अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है, जहां यह कीमती धातु 4,600 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को पार कर तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जुलाई के मध्य में सोना लगभग 4,000 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक चला गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार रिकवरी देखने को मिली है। मई के बाद पहली बार सोने ने इस स्तर को छुआ है। इस उछाल के पीछे केवल बॉन्ड यील्ड में गिरावट ही वजह नहीं है, बल्कि सरकार की बढ़ती उधारी, राजकोषीय साख पर उठते सवाल और मुद्रा के अवमूल्यन (करंसी डिबेसमेंट) की चिंताओं ने सोने को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में फिर से स्थापित कर दिया है।
ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और राजकोषीय चिंताएं
अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी डिपार्टमेंट) द्वारा उठाए गए एक अचानक कदम ने वित्तीय बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर ट्रेजरी ने घोषणा की कि वह लंबी अवधि के सरकारी कर्ज को वापस खरीदने (बायबैक) की अपनी योजना का दायरा बढ़ा रहा है। 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की अवधि वाले सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक की सीमा को दोगुना किया जा रहा है। प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक लागू रहेगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते बॉन्ड यील्ड पर अंकुश लगाने के लिए शुरू की गई इस बायबैक योजना ने सरकारी उधारी और राजकोषीय स्थिरता को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। अमेरिकी डॉलर पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके अलावा, अमेरिका और कनाडा के बीच नए सिरे से पैदा हुए व्यापारिक तनाव ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया है। कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि Fed साल 2027 में अपनी मौद्रिक नीति में ढील देना शुरू कर सकता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF में निवेश
संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों की ओर से सोने की मांग में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में वैश्विक गोल्ड बैक्ड ETF में 3 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इस नए निवेश के साथ ही इन फंडों की कुल गोल्ड होल्डिंग में 23 टन का इजाफा हुआ है।
दूसरी ओर, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी सोने के बड़े खरीददार बने हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध खरीदारी 51 टन दर्ज की गई। इसके साथ ही वर्ष की पहली छमाही (H1) में कुल शुद्ध खरीदारी 102 टन तक पहुंच गई है। इस खरीदारी की अगुआई पोलैंड और चीन के केंद्रीय बैंकों ने की है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी क्षेत्र की यह खरीदारी सोने के बाजार को आगे भी समर्थन देती रहेगी, हालांकि आगे की बढ़त इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिमी देशों के निवेशक सोने में अपनी दिलचस्पी को कितना बनाए रखते हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल और मुद्राओं पर असर
सोने की इस तेजी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) में अमेरिकी डॉलर दबाव में नजर आ रहा है। नए हफ्ते की शुरुआत में GBP/USD जोड़ी 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास मजबूती से कारोबार कर रही है, जो 11 फरवरी के बाद के इसके उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। ब्रिटिश पाउंड में पिछले एक महीने से जारी तेजी का रुझान बरकरार है।
इसी तरह, EUR/USD में लगातार चौथे कारोबारी दिन बढ़त देखी गई है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यह मुद्रा जोड़ी 1.1680 के स्तर के आसपास स्थिर बनी हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई बायबैक घोषणाओं के बाद से डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिसका सीधा फायदा प्रमुख विदेशी मुद्राओं और सोने को मिल रहा है।



















