वैश्विक स्तर पर तांबे की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है, जिसके पीछे मुख्य वजहें आपूर्ति में आ रही रुकावटें और कड़े होते बाजार समीकरण हैं। कॉमर्जबैंक की बारबरा लैम्ब्रेच के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कॉपर स्टडी ग्रुप यानी आईसीएसजी के ताजा आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि बाजार में तांबे की भारी कमी पैदा हो गई है।
आईसीएसजी के आंकड़ों से सामने आया घाटा
अंतरराष्ट्रीय कॉपर स्टडी ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में तांबे के बाजार में बड़े पैमाने पर अंडर-सप्लाई यानी मांग के मुकाबले आपूर्ति की कमी दर्ज की गई। मौसमी रूप से समायोजित करने के बाद यह घाटा करीब 85,000 टन रहा। इस भारी कमी के असर से चालू वर्ष की पहली छमाही का कुल सरप्लस यानी आधिक्य घटकर मात्र 32,000 टन पर आ गया है।
उत्पादन में बाधाएं और वैश्विक चिंताएं
आसमान छूती चिंताओं के बीच चीन से तांबे के उत्पादन में गिरावट की खबरें आई हैं, और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बाढ़ के कारण वहां की एक प्रमुख खनन कंपनी को अपने उत्पादन अनुमानों में कटौती करनी पड़ सकती है। इसके अलावा, चिली और कांगो में खानों के उत्पादन में कमजोरी ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन और कांगो के बाहर खदानों का आउटपुट कमजोर रहने से बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।
एलएमई वारंट और स्टॉक का हाल
लंदन मेटल एक्सचेंज यानी एलएमई पर रद्द किए गए वारंटों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी आपूर्ति संकट की आशंकाओं को हवा दे दी है। हालांकि एलएमई के कॉपर स्टॉक में मामूली बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन एलएमई कॉपर की निकासी के लिए दिए जाने वाले आर्डर 50,000 टन से अधिक बढ़ चुके हैं।
बाजार का नया रुख
इन तमाम वजहों से तांबे के बाजार में संतुलन काफी तंग हो गया है, जो इस कमोडिटी के लिए अधिक अनुकूल मूल्य वातावरण तैयार कर रहा है। उत्पादन के मोर्चे पर मिल रही लगातार बाधाएं और घटता सरप्लस आने वाले दिनों में कीमतों को और समर्थन दे सकते हैं।



















