अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश इस सप्ताह वायोमिंग के जैक्सन होल में आयोजित होने वाले आर्थिक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे समय में जब अमेरिकी बॉन्ड बाजार में भारी उथल-पुथल मची है, केंद्रीय बैंक के भीतर गहरी गुटबाजी सामने आ रही है और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर महंगाई की आग को भड़का रहे हैं, वॉश का यह दौरा बेहद संवेदनशील मोड़ पर हो रहा है। स्पष्ट नीतिगत दिशा देने के बजाय, कम बोलने की उनकी अनोखी शैली की अब कड़ी परीक्षा होने वाली है, क्योंकि वित्तीय बाजार उनसे ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
फेड के भीतर गहराया मतभेद और सख्त रुख की मांग
इस सम्मेलन से ठीक पहले अमेरिकी केंद्रीय बैंक के भीतर की अंदरूनी कलह उजागर हो चुकी है। जुलाई में हुई फेड की मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स से खुलासा हुआ है कि भले ही ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला 9-3 के बहुमत से लिया गया था, लेकिन इसके पीछे गंभीर मतभेद थे। समिति के तीन क्षेत्रीय अध्यक्षों ने तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की मांग की थी। उनका मानना था कि महंगाई दर को लक्ष्य तक लाने के लिए मौद्रिक नीति को अधिक सख्त करना जरूरी है। इस गुटबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि महंगाई उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हुई, तो फेड में सख्त रुख अपनाने वाले सदस्य आगे दरें बढ़ाने में जरा भी संकोच नहीं करेंगे।
कम बोलने की नीति और बॉन्ड बाजार की उथल-पुथल
केविन वॉश अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में काफी अलग रणनीति अपनाते हैं। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक के अधिकारियों द्वारा बहुत अधिक बयानबाजी करने से वित्तीय बाजारों में स्पष्टता आने के बजाय भ्रम पैदा होता है। इसी सोच के तहत जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भविष्य के रुख पर कोई स्पष्ट संकेत देने से परहेज किया था और कहा था कि महंगाई से लड़ने के लिए फेड के पास कोई जादुई छड़ी नहीं है। उनकी इस टिप्पणी का उल्टा असर हुआ और बॉन्ड बाजार में भारी बिकवाली शुरू हो गई, जिससे 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय बैंक की यह अस्पष्टता बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हुई।
वित्त मंत्रालय का हस्तक्षेप और बढ़ता कर्ज संकट
स्थिति को और अधिक जटिल बनाते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को बाजार संभालने के लिए आगे आना पड़ा है। जैक्सन होल सम्मेलन से ठीक पहले बेसेंट ने दीर्घकालिक बॉन्ड की पुनर्खरीद बढ़ा दी ताकि सरकारी कर्ज के भारी दबाव से थर्राए बॉन्ड बाजार को शांत किया जा सके। हालांकि इससे बॉन्ड यील्ड में अस्थायी गिरावट जरूर आई, लेकिन इससे फेड की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसा प्रतीत होने लगा है कि बाजार के दबावों से निपटने में वित्त मंत्रालय अब केंद्रीय बैंक से आगे निकल रहा है। इस बीच, अमेरिकी सरकारी कर्ज का आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल गया है, जबकि ओईसीडी देशों का कुल वैश्विक कर्ज इस साल 18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
AI से उत्पादकता का दांव और क्रेडिट मार्केट का जोखिम
इस विशाल सार्वजनिक कर्ज से निपटने के लिए वॉश आपूर्ति-पक्ष की अपनी आर्थिक थ्योरी पर भरोसा जताते हैं। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले उत्पादकता लाभ अर्थव्यवस्था को बिना महंगाई बढ़ाए इस कर्ज को संभालने में मदद करेंगे। वॉश का मानना है कि AI से दक्षता बढ़ेगी और लंबी अवधि तक ब्याज दरों को निचले स्तर पर बनाए रखना संभव होगा। लेकिन फेड की अपनी ही जुलाई बैठक के मिनट्स ने इस सोच पर गंभीर चेतावनी दी है। मिनट्स में कहा गया है कि AI क्षेत्र में हो रहा भारी निवेश अब क्रेडिट जोखिम में बदल रहा है, क्योंकि बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान कर्ज के बल पर चल रहे इस विस्तार में गहराई से उलझ चुके हैं। हाल ही में बढ़ती तेल कीमतों और उच्च यील्ड के कारण निवेशकों ने AI शेयरों में बिकवाली की है, जिससे साफ है कि तात्कालिक पूंजी लागत के सामने भावी उत्पादकता के दांव कमजोर पड़ रहे हैं।
कच्चे तेल का झटका, ईरान युद्ध और आने वाले आंकड़े
लंबी अवधि के AI दांवों के बीच तात्कालिक मोर्चे पर कच्चे तेल की कीमतें और ईरान युद्ध महंगाई को नया ईंधन दे रहे हैं। आने वाले दिनों में जारी होने वाली पीसीई (PCE) महंगाई रिपोर्ट में कोर इन्फ्लेशन के 3.3 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है। यदि महंगाई में कोई अप्रत्याशित बढ़ोतरी होती है, तो फेड के भीतर सख्त रुख वाले गुट का दबाव और बढ़ जाएगा। इसके अलावा, आगामी पेरोल डेटा से अमेरिकी श्रम बाजार की वास्तविक मजबूती का पता चलेगा। ऐसे में जैक्सन होल में वॉश की ओर से स्पष्टता की उम्मीद कम ही है, बल्कि वे अपनी मौन रहने की रणनीति पर ही कायम रह सकते हैं।
सितंबर की बैठक और निवेशकों की आशंकाएं
अगली मौद्रिक नीति समीक्षा को लेकर फिलहाल वायदा बाजार में सितंबर में दरें स्थिर रहने की 60 प्रतिशत और कटौती की 40 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि वॉश दरें बढ़ाने का संकेत देंगे, बल्कि डर इस बात का है कि वे पूरी तरह चुप रहेंगे। वित्तीय अनिश्चितताओं, सरकारी कर्ज और भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में केंद्रीय बैंक के प्रमुख का मौन रहना ही बाजार के लिए सबसे बड़ा आक्रामक संकेत बन सकता है।



















