अमेरिकी शेयर बाजार के लिए अक्टूबर का महीना भारी बिकवाली और उथल-पुथल से भरा रहा, जहां प्रौद्योगिकी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण से 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की रकम पूरी तरह साफ हो गई। वॉल स्ट्रीट पर निवेशकों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बुनियादी ढांचे पर हो रहे भारी-भरकम पूंजीगत खर्च को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। बाजार में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या अरबों डॉलर के इस बड़े निवेश से निकट भविष्य में कोई ठोस और टिकाऊ वित्तीय रिटर्न मिल पाएगा या यह केवल अनुमानों पर टिका विस्तार है। इसी घबराहट के बीच नैस्डैक 100 इंडेक्स पूरे महीने में 2,000 अंक से अधिक नीचे लुढ़क गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में भी 5 प्रतिशत से ज्यादा की सीधी गिरावट दर्ज की गई।
महीने के अंतिम दिनों में बिकवाली का दबाव इतना गहरा गया कि केवल एक कारोबारी सत्र के दौरान प्रौद्योगिकी कंपनियों ने लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य गंवा दिया। दोपहर के सौदों के दौरान नैस्डैक में 3.4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जिसने इसे जून के मध्य के बाद का सबसे कमजोर एकल दिवसीय प्रदर्शन बना दिया। इस बिकवाली की मुख्य वजह यह समझी जा रही है कि निवेशक अब केवल भविष्य के वादों पर दांव लगाने के बजाय तुरंत होने वाली कमाई और मुनाफे के पुख्ता प्रमाण की मांग कर रहे हैं।
नैस्डैक सूचकांकों में आई बड़ी गिरावट के आंकड़े
लगातार बने मंदड़िए रुख के चलते नैस्डैक 100 पूरे अक्टूबर महीने में 2,023.65 अंक यानी 6.65 प्रतिशत टूट गया। इस भारी गिरावट के बाद नैस्डैक 100 ने महीने का समापन 28,384.85 के स्तर पर किया। दूसरी तरफ व्यापक तकनीकी बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स भी समान दबाव का सामना करते हुए 1,424.06 अंक यानी 5.30 प्रतिशत नीचे आ गया और महीने के अंत में 25,437 के स्तर पर बंद हुआ। सूचकांकों का यह स्तर दर्शाता है कि व्यापक तकनीकी क्षेत्र में बिकवाली किस कदर फैली हुई थी।
अगर पूरे महीने के व्यापक बाजार के प्रदर्शन की तुलना करें, तो एसएंडपी 500 में 0.9 प्रतिशत की नरमी आई, जबकि तकनीकी शेयरों की भारी हिस्सेदारी वाले नैस्डैक ने 6.6 प्रतिशत का नुकसान झेला। इसके विपरीत पारंपरिक उद्योगों का प्रतिनिधित्व करने वाला डाउ जोन्स पूरे महीने में 1.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा। साप्ताहिक आधार पर भी दबाव स्पष्ट दिखा, जहां अंतिम हफ्ते में एसएंडपी 500 0.9 प्रतिशत, नैस्डैक 2.4 प्रतिशत और डाउ जोन्स 1.2 प्रतिशत नीचे गिरा।
सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर कंपनियों पर सबसे गहरी मार
अक्टूबर के इस झटके में सबसे ज्यादा नुकसान चिप निर्माताओं और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े व्यवसायों को उठाना पड़ा। इंटेल के शेयरों में 29 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जब कंपनी ने अपनी चौथी तिमाही के राजस्व और मुनाफे में उम्मीद से कम रहने का अनुमान जारी किया। इसके अलावा सैनडिस्क के शेयरों में 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चिप जगत की अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे एएमडी, एआरएम होल्डिंग्स, क्वालकॉम और मार्वेल के शेयरों में भी लगभग 10 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई। इस दबाव के चलते फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स और डीआरएएम ईटीएफ दोनों में लगभग 7-7 प्रतिशत की गिरावट आई।
तकनीकी कंपनियों के बीच बिकवाली केवल प्रमुख डिजाइनरों तक सीमित नहीं रही। प्रमुख चिप निर्माता एनवीडिया में 4.2 प्रतिशत, ब्रॉडकॉम में 5.5 प्रतिशत और माइक्रोन में 5.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एएमडी पूरे सप्ताह में 11 प्रतिशत तक फिसल गया। बड़े हाइपरस्केलर्स में गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने पहले 12.6 प्रतिशत लुढ़कने के बाद 1.4 प्रतिशत का अतिरिक्त नुकसान दर्ज किया। वहीं क्लाउड और एआई कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने वाले डेटा सेंटर ऑपरेटरों जैसे नेबियस और कोरवीव के शेयरों में भी 10 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि चिप से लेकर सर्वर रैक तक पूरी वैल्यू चेन दबाव में है। इसके उलट ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों ने सकारात्मक प्रदर्शन दिखाया, जहां एक्सॉनमोबिल 2.2 प्रतिशत और शेवरॉन 1.7 प्रतिशत चढ़े, क्योंकि दोनों ने तीसरी तिमाही के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया था।
एआई पर भारी पूंजीगत खर्च और अनिश्चित रिटर्न का डर
निवेशकों की इस बेचैनी के केंद्र में प्रमुख तकनीकी कंपनियों द्वारा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर किया जा रहा अनियंत्रित पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स है। अमेजन, मेटा, अल्फाबेट और माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियां बड़े पैमाने पर एआई सर्वर, नेटवर्क और ऊर्जा संसाधनों में लाखों डॉलर झोंक रही हैं। हालांकि, बाजार अब यह देखना चाहता है कि क्या यह भारी निवेश टिकाऊ राजस्व और नकदी प्रवाह में तब्दील हो सकता है या कंपनियां मांग से कहीं अधिक क्षमता का निर्माण कर रही हैं।
उद्योग अनुसंधान से जुड़े अनुमान बताते हैं कि यह पूंजीगत खर्च आगे भी तेजी से बढ़ने वाला है। गार्टनर के सितंबर 2026 के पूर्वानुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर एआई पर कुल खर्च 2026 में 2.67 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 की तुलना में 49.5 प्रतिशत अधिक होगा। इस खर्च में केवल बड़ी तकनीकी फर्मों का निवेश ही शामिल नहीं है, बल्कि सॉफ्टवेयर, सेवाएं और संपूर्ण बुनियादी ढांचा भी शामिल है। इसके समानांतर जेपी मॉर्गन की एक अन्य रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि वैश्विक स्तर पर एआई से संबंधित पूंजीगत व्यय 2026 में 900 अरब डॉलर को पार कर सकता है, जबकि 2030 तक इसका संचयी खर्च 5.5 ट्रिलियन डॉलर के विशाल आंकड़े तक पहुंच सकता है। सवाल यह बना हुआ है कि क्या अंतिम उत्पाद इतने बड़े पैमाने पर लाभप्रद साबित होंगे जो इतने बड़े पूंजी निवेश को सही ठहरा सकें।
ब्याज दरें, मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े और तेल की कीमतों का असर
बाजार की इस चाल पर बाहरी आर्थिक कारकों का भी गहरा असर देखने को मिल रहा है। तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की मजबूत वृद्धि ने इन चिंताओं को बल दिया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है। एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसैलवन राधाकृष्णन के अनुसार, मजबूत आर्थिक गतिविधियों और लगातार बने मुद्रास्फीति के दबाव के बीच आने वाली अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट यह संकेत देगी कि केंद्रीय बैंक को अपनी मौजूदा नीतिगत स्थिति कब तक बरकरार रखनी होगी। उन्होंने बताया कि मजबूत नियुक्तियां और वेतन वृद्धि सख्त मौद्रिक रुख को लंबा खींच सकती हैं, जिससे ट्रेजरी यील्ड और डॉलर पर ऊपर की ओर दबाव बनेगा और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, रोजगार और वेतन वृद्धि में नियंत्रित नरमी मुद्रास्फीति की चिंता घटाकर यील्ड को नरम कर सकती है। आगामी रोजगार रिपोर्ट से पहले आईएसएम सर्वेक्षण और नौकरियों के खाली पदों से जुड़े आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।
इसके साथ ही ऊर्जा बाजार से भी चुनौतियां बनी हुई हैं, जहां ब्रेंट क्रूड सप्ताह के अंत में लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ। कच्चे तेल की यह ऊंची कीमत बाजार के परिदृश्य के केंद्र में बनी हुई है। ओपेक प्लस की आगामी समीक्षा बैठक पर तेल आपूर्ति प्रतिक्रिया के संकेतों के लिए नजर रखी जाएगी, हालांकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम निकट भविष्य में कीमतों के सबसे तात्कालिक चालक बने रहने की संभावना है। कच्चे तेल में लगातार गिरावट व्यापक शेयर बाजार के सुधार की संभावनाओं को मजबूत करेगी, जबकि ऊंची कीमतें ऊर्जा पर निर्भर और उपभोग-संवेदनशील कंपनियों पर दबाव बनाए रखेंगी। वहीं 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.9 प्रतिशत के करीब बनी हुई है, जो इक्विटी वैल्यूएशन को कुछ सहारा तो देती है, लेकिन वैश्विक बाजारों की स्थिरता और बॉन्ड यील्ड का सीमित दायरा ही विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने में निर्णायक साबित होगा।



















