भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र की मामूली गिरावट के बाद निवेशकों ने एक बार फिर चीनी शेयरों में भारी खरीदारी दिखाई। घरेलू बाजारों में चीनी की कीमतों में आई भारी उछाल और बेहतर वित्तीय नतीजों की उम्मीदों के कारण कई प्रमुख चीनी उत्पादक कंपनियों के शेयर इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान तेजी से ऊपर चढ़े।
सोमवार के कारोबार में चीनी शेयरों का शानदार प्रदर्शन
सोमवार को बाजार खुलने के साथ ही चीनी क्षेत्र के प्रमुख शेयरों में लिवाली का माहौल बना रहा। दोपहर 12:50 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बजाज हिंदुस्थान शुगर के शेयर में 10.49% की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज का शेयर 8.4% की बढ़त लेकर Rs 58.11 प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया।
अन्य प्रमुख चीनी उत्पादकों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। श्री रेणुका शुगर्स के शेयर 6.45% की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि धामपुर शुगर मिल में 4.3% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 2.91% और दालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 1% ऊपर चढ़कर बंद हुए। इसके साथ ही सिंभोली शुगर्स के शेयरों में भी तेजी का रुख बना रहा। शुक्रवार को दर्ज की गई मुनाफावसूली के बाद सोमवार को हुई इस रिकवरी से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
16 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे चीनी के दाम
चीनी शेयरों में आई इस अचानक तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू हाजिर बाजार में चीनी की दरों का तेजी से बढ़ना है। एनसीडीईएक्स (NCDEX) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को देश के प्रमुख थोक बाजारों में चीनी की हाजिर कीमत Rs 5,530 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। यह पिछले 16 वर्षों में चीनी का सबसे उच्चतम स्तर है। बीते केवल एक महीने के भीतर ही घरेलू स्तर पर चीनी की कीमतें लगभग 10% तक बढ़ चुकी हैं।
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कई निवारक कदम भी उठाए हैं। सरकार ने 1 मिलियन टन कच्चे चीनी के आयात की अनुमति दी है और चीनी डीलरों तथा व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सख्त सीमा लागू की है। हालांकि, इन नियामकीय प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में चीनी की हाजिर कीमतों में बनी मजबूती ने शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनाए रखा है।
वैश्विक बाजार और विश्लेषकों का क्या है रुख
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कच्चे चीनी के दामों में आई मजबूती ने भारतीय चीनी मिलों के लिए स्थितियां अनुकूल बनाई हैं। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौर का कहना है कि आपूर्ति में कमी की आशंका, बढ़ती बिक्री दरें और मजबूत अंतरराष्ट्रीय मूल्य इस सेक्टर में आई तेजी के मुख्य चालक हैं।
विश्लेषक प्रवेश गौर के अनुसार, "पिछले एक महीने में घरेलू चीनी की कीमतें लगभग 10% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि वैश्विक कच्चे चीनी के दामों में भी भारी मजबूती आई है।" उनका मानना है कि कम इन्वेंट्री और ऊंची कीमतें चीनी मिलों, विशेषकर उन कंपनियों के लिए लाभदायक साबित हो रही हैं जो परिचालन के स्तर पर अधिक कुशल हैं और जिनकी सुक्रोज रिकवरी दर बेहतर है।
निवेशकों के लिए सावधानियां और आगे का दृष्टिकोण
हालांकि चीनी क्षेत्र में आई यह तेजी आकर्षक दिख रही है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को बिना सोचे-समझे दांव लगाने से बचने की सलाह दी है। प्रवेश गौर ने सचेत किया है कि निवेशकों को इस तेजी को एक सीधी रेखा में मिलने वाला मुनाफा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि आने वाले दिनों में नीतिगत बदलाव और मौसम का असर शेयर की कीमतों पर पड़ सकता है।
आगामी हफ्तों में चीनी उद्योग की प्रदर्शन दिशा तय करने में कई महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाएंगे। इनमें मानसून की प्रगति, गन्ने की उपलब्धता, कुल चीनी उत्पादन के आधिकारिक अनुमान, घरेलू हाजिर कीमतें, सरकार की एथेनॉल नीतियां और संभावित सरकारी हस्तक्षेप शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बैलेंस शीट वाली, कुशल चीनी परिचालन चलाने वाली और एथेनॉल या डिस्टिलरी का विविध पोर्टफोलियो रखने वाली कंपनियां लंबे समय में इस अनुकूल चक्र का सबसे बड़ा फायदा उठाने की स्थिति में रहेंगी।



















