यूरोपीय अर्थव्यवस्था इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ से गुजर रही है, जहां केंद्रीय बैंक को महंगाई पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ब्याज दरों या मौद्रिक नीति में किसी भी तरह की जल्दबाजी भारी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके साथ ही, अमेरिकी वित्तीय प्रशासन द्वारा बॉन्ड बाजार को सहारा देने के लिए उठाए गए बड़े कदमों ने वैश्विक मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार हलचल पैदा कर दी है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने महंगाई और आर्थिक विकास का संतुलन
यूरोप में मुख्य चिंता का विषय अभी भी उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी बनी हुई है। वित्तीय संस्थान बीएनवाई के विश्लेषणात्मक आकलन के अनुसार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के लिए समय से पहले नीतिगत सख्ती लागू करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। हालांकि अर्थव्यवस्था में सुधार की शुरुआती आहट मिल रही है, फिर भी महंगाई को दोबारा भड़कने दिए बिना विकास दर को गति देना यूरोपीय देशों की प्राथमिकता है।
ECB के हालिया महंगाई प्रत्याशा सर्वेक्षण से पता चलता है कि दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि की उम्मीदें अब अधिक मजबूती से स्थिर हो रही हैं। इसके अलावा, यूरो मुद्रा अपनी चक्रीय ऊंचाई के करीब कारोबार कर रही है। यूरो का यह मजबूत स्तर आयातित वस्तुओं की लागत को घटाकर अपने आप में मौद्रिक सख्ती का काम कर रहा है, जिससे केंद्रीय बैंक को सोच-समझकर कदम उठाने का अतिरिक्त समय मिल जाता है।
अगस्त के PMI आंकड़े और यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति
अगस्त महीने के शुरुआती Purchasing Managers Index (PMI) आंकड़े यूरो क्षेत्र के लिए एक मिला-जुला लेकिन उम्मीद जगाने वाला 'गोल्डीलॉक्स' परिदृश्य पेश करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) में कारोबारी इरादों और विनिर्माण भावना में सुधार देखने को मिल रहा है। इसके विपरीत, सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में अभी भी हल्का संकुचन बना हुआ है।
व्यापारिक मांग में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला पर बना हुआ दबाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इस सप्ताह यूरोपीय बाजारों की नजर महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को फ्रांस और स्पेन के फ्लैश Consumer Price Index (CPI) आंकड़े जारी होने वाले हैं। स्पेन में महंगाई दर अभी भी फ्रांस की तुलना में काफी अधिक स्तर पर बनी हुई है। इसके अलावा, शुक्रवार को ही जर्मनी से बेरोजगारी के आंकड़े जारी होंगे, जो यूरो क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के श्रम बाजार का सटीक रुझान पेश करेंगे।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा ऐलान और बॉन्ड मार्केट में हस्तक्षेप
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में आए ताजा उछाल के पीछे अमेरिकी वित्त विभाग की एक अप्रत्याशित घोषणा प्रमुख कारण है। अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय सार्वजनिक किया। ट्रेजरी विभाग ने सरकारी बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़ोतरी को रोकने के उद्देश्य से अपने लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक प्रक्रिया को दोगुना करने का वादा किया है।
यह निर्णय 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर लागू होगा। इसके तहत प्रति ऑपरेशन बायबैक की अधिकतम सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन कर दिया गया है। यह तरलता सहायता ऑपरेशन 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। इस बड़े वित्तीय कदम ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव बना दिया है।
फॉरेक्स मार्केट में तेजी: EUR/USD, GBP/USD और सोने के भाव
अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट का सीधा फायदा अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं और संपत्तियों को मिला है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान EUR/USD मुद्रा जोड़ी लगातार चौथे दिन अपनी मजबूती बनाए रखते हुए 1.1680 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। डॉलर पर बने दबाव के चलते यूरो को लगातार समर्थन मिल रहा है।
दूसरी ओर, GBP/USD जोड़ी में भी कारोबारी सप्ताह की शुरुआत से ही सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है। यह जोड़ी 1.3600 के मध्य स्तर पर मजबूती से टिकी हुई है और शुक्रवार को 11 फरवरी के बाद दर्ज किए गए अपने उच्चतम स्तर के बेहद करीब बनी हुई है। लगभग एक महीने से जारी तेजी के इस चक्र को मजबूत मौलिक कारकों का समर्थन मिल रहा है।
इसी बीच, कीमती धातु बाजार में सोने ने अपनी हालिया तेजी को और आगे बढ़ाया है। सोमवार को एशियाई कारोबार में सोने की हाजिर कीमतें तीन महीने के उच्चतम स्तर को पार करते हुए $4,600 प्रति औंस से ऊपर निकल गईं। अमेरिकी डॉलर में नरमी, अमेरिकी ट्रेजरी की तरलता योजना और अमेरिका तथा कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों ने सोने की सुरक्षित निवेश मांग को काफी मजबूत किया है।



















