्रिम (एडवांस) के रूप में तुरंत वसूल लिए गए। शेष 2 लाख रुपये की राशि नौकरी का आधिकारिक पत्र हाथ में मिलने के बाद दिए जाने का समझौता हुआ था।
आरोपियों ने न केवल 9.80 लाख रुपये नकद हासिल किए, बल्कि प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर चारों अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और अन्य अति महत्वपूर्ण व्यक्तिगत दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लिए। नकद राशि और दस्तावेज प्राप्त करने के बाद आरोपियों ने जल्द ही दिल्ली और भोपाल से नियुक्ति पत्र भेजने का आश्वासन दिया और चंदेरी से रवाना हो गए।
संदेह की शुरुआत और पुलिस का गोपनीय जांच जाल
महीनों बीत जाने के बाद भी जब नौकरी से संबंधित कोई आधिकारिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और न ही किसी मंत्रालय से संपर्क हुआ, तब जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी को तृप्ति सिंह राजपूत के दावों पर गंभीर संदेह होने लगा। जब पीड़ितों ने दिए गए फोन नंबरों पर संपर्क कर अपनी रकम या नौकरी के बारे में पूछताछ शुरू की, तो आरोपियों की ओर से गोलमोल जवाब दिए जाने लगे। ठगे जाने का अहसास होने पर चारों पीड़ितों ने पूरी आपबीती और साक्ष्य पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए।
मामले की संवेदनशीलता और फर्जी आईएएस अधिकारी के नाम के इस्तेमाल को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने तत्काल एक विशेष जांच दल का गठन किया। पुलिस ने उतावली में सीधी कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों की गतिविधियों, उनके फोन कॉल्स और नेटवर्क पर तकनीकी निगरानी स्थापित की। पुलिस ने शिकायतकर्ताओं को विश्वास में लिया और आरोपियों को पकड़ने के लिए एक रणनीतिक योजना तैयार की।
चंदेरी में दोबारा जाल बिछाकर आरोपियों की गिरफ्तारी
जांच टीम के निर्देश पर शिकायतकर्ताओं ने तृप्ति सिंह राजपूत से संपर्क साधा और उसे बताया कि चंदेरी में कुछ और नए युवा अभ्यर्थी हैं जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी पाने के लिए भारी रकम देने को तैयार हैं और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहते हैं। नए शिकार और अतिरिक्त पैसों के लालच में आकर तृप्ति सिंह राजपूत और उसका भाई सुधांशु सिंह राजपूत दोबारा चंदेरी आने के लिए तैयार हो गए।
23 अगस्त को तृप्ति सिंह राजपूत और सुधांशु सिंह राजपूत चंदेरी के किला कोठी पहुंचे। पुलिस टीम महिला पुलिस अधिकारियों के साथ किला कोठी परिसर के आसपास पहले से ही सादे कपड़ों में तैनात थी। जैसे ही आरोपी किला कोठी में ठहरे और पीड़ितों से बात करने लगे, पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान भी आरोपी तृप्ति ने अपने कथित प्रशासनिक पद का रौब झाड़ने का भरपूर प्रयास किया और पुलिस अधिकारियों को धमकी भरे लहजे में कहा, "तुम जानते नहीं हम कौन हैं।" हालांकि, पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य और साक्षियों की उपस्थिति के कारण पुलिस ने दोनों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
लग्जरी गाड़ियां, भारत सरकार की प्लेट और सीबीआई का फर्जी कार्ड
पुलिस पूछताछ और तलाशी के दौरान तृप्ति सिंह राजपूत के फर्जी प्रशासनिक रुतबे का हैरान कर देने वाला सच सामने आया। आरोपियों के पास से एक कथित सीबीआई (CBI) अधिकारी का फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ है। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस सीबीआई आईडी कार्ड का इस्तेमाल केवल रुतबा दिखाने के लिए किया जाता था या इसके जरिए किसी अन्य शहर में रंगदारी अथवा ठगी की वारदातों को अंजाम दिया गया है।
आरोपियों के काफिले और वाहनों के इस्तेमाल से जुड़ा तथ्य भी चौंकाने वाला है। गिरफ्तारी के समय तृप्ति सिंह राजपूत करीब 42 लाख रुपये मूल्य की अत्यधिक महंगी जीप (Jeep) गाड़ी से चंदेरी पहुंची थी। इससे पूर्व चंदेरी दौरों के समय वह किराए पर ली गई इनोवा (Innova) कार का उपयोग करती थी, जिस पर उसने अवैध रूप से "भारत सरकार" (Government of India) लिखी हुई आधिकारिक नेम प्लेट लगा रखी थी। पुलिस अब जीप और इनोवा वाहनों के मालिकों, उनकी बुकिंग प्रक्रिया और फर्जी सरकारी प्लेट लगाने में मदद करने वाले सहयोगियों की पहचान कर रही है।
ठगी की कमाई से 3 लाख रुपये के महंगे आईफोन की खरीदारी
पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि आरोपियों से की गई गहन पूछताछ में यह बात सामने आई है कि चंदेरी के युवाओं से ठगे गए 9.80 लाख रुपये में से बड़ी रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और महंगे गैजेट्स खरीदने में किया। तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु ने ठगी के पैसों से लगभग 1.50-1.50 लाख रुपये कीमत के दो अत्याधुनिक आईफोन (iPhone) मोबाइल खरीदे थे। सिर्फ इन दो मोबाइल फोन पर ही ठगी की रकम से 3 लाख रुपये उड़ा दिए गए थे।
पुलिस अब आरोपियों के सभी बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और यूपीआई ट्रांसफर का ब्योरा खंगाल रही है ताकि ठगी की शेष राशि की बरामदगी की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध धन से और कौन-कौन सी अचल या चल संपत्तियों की खरीद की गई है।
बिजनेसमैन से फर्जी आईएएस बनकर शादी और पारिवारिक विवाद
पुलिस जांच में तृप्ति सिंह राजपूत के अतीत से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी उजागर हुई हैं। पुलिस को प्राथमिक जांच में पता चला है कि तृप्ति ने पूर्व में भोपाल के एक स्थापित व्यवसायी (बिजनेसमैन) से भी खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर शादी रचाई थी। शादी के कुछ समय बाद जब पति को उसके सरकारी अधिकारी होने के दावों पर शक हुआ और उसकी वास्तविक सच्चाई उजागर हुई, तो दोनों के बीच भारी विवाद उत्पन्न हो गया। फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर व्यवसायी पति ने तृप्ति से नाता तोड़ लिया और उसे अपने साथ रखने से इंकार कर दिया।
पुलिस की शुरुआती पूछताछ के दौरान तृप्ति सिंह राजपूत ने दावा किया है कि उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। पुलिस विभाग उसकी शैक्षणिक डिग्रियों, कॉलेजों और सत्यापित अभिलेखों की जांच कर रहा है ताकि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की सत्यता का पता लगाया जा सके।
विस्तृत जांच, अंतरराज्यीय तार और फरार साथियों की तलाश
पुलिस का मानना है कि तृप्ति सिंह राजपूत द्वारा संचालित यह ठगी का नेटवर्क केवल चंदेरी या भोपाल तक ही सीमित नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों में भी कई बेरोजगार युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाया होगा। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट्स, बैंक खातों और दस्तावेज फाइलों की फॉरेंसिक जांच कर रही है।
इस मामले में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत (उम्र 30 वर्ष, निवासी संत आशाराम नगर, बाग मुगालिया, भोपाल) और उसके भाई सुधांशु सिंह राजपूत (उम्र 23 वर्ष, जो खुद को पत्रकार बताता था) को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं, इस आपराधिक षड्यंत्र में शामिल दो अन्य सह-आरोपी तनुज बैश्य और अंजली सिंह फिलहाल पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की विशेष टीमें दोनों फरार आरोपियों की संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस अधीक्षक की आम जनता को प्रशासनिक सलाह
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने आम नागरिकों और विशेषकर बेरोजगार युवाओं से अपील की है कि वे सरकारी नौकरी दिलाने का दावा करने वाले किसी भी बिचौलिए या व्यक्ति के झांसे में न आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति यदि स्वयं को आईएएस, आईपीएस, सीबीआई या किसी केंद्रीय मंत्रालय का बड़ा अधिकारी बताकर पैसों के बदले नौकरी लगवाने का वादा करता है, तो उसके दावों की तुरंत आधिकारिक स्तर पर पुष्टि की जानी चाहिए।
एसपी ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों में नियुक्तियां केवल निर्धारित प्रतियोगी परीक्षाओं और पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं के माध्यम से ही होती हैं। किसी भी निजी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को नौकरी के नाम पर नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें। यदि किसी नागरिक को इस प्रकार के संदिग्ध आचरण या ठगी का अंदेशा होता है, तो वे तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर सूचना दर्ज कराएं।



















