पंजाब के चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी नेताओं के जमावड़े की तारीख को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA की प्रचंड विजय का दावा करते हुए कार्यकर्ताओं से पूरे उत्साह के साथ आगे आने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे सिख समुदाय के ऐतिहासिक जख्मों का खुला अपमान करार दिया।
1 नवंबर 1984 का दर्दनाक इतिहास और पीड़ितों की दास्तान
केंद्रीय गृहमंत्री ने 1984 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 नवंबर की तारीख को पूरा देश एक बेहद दर्दनाक दृष्टि से देखता है। 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में भड़की हिंसा में हजारों बेकसूर सिखों की नृशंस हत्या की गई थी और कई निर्दोषों को जिंदा आग के हवाले कर दिया गया था। अमित शाह के अनुसार, उस दौर में मचे कत्लेआम के कारण बड़ी तादाद में सिख परिवारों को अपनी सुरक्षा के लिए अपने घर और स्थान छोड़कर पलायन करने पर विवश होना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि इस भीषण त्रासदी में अनगिनत बच्चे अनाथ हो गए और अनगिनत महिलाएं विधवा हुईं। सिख समाज ने जिस पीड़ा और विस्थापन को झेला, वह देश के इतिहास में कभी मिटाया नहीं जा सकता। इसी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे शोक भरे दिन पर दिल्ली में उत्सव जैसा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन आयोजित करना बेहद असंवेदनशील कदम है।
राजीव गांधी की टिप्पणी और नरेंद्र मोदी सरकार के कानूनी कदम
अमित शाह ने उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा दी गई एक पुरानी टिप्पणी को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने उस दौरान सार्वजनिक रूप से कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। गृहमंत्री ने कहा कि हजारों बेकसूर सिखों के कत्लेआम के बाद इस तरह का बयान देना किसी भी नजरिए से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
वर्तमान सरकार के कदमों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद उन सभी बंद मामलों को दोबारा खोला गया जो 1984 की हिंसा से जुड़े थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने दंगा पीड़ितों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई और दंगों में शामिल प्रमुख राजनीतिक चेहरों को कानून के दायरे में लाकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पृष्ठभूमि के बावजूद राहुल गांधी ने उसी दिन दिल्ली में बड़ा राजनीतिक जमावड़ा आयोजित करके पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
तारीख बदलने की चेतावनी और विपक्षी गठबंधन पर तीखे बोल
केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा कि राजनीतिक स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह अपील की गई थी कि 1, 2 और 3 नवंबर की तारीखों पर यह रैली न रखी जाए, क्योंकि ये दिन सिख विरोधी दंगों के शोक और दर्द से सीधे जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद इन तारीखों पर ही आयोजन करने की जिद की गई। अमित शाह ने आरोप लगाया कि विदेश से मिले निर्देशों के तहत उसी तारीख को चुना गया जिस दिन सिखों के खिलाफ हिंसा भड़की थी। उन्होंने पवित्र गुरुओं की पावन धरती से इस राजनीतिक आयोजन की घोर निंदा की और कहा कि देश व पंजाब के लोग इस कदम को कभी नहीं भूलेंगे। उधर, भारतीय जनता पार्टी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी INDIA ब्लॉक के इस शक्ति प्रदर्शन पर कटाक्ष भी किया।























