यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार में सुगबुगाहट तेज हो गई है। अगस्त के महीने में मुद्रास्फीति या महंगाई की दर बढ़कर 3.3 प्रतिशत सालाना पर पहुंच गई, जो इससे पिछले महीने में 2.9 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्षित दायरे से काफी दूर हो चुका है और इसमें ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान रहा है। ऊर्जा घटक में सालाना आधार पर 14.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते महंगाई लगातार ऊपर बनी हुई है।
यूरोपीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और नीति निर्माताओं का रुख
यूरोक्षेत्र की वर्तमान अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति और विकास का जो मिला-जुला असर दिख रहा है, उससे नीति निर्माताओं के बीच यह विश्वास मजबूत होने की संभावना है कि अर्थव्यवस्था आगे भी मौद्रिक सख्ती के दौर को आसानी से झेल सकती है। हालांकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मुख्य चिंता यह है कि महंगाई में लगातार हो रही यह वृद्धि आने वाले समय में व्यापक रूप से मजदूरी, सेवाओं और समग्र महंगाई की उम्मीदों तक फैल सकती है। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए बैंक की प्राथमिकता पहले ही कदम उठाने की हो सकती है ताकि स्थिति पर समय रहते काबू पाया जा सके।
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमान
मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल द्वारा बेंचमार्क डिपॉजिट फैसिलिटी रेट में 25 आधार अंकों यानी 25bp की बढ़ोतरी किए जाने की पूरी उम्मीद है। इस संभावित इजाफे के बाद यह दर बढ़कर 2.5 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। वित्तीय जानकारों और विभिन्न संस्थानों का मानना है कि जिस प्रकार से आर्थिक दबाव बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए नीति निर्माताओं के लिए कड़े कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।
विदेशी मुद्रा बाजारों और कमोडिटी में हलचल
वैश्विक बाजारों में अन्य मुद्राओं की स्थिति पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच उतार-चढ़ाव जारी है। जापानी येन को बैंक ऑफ जापान की तरफ से अधिक आक्रामक रुख की उम्मीदों और कथित हस्तक्षेप का समर्थन मिल रहा है। इसी बीच, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना हुआ है और व्यापारी अमेरिकी एनएफपी रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी 0.7200 के स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है, जबकि आरबीए के आक्रामक रुख के बीच निवेशक फेडरल रिजर्व की नीतियों पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बाद कुछ सुस्ती देखने को मिल रही है और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के करीब आ गया है। इसके अलावा, ऊर्जा बाजार में डीजल की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है जहां अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर के इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।


















