आगामी फेस्टिव सीजन से पहले रसोई के बजट पर भारी पड़ रही चीनी की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले एक महीने के भीतर ही मीठे के इन खुदरा दामों में लगभग 24 फीसदी तक का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते यह आवश्यक जिंस खुले बाजार में सीधे 56 से 60 रुपये प्रति किलो के ऊंचे स्तर पर जा पहुंची है। आम जनता के जेहन में यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या देश में चीनी का गंभीर अकाल पैदा हो गया है और आने वाले दिनों में कीमतें और अधिक खतरनाक स्तर को छू लेंगी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीनी उद्योग जगत की तरफ से एक बड़ी और राहत देने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने बाजार की मौजूदा घबराहट को शांत करने का प्रयास किया है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि देश के भीतर किसी भी प्रकार की चीनी की कोई कमी नहीं है और इसकी आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में बनी हुई है। संगठन के प्रमुख नीरज शिरगांवकर ने कीमतों में अचानक आए इस तूफानी उछाल के पीछे मुख्य तौर पर जमाखोरों की गतिविधियों और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण फसलों के उत्पादन में आई अस्थायी गिरावट को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के गोदामों में अभी भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और त्योहारी सीजन की भारी मांग को सुगमता से पूरा करने के लिए आपूर्ति से जुड़ी कोई बड़ी बाधा सामने नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे बाजार की सप्लाई चेन बेहतर होगी, वैसे-वैसे चीनी के इन बढ़ते दामों में भी निश्चित तौर पर नरमी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम
खुले बाजार में चीनी के दामों को इस तरह बेकाबू होता देख केंद्र सरकार ने भी स्थिति को संभालने के लिए तत्काल प्रभाव से सख्त और बड़े प्रशासनिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। चीनी के दाम तेजी से बढ़ने के बाद बीते 20 अगस्त को सरकार ने कुल 10 लाख टन तक की कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति प्रदान कर दी है। इस महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के घरेलू बाजार में इस जरूरी वस्तु की उपलब्धता को तुरंत बढ़ाना और आसमान छूती कीमतों पर प्रभावी लगाम लगाना है ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
नवंबर से बढ़ सकती है सप्लाई
इस बीच नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) ने आगामी 2025-26 के नए चीनी सीजन के लिए कुल उत्पादन का अनुमान करीब 279 लाख टन आंका है। इस अनुमानित आंकड़े में से लगभग 24 लाख टन चीनी का उपयोग सीधे तौर पर एथेनॉल के उत्पादन में किए जाने की पूरी संभावना है। अगले चीनी सत्र की विधिवत शुरुआत आगामी 1 अक्टूबर से होने जा रही है। NFCSF से मिली जानकारियों के अनुसार, उस विशिष्ट समय पर लगभग 35 लाख टन का शुरुआती स्टॉक देश में उपलब्ध रह सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि हमारे देश के भीतर हर महीने लगभग 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। ऐसे में नवंबर के महीने में जब नई पेराई का प्रक्रिया का दौर शुरू होगा, तब बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने की मजबूत उम्मीद जताई जा रही है।
ब्राजील से आ सकती है चीनी
दूसरी तरफ NFCSF के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने इस बात की जानकारी साझा की है कि विदेशों से आयात की जाने वाली कुछ खेप आगामी 15 अक्टूबर से पहले ही भारत की सीमाओं तक पहुंच सकती है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल ब्राजील को इस आयात प्रक्रिया के लिए सबसे अधिक व्यावहारिक और मुफीद स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर ब्राजील के बंदरगाहों से निकलने वाली चीनी को समुद्री मार्ग के जरिए भारत के विभिन्न पोर्ट्स तक पहुंचने में करीब 40 से 45 दिनों का लंबा समय लग जाता है।



















