अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और कैनेडियन डॉलर की जोड़ी में उल्लेखनीय बढ़त देखने को मिली है। कमोडिटी से सीधे जुड़ी मुद्रा मानी जाने वाली कैनेडियन डॉलर हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के थमने के बाद अपने लाभ को बरकरार रखने में संघर्ष करती दिखाई दे रही है। बाजार सहभागियों का ध्यान अब यूरोक्षेत्र के आगामी मौसमी रूप से समायोजित औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है, जिससे पहले यूरो को अतिरिक्त समर्थन हासिल हुआ है।
कच्चे तेल के दामों में यह ताजा गिरावट बहु-महीने के उच्चतम स्तरों से पीछे हटने के बाद देखने को मिली। अमेरिकी ऊर्जा इन्वेंट्री आंकड़ों के अनुसार 11 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में कच्चे तेल के भंडार में 7.14 मिलियन बैरल की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसने ठीक पिछले सप्ताह दर्ज की गई 300,000 बैरल की गिरावट के रुझान को पूरी तरह पलट दिया। स्टॉक में आई इस बड़ी वृद्धि ने अल्पकालिक स्तर पर ईंधन आपूर्ति की अधिकता का संकेत देकर कीमतों पर तत्काल दबाव बना दिया।
पश्चिम एशिया में आपूर्ति संकट और पाइपलाइन बंदी
भंडार बढ़ने की वजह से आई हालिया गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से सुधार होने की व्यापक संभावना बनी हुई है। पश्चिम एशिया के ऊर्जा केंद्रों में आपूर्ति व्यवधान लगातार गंभीर रूप ले रहा है। ऊर्जा बाजारों को आपूर्ति की नई तंगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सऊदी अरब ने सितंबर महीने में यूरोपीय खरीदारों को भेजी जाने वाली कई कच्चे तेल की खेपों को रद्द कर दिया है। यह कदम हाल ही में हुए ड्रोन हमलों के बाद उठाया गया, जिसके कारण सऊदी अरब की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को आपातकालीन स्थिति में बंद करना पड़ा था।
आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं को और बढ़ाते हुए इस क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के नए हमलों ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के संचालन की स्थिति को बेहद अनिश्चित बना दिया है। इस बुनियादी ढांचे को दोबारा शुरू करने के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है, जिससे बाजार भू-राजनीतिक तनाव के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। यह पाइपलाइन संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य से बचकर वैकल्पिक समुद्री परिवहन मार्ग प्रदान करने में बेहद अहम भूमिका निभाती है।
कनाडा में मुद्रास्फीति का मौजूदा परिदृश्य
रॉयल बैंक ऑफ कनाडा के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगस्त महीने में कनाडा की वार्षिक मुद्रास्फीति दर 3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो जुलाई के आंकड़े के बिल्कुल समान है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में मूल्य दबाव अब भी अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है, लेकिन इसमें स्थिरता आ रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खाद्य और ऊर्जा लागतों के ऊंचा बने रहने के बावजूद हेडलाइन दबाव नियंत्रित दायरे में हैं, जो यह संकेत देता है कि मध्यम अवधि में अंतर्निहित मुद्रास्फीति बैंक ऑफ कनाडा के 2 प्रतिशत के लक्ष्य के मोटे तौर पर अनुकूल बनी हुई है।
कैनेडियन डॉलर को प्रभावित करने वाले बुनियादी कारक
कैनेडियन डॉलर के मूल्यांकन को तय करने में कई केंद्रीय कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें सबसे पहला बैंक ऑफ कनाडा द्वारा निर्धारित ब्याज दर का स्तर है। कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद पेट्रोलियम होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी मुद्रा के मूल्य को तुरंत प्रभावित करती हैं। इसके अलावा व्यापक अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य, मुद्रास्फीति की दर और व्यापार संतुलन, जो निर्यात और आयात के कुल मूल्य का अंतर होता है, मुद्रा की दिशा निर्धारित करते हैं।
बाजार की धारणा भी कैनेडियन डॉलर पर गहरा असर डालती है। जब वैश्विक निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों में निवेश बढ़ाते हैं, तो उस जोखिम-अनुकूल माहौल में कैनेडियन डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, तो कमोडिटी मुद्राओं से पूंजी निकलने लगती है। कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के नाते अमेरिका की अर्थव्यवस्था की मजबूती भी कैनेडियन डॉलर के लिए निर्णायक साबित होती है।
बैंक ऑफ कनाडा और मौद्रिक नीति का प्रभाव
बैंक ऑफ कनाडा वाणिज्यिक बैंकों के बीच आपसी ऋण के लिए ब्याज दरों का स्तर तय करके मुद्रा पर गहरा नियंत्रण रखता है। यह दर पूरी वित्तीय प्रणाली के लिए उधारी लागतों को प्रभावित करती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य ब्याज दरों में फेरबदल करके मुद्रास्फीति को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची होती हैं, तो वे विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं और कैनेडियन डॉलर को मजबूती देती हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय बैंक ऋण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का सहारा लेता है, जिसमें ढील मुद्रा पर दबाव डालती है जबकि मौद्रिक सख्ती मुद्रा के पक्ष में काम करती है।
पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों में मुद्रास्फीति को मुद्रा के अवमूल्यन का कारण माना जाता रहा है, लेकिन पूंजी नियंत्रण में आई ढील के आधुनिक दौर में स्थिति बदली है। ऊंची मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंकों को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे बेहतर रिटर्न की तलाश में वैश्विक निवेशकों की पूंजी देश में आती है और स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ जाती है। साथ ही सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापते हैं। मजबूत आर्थिक आंकड़े बैंक ऑफ कनाडा को सख्त नीति अपनाने की गुंजाइश देते हैं, जिससे कैनेडियन डॉलर को बल मिलता है, जबकि कमजोर डेटा मुद्रा को नीचे धकेलता है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति
वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी लगातार तीसरे दिन गिरावट के रुख के साथ 0.7100 के स्तर पर संघर्ष करती दिखी, जो एशियाई कारोबारी सत्र में मासिक निचले स्तर के करीब पहुंच गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर धकेल दिया है, जिससे अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब मजबूती से टिका रहा। पश्चिम एशिया के तनाव ने भी सुरक्षित ठिकाना मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा को सहारा दिया और जोखिम संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव डाला।
उधर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में उछलकर 155.00 के पार एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की प्रतिष्ठा को और सहारा दिया। हालांकि ट्रेडर्स द्वारा फेडरल रिजर्व के फैसले और बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले सतर्कता बरतने के कारण यह जोड़ी 155.50 के मध्य स्तर से नीचे रही। बैंक ऑफ जापान की दशकों पुरानी अत्यंत उदार ब्याज दर नीति ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में शामिल रहा। अब इस नीति में संभावित सख्ती के साथ यह दौर नए चरण में प्रवेश कर सकता है।
कमोडिटी बाजार में सोना बुधवार को यूरोपीय सत्र में $4,350 प्रति औंस के स्तर से नीचे सीमित दायरे में रहा। अमेरिकी डॉलर की हालिया तेजी पर लगा हल्का विराम सोने को निचला सहारा दे रहा है, लेकिन अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट और हालिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले बाजार प्रतिभागी कोई बड़ा दांव लगाने से बचते दिखाई दिए।



















