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कच्चे तेल में गिरावट और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच सोने में लौटी हल्की मजबूती, पर फेडरल रिजर्व का रुख अभी भी बना अड़ंगाबाज़ार
2 नव॰ 2026, 4:45 pm (1 घंटे पहले)· 0

कच्चे तेल में गिरावट और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच सोने में लौटी हल्की मजबूती, पर फेडरल रिजर्व का रुख अभी भी बना अड़ंगा

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और खाड़ी कूटनीति की हलचल के बाद सोने में हल्की रिकवरी देखी जा रही है, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर सख्त उम्मीदें बड़ी तेजी को रोक रही हैं।

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तकनीकी विश्लेषण2 नवंबर 2026

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

GC का RSI 29 है।

आगे संभावित चाल

30 के ऊपर वापसी उछाल की पुष्टि करती है।

अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में हफ्ते के शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर में आई नरमी और कच्चे तेल के भाव में गिरावट ने पीली धातु को कुछ राहत पहुंचाई है। अमेरिकी सरकार और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए जारी राजनयिक बातचीत के सकारात्मक संकेतों ने वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव को कम करने की उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता और ऊर्जा आधारित महंगाई की चिंताएं सोने की किसी भी बड़ी छलांग पर लगातार लगाम लगाए हुए हैं।

ईरान-अमेरिका कूटनीतिक हलचल और कच्चे तेल पर असर

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ संदेशों का आदान-प्रदान लगातार बना हुआ है। उन्होंने इस प्रक्रिया को गति देने के लिए बताया कि उप विदेश मंत्री काज़िम गरीबाबादी दोहा में मौजूद हैं। राजनयिक हलकों में पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, यदि वॉशिंगटन अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करता है और तेहरान की प्रमुख मांगें स्वीकार कर लेता है, तो किसी समझौते पर सहमति बनने के 48 घंटों यानी दो दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुचारू रूप से खोला जा सकता है।

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इस संभावित राजनयिक प्रगति के मद्देनजर कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल का भाव लगभग 3 प्रतिशत टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे फिसल गया। ईंधन की लागत घटने से वैश्विक ऊर्जा महंगाई में राहत की उम्मीद बंधी है, जिससे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और सोने को थोड़ा सहारा मिला।

मुद्रा बाजार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का मौजूदा हाल

मुद्रा बाजार पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करता है, 0.27 प्रतिशत फिसलकर 101.70 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। शुरुआती कारोबार में यह इंडेक्स गिरकर 101.44 के एक सप्ताह के निचले स्तर तक भी पहुंच गया था।

दूसरी तरफ, 10 वर्षीय बेंचमार्क अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सात हफ्तों के निचले स्तर के करीब 4.91 प्रतिशत पर टिकी हुई है। यह स्तर अक्टूबर 2026 के अपने 5.36 प्रतिशत के चरम से काफी नीचे आ चुका है, जो वर्ष 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर रहा था। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचा बने रहने की चिंताओं के बावजूद यील्ड में आई इस नरमी ने सर्राफा बाजार को थोड़ी मजबूती प्रदान की है।

फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरों की संभावनाएं

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी अक्टूबर बैठक में महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई में सतर्क और धैर्यपूर्ण रवैया अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। यह फैसला 10-2 के बहुमत से लिया गया, जो सितंबर में की गई 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी के बाद आया था।

हालांकि, वित्तीय बाजारों में आगामी कदमों को लेकर गहमागहमी बरकरार है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर दिसंबर की बैठक में फेड द्वारा 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की 72 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार बनी महंगाई की चिंताएं केंद्रीय बैंक को अपनी सख्ती जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, जिससे गैर-यील्ड वाली पीली धातु यानी सोने पर लंबी अवधि के लिए दबाव बना हुआ है और वह हाल ही में छुए गए अक्टूबर 2025 के निचले स्तरों के करीब बनी हुई है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 और उसका वित्तीय प्रभाव

वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय अमेरिका के आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक आधे सफर में आयोजित होते हैं। इन चुनावों में मतदाता प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों का फैसला करते हैं, साथ ही कई राज्यों में गवर्नर और स्थानीय अधिकारियों का चयन भी होता है।

संघीय कानून के अनुसार नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार यानी 3 नवंबर 2026 को मतदान दिवस निर्धारित है। कई अमेरिकी राज्यों में अर्ली वोटिंग और डाक मतदान की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। यह चुनाव तय करेगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों के दौरान अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। जो दल बहुमत हासिल करता है, वही विधायी एजेंडा निर्धारित करता है, महत्वपूर्ण समितियों के अध्यक्ष चुनता है और सीनेट में न्यायाधीशों तथा शीर्ष अधिकारियों की नियुक्ति पर मुहर लगाता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, अगला राष्ट्रपति चुनाव नवंबर 2028 में प्रस्तावित है। ऐतिहासिक दृष्टि से, मध्यावधि चुनावों को मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जाता है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी अक्सर हाउस में सीटें गंवा बैठती है।

मध्यावधि चुनावों का बाजार और परिसंपत्तियों पर असर

अधिकांश वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि मध्यावधि नतीजों से अमेरिकी डॉलर पर एक मामूली और अल्पकालिक असर ही देखने को मिलेगा, किसी लंबे ट्रेंड की संभावना कम है। अमेरिकी कांग्रेस में दोनों दलों के बीच सत्ता का बंटवारा (डिवाइडेड कांग्रेस) एक आधारभूत परिदृश्य माना जा रहा है और बाजार ने इसे काफी हद तक पहले ही भुना लिया है।

ट्रेजरी यील्ड चुनावी नतीजों पर अधिक संवेदनशीलता दिखा सकती है। ऐसे नतीजे जो वित्तीय प्रोत्साहन की उम्मीद बढ़ाते हैं, वे यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों को ऊपर धकेलते हैं। इसके विपरीत, यदि राजनीतिक गतिरोध नए सरकारी खर्चों को रोकता है, तो दोनों में नरमी आ सकती है। इसके अलावा, सरकारी फंडिंग और ऋण सीमा (डेट सीलिंग) को लेकर पैदा होने वाले गतिरोध संक्षिप्त अवधि के लिए डॉलर को सुरक्षित संपत्ति के रूप में सहारा दे सकते हैं। हालांकि, छह से बारह महीनों की अवधि में अमेरिकी विकास दर और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति चुनाव नतीजों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित होगी।

ऐतिहासिक रूप से, अमेरिकी शेयर बाजार मध्यावधि चुनाव से पहले कमजोर और नतीजों के बाद मजबूत प्रदर्शन करते रहे हैं। वर्ष 1950 से अब तक के आंकड़ों के अनुसार, हर मध्यावधि चुनाव के 12 महीने बाद एसएंडपी 500 (S&P 500) सूचकांक में तेजी दर्ज की गई है, जहां 19 में से 19 बार औसतन 15 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। विश्लेषक इस पैटर्न को चुनावी नतीजों के बाद अनिश्चितता खत्म होने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, रणनीतिकारों का यह भी तर्क है कि 2026 में शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन इस ऐतिहासिक क्रम की परीक्षा ले सकता है।

बाजार अक्सर विभाजित सरकार का स्वागत करते हैं क्योंकि राजनीतिक गतिरोध करों, खर्चों और नियमों में अचानक बड़े बदलावों की संभावना को सीमित कर देता है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति के कार्यकाल में, विभाजित कांग्रेस के बाद के वर्षों में S&P 500 ने ऐतिहासिक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि फंडिंग समय सीमा, ऋण सीमा विवाद और संसदीय जांच अल्पावधि में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।

अन्य मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी का ताजा रुख

विदेशी मुद्रा बाजार में भी सोमवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र की गिरावट से उबरने में सफल रहा, क्योंकि ईरान से जुड़ी कूटनीतिक प्रगति ने निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया और सेफ-हेवन डॉलर पर दबाव बनाया। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पिछले गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे बना हुआ है, क्योंकि खरीदार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी नीतिगत निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

उधर डॉलर-येन (USD/JPY) जोड़ी ने नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के बाद के 157.00 से नीचे के निचले स्तर से उबरते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के करीब पहुंच गई। जापानी वित्त मंत्री तात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी का भी इस तेजी पर फिलहाल कोई खास असर नहीं दिखा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) लगभग 0.075 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। सितंबर के अंत से यह इसकी लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट है। ऑन-चेन डेटा एनालिटिक्स फर्म सेंटिमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, बड़े व्हेल्स अपने टोकन कम कर रहे हैं, जबकि अपेक्षाकृत छोटे व्हेल वॉलेट टोकन जमा कर रहे हैं। कमजोर ऑन-चेन आंकड़ों और तकनीकी कमजोरी के कारण डॉगकॉइन में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।

सोने का लाइव तकनीकी विश्लेषण और अहम स्तर

कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट में सोने (GC=F) का क्लोज-बेल लाइव भाव 3,910 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा है, जो पिछले 3,899 डॉलर के बंद स्तर से 0.27 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,879 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत का 0.38 गुना दर्ज किया गया है।

तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 29 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) का संकेत देता है। एमएसीडी (MACD) संकेतक -82.63 पर है, जो -68.45 की सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है और इसका हिस्टोग्राम -14.18 पर नकारात्मक रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय ईएमए 4,090 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,199 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,412 डॉलर पर स्थित हैं। इसके अलावा 50-दिवसीय एसएमए 4,279 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,516 डॉलर पर है। 50 ईएमए का 200 ईएमए से नीचे फिसलना डेथ क्रॉस बनाता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।

बोलिंजर बैंड (20, 2) का दायरा 3,925 डॉलर से 4,280 डॉलर के बीच फैला है, जिसका मध्य स्तर 4,103 डॉलर है। सोने की मौजूदा कीमत निचले बैंड से नीचे बनी हुई है। ट्रेंड की ताकत मापने वाला ADX इंडेक्स 31 पर है, जो गिरावट के मजबूत ट्रेंड की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 9 और सिग्नल लाइन 10 पर पहुंच चुकी है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 78.36 डॉलर पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा तय करता है। 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 3,879 डॉलर और रेसिस्टेंस 4,242 डॉलर के करीब आंका गया है। ट्रेडिंग के प्रमुख स्तरों में मुख्य पिवट 3,909 डॉलर है, जहां से पहला प्रतिरोध R1 3,929 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 3,948 डॉलर पर है, जबकि पहला सपोर्ट S1 3,890 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 3,870 डॉलर के स्तर पर स्थित है।

सवाल-जवाब

सोने की कीमतों में हालिया स्थिरता की मुख्य वजह क्या है?
कच्चे तेल का भाव 3 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर से नीचे आने और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 101.70 पर फिसलने से सोने को सहारा मिला है।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या बातचीत चल रही है?
ईरान के अनुसार यदि वॉशिंगटन नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तो समझौते के दो दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की क्या उम्मीद है?
ट्रेडर्स सीएमई फेडवॉच के अनुसार दिसंबर में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की 72 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं।
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार सोने का मौजूदा स्तर क्या है?
सोना 3,910 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जिसका आरएसआई 29 पर ओवरसोल्ड है और प्रमुख सपोर्ट 3,890 डॉलर व 3,870 डॉलर पर स्थित है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव कब हैं और इसका क्या महत्व है?
ये चुनाव 3 नवंबर 2026 को होने हैं, जो तय करेंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शेष कार्यकाल में अमेरिकी कांग्रेस के सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Gupta@rohan-gupta·18 मिनट पहले

कच्चा तेल सस्ता होने से सोने को थोड़ा सहारा तो मिला है, पर फेडरल रिजर्व के रुख को देखकर लगता नहीं कि अभी कोई बड़ी तेजी आएगी। वैसे क्या ईरान और अमेरिका के बीच ये बातचीत सच में किसी नतीजे तक पहुँचेगी या फिर से बात अटक जाएगी?

Sophie Laurent@sophie-laurent·17 मिनट पहले

रोहन, बात तो सही है तुम्हारी। फेड का रुख जब तक सख्त है, सोने में बड़ी छलांग मुश्किल है। और ईरान वाली बात पर तो सच में भरोसा करना थोड़ा मुश्किल ही लगता है।

Michael Anderson@michael-anderson·39 मिनट पहले

दोहा में जब ईरान के साथ बातचीत चल रही थी, तब मैं खुद वहां पास की एक मीटिंग में था। बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरते ही ऐसा लगा जैसे थोड़ी राहत की सांस ली हो, लेकिन फेडरल रिजर्व की सख्ती देखकर लगता नहीं कि ब्याज दरों में कोई नरमी जल्दी आने वाली है।

Ravikash Gupta@ravikash·38 मिनट पहले

माइकल, दोहा वाली बात सही है, पर सच कहूँ तो 100 डॉलर से नीचे आने वाला कच्चे तेल का आँकड़ा ही इस पूरी खबर में सबसे सुकून देने वाला लगा।

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