घरेलू इक्विटी बाजारों ने पिछले सप्ताह की गिरावट से उबरते हुए नवंबर के पहले कारोबारी हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की है। बीते सप्ताह निफ्टी 50 ने 2% की बढ़त दर्ज की, जबकि बीएसई सेंसेक्स 1.83% चढ़कर बंद हुआ। रोशनी के त्योहार दिवाली से ठीक पहले बाजार में आई इस मजबूती के बाद अब हर निवेशक और कारोबारी की नजर आने वाले दिनों की चाल पर टिकी है। बाजार की इस दिशा को परखने के लिए तकनीकी स्तर, विदेशी व घरेलू संस्थागत निवेशकों की पूंजी प्रवाह, कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे, वैश्विक संकेत और सेक्टोरल प्रदर्शन सबसे अहम भूमिका निभाने वाले हैं।
बाजार में रिकवरी को किन कारकों से मिला सहारा
बीते सप्ताह बाजार में देखने को मिली तेज वापसी कई सकारात्मक कारकों के एक साथ आने से संभव हुई। इसमें सबसे बड़ा योगदान बड़े पैमाने पर हुई शॉर्ट कवरिंग और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में आई उल्लेखनीय कमी का रहा। इसके अलावा अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट ने भी वैश्विक इक्विटी बाजारों के सेंटिमेंट को सहारा दिया। घरेलू मोर्चे पर सितंबर तिमाही के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे, जिसने बाजार में खरीदारी की नई ऊर्जा भरी। कंपनियों के सकारात्मक प्रबंधन बयानों ने भी धारणा को मजबूत किया, जिसमें ट्रेंट के बयानों ने निवेशकों के विश्वास को खासा बढ़ावा दिया। इसके साथ ही बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, रियल्टी और एफएमसीजी शेयरों में आई वैल्यू बाइंग ने बाजार के इस व्यापक सुधार को मजबूती प्रदान की।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का मजबूत निवेश प्रवाह
बाजार की इस तेजी में संस्थागत निवेशकों की वापसी सबसे बड़ा ट्रिगर बनकर उभरी है। विदेशी संस्थागत निवेशक बीते सप्ताह शुद्ध लिवाल बने और उन्होंने भारतीय इक्विटी में 7,767.16 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। वहीं दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी अपनी सक्रियता बनाए रखते हुए 3,109.79 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी दर्ज कराई। जानकारों का मानना है कि दोनों प्रमुख संस्थागत श्रेणियों की यह निरंतर खरीदारी बाजार के आधार को मजबूत कर रही है। आने वाले सप्ताह में भी संस्थागत प्रवाह, अर्निंग्स से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक बॉन्ड यील्ड की चाल घरेलू इक्विटी की दिशा तय करने वाले निर्णायक कारक बने रहेंगे।
निफ्टी 50 के लिए तकनीकी स्तर और अहम सपोर्ट जोन
तकनीकी चार्ट पर निफ्टी 50 ने बीते सप्ताह 2% की बढ़त बनाई और इसे अपने 200-वीक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के करीब मजबूत समर्थन मिला। पिछले पांच हफ्तों के दौरान सूचकांक ने इस महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से बार-बार उछाल दर्ज किया है, जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि निचले स्तरों पर बेस फॉर्मेशन हो रहा है और खरीदारों की दिलचस्पी सुधर रही है। वर्तमान में निफ्टी के लिए तात्कालिक सपोर्ट जोन 22,850 से 22,800 के दायरे में स्थित है, जो 21-डे EMA के साथ मेल खाता है। बाजार के किसी भी सीमित करेक्शन में इस स्तर पर नई खरीदारी आने की पूरी संभावना है।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के अनुसार, इस दायरे के नीचे कोई भी निर्णायक ब्रेकडाउन बिकवाली के दबाव को दोबारा जगा सकता है और सूचकांक को 22,500 की तरफ खींच सकता है। ऊपर की तरफ 23,300 का स्तर तत्काल बाधा बना हुआ है, जिसके पार टिकने पर तेजी का रुख और मजबूत होगा। यदि निफ्टी इस प्रतिरोध को पार कर जाता है तो 23,600 की तरफ नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। ऐसे में 22,800-22,850 के सपोर्ट और 23,300 के रेजिस्टेंस के बीच निफ्टी की हलचल ही तय करेगी कि यह सुधार दिवाली हफ्ते में आगे बढ़ेगा या नहीं।
बैंक निफ्टी में शुरुआती सुधार के संकेत और अहम पड़ाव
बैंकिंग क्षेत्र का प्रमुख सूचकांक बैंक निफ्टी भी पिछली गिरावट के बाद संभलता दिखा और बीते सप्ताह 0.74% की बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा। हालांकि यह सूचकांक अभी भी अपने 21-डे EMA से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे पता चलता है कि मोमेंटम में सुधार के शुरुआती संकेतों के बावजूद व्यापक रुझान अभी सतर्कता भरा बना हुआ है। वहीं डेली चार्ट पर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) इंडिकेटर अब पॉजिटिव हो चुका है, जो बाजार में संभावित रिकवरी का पहला तकनीकी संकेत दे रहा है।
रवि सिंह ने बैंक निफ्टी के स्तरों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि गिरावट की स्थिति में 54,000 का स्तर तात्कालिक सपोर्ट का काम करेगा, जहां किसी भी गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन यदि बैंक निफ्टी 53,500 के स्तर को निर्णायक रूप से नीचे की ओर तोड़ता है, तो इसका तकनीकी ढांचा कमजोर हो सकता है और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत ऊपर की दिशा में 55,000 का स्तर तात्कालिक रेजिस्टेंस है। इस स्तर से ऊपर लगातार टिके रहने पर बाजार में नई तेजी शुरू हो सकती है, जो सूचकांक के लिए 55,700 की ओर बढ़ने का रास्ता खोल देगी।
ग्लोबल संकेत और सेक्टोरल ट्रेंड तय करेंगे आगे की चाल
विदेशी और घरेलू संस्थागत प्रवाह की दिशा आने वाले दिनों में बाजार की आंतरिक ताकत का सबसे बड़ा पैमाना बनी रहेगी। यदि दोनों ही वर्ग अपनी शुद्ध खरीदारी जारी रखते हैं तो रिकवरी को सीधा सहारा मिलेगा, जबकि विदेशी निवेशकों की दोबारा बिकवाली बढ़त को सीमित कर सकती है। इसके साथ ही निवेशक विभिन्न क्षेत्रों में मांग, मार्जिन और कारोबारी विस्तार की स्थिति समझने के लिए कॉर्पोरेट नतीजों और प्रबंधन बयानों का करीबी विश्लेषण करेंगे। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ब्याज दरों से जुड़े अनुमान अहम उत्प्रेरक साबित होंगे। कम यील्ड इक्विटी में निवेश की भूख को बढ़ा सकती है, जबकि उधारी लागत में फिर से बढ़ोतरी जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना सकती है। आने वाले सत्रों में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, फार्मा, रियल्टी और एफएमसीजी सेक्टरों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि यह तेजी व्यापक बाजार तक कितनी फैल पाती है।



















