मिसाइल हमलों की ताजा घटनाओं के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी दर्ज की गई है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब की एक प्रमुख रिफाइनरी को निशाना बनाए जाने के बाद यह संकट पैदा हुआ है। इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व के साथ-साथ दुनियाभर में ईंधन की सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे निवेशकों और बाजारों में चिंता की स्थिति है।
सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमला
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी पर हवाई हमले किए हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, जिस रिफाइनरी पर यह हमला हुआ है, उसकी उत्पादन क्षमता 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन की है। हालांकि सऊदी अरब के अधिकारियों की तरफ से अभी तक इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मांग तेजी से बढ़ गई है।
ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई के नए दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर इसका तत्काल असर देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.48 डॉलर की बढ़त के साथ 28 अक्टूबर की सुबह 115.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसके अलावा अमेरिकी बास्केट का डब्ल्यूटीआई तेल भी 1.22 डॉलर की तेजी के साथ 101.12 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को कीमतों में करीब 2 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन ताजा हमलों के बाद बाजार फिर से उफन पड़ा है।
ईंधन की सप्लाई पर मंडराया संकट
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और मिसाइल हमलों का इतिहास रहा है, जिसमें खाड़ी युद्ध से लेकर रूस-यूक्रेन संघर्ष तक के दौरान तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। रिफाइनरी पर हमले की इस घटना से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और अधिक ऊंचाई छू सकती हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।


















