अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गहरा उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान की ताजा उम्मीदों ने तेल बाजार पर दबाव बनाया, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की सकारात्मक चर्चाओं ने शुरुआती बिकवाली को गति दी। हालांकि, ईरान पर नए प्रतिबंधों के खतरे और वैश्विक आपूर्ति चिंताओं के कारण यह गिरावट ज्यादा देर नहीं टिकी और कीमतें संभलकर दोबारा 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में कीमतों की हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में पिछले 24 घंटों में काफी उठापटक दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे लुढ़क गया था। पिछले नौ कारोबारी सत्रों में यह पहला अवसर था जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के नीचे फिसला, जिसके बाद यह 100.34 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सुबह के सत्र में थोड़ी मजबूती के साथ ब्रेंट 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा, जिससे सप्ताह की शुरुआत अपेक्षाकृत अधिक आशावादी रुख के साथ हुई।
दूसरी ओर, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान खरीदारी का रुझान देखने को मिला। इसके साथ ही डब्ल्यूटीआई में लगातार चार दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। इससे पूर्व डब्ल्यूटीआई गिरकर 91.00 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया था, जो लगभग दो हफ्तों का निचला स्तर था। ताजा सत्र में यह जिंस करीब 1.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 93.00 डॉलर के आंकड़े के ठीक नीचे कारोबार करती नजर आई, जबकि निवेशकों की नजरें लगातार मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
प्रतिबंधों के नए संकेत और डॉलर सिस्टम की चेतावनी
राजनयिक स्तर पर प्रगति की उम्मीदों के बावजूद रातों-रात कच्चे तेल के भाव में उछाल दर्ज होने की मुख्य वजह प्रतिबंधों से जुड़ी नई चेतावनियां रहीं। बेसेंट द्वारा यह संकेत दिए जाने के बाद कि सभी ईरानी एयरलाइंस को बंद किया जाएगा और उन्हें ईंधन या लैंडिंग सेवाएं मुहैया कराने वालों को डॉलर प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा, आपूर्ति को लेकर बाजार में घबराहट फिर लौट आई। इस बयान ने तेल कीमतों में गिरावट को रोक दिया और कीमतों में तुरंत उछाल देखने को मिला।
मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों के रुख का असर
विदेशी मुद्रा बाजार में भी केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और भू-राजनीतिक तनाव का व्यापक प्रभाव दिखाई दिया। एशियाई सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर मजबूती हासिल करता दिखा। इस तेजी को आरबीए की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के सख्त बयानों से सहारा मिला। इसके बावजूद मध्य पूर्व में जारी तनाव और फेडरल रिजर्व के कड़े रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत आधार दिया, जो इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त को सीमित कर सकता है। इसके अलावा कारोबारी हफ्ते के अंत में होने वाले अहम ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर भी बाजार की निगाहें जमी हैं।
वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी में एशियाई सत्र के दौरान 157.50 के स्तर के पास मामूली बढ़त देखी गई। जापान में सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन के नुकसान को काफी हद तक सीमित किया। हालांकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा 31 साल के उच्च स्तर पर की गई ब्याज दर बढ़ोतरी को बाजार ने नरम रुख के तौर पर लिया, जिससे येन पर दबाव बना रहा। बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम था और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मध्य पूर्व संकट ने डॉलर को मजबूती दी, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को बल मिला।
सोने के भाव पर दबाव
कीमती धातुओं के बाजार में एशियाई सत्र की शुरुआती बढ़त के बाद सोने में बिकवाली दर्ज की गई। पीली धातु फिसलकर 4,350 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई, हालांकि इसमें आगे की गिरावट सीमित नजर आ रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख को बिना ब्याज वाले सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे प्रमुख कारक माना जा रहा है। कुल मिलाकर कमोडिटी और फॉरेक्स बाजार दोनों ही कूटनीतिक घटनाक्रमों और नीतिगत फैसलों के बीच बेहद सतर्कता से कारोबार कर रहे हैं।


















