अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में सुरक्षात्मक संपत्तियों की मांग घटने से यूरोपीय मुद्रा यूरो में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज बढ़त दर्ज की गई है। मध्य पूर्व के मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य हमलों में आई अस्थायी रोक ने वैश्विक निवेशकों को राहत पहुंचाई है। इसके चलते यूरो का भाव डॉलर के मुकाबले उछलकर 1.1410 के स्तर के करीब पहुंच गया। व्यापारिक गतिविधियों में सुरक्षा की तलाश छोड़कर निवेशक अब जोखिम वाली संपत्तियों में पूंजी लगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे प्रमुख शेयर बाजारों के वायदा कारोबार और वैश्विक मुद्राओं में सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है।
मध्य पूर्व तनाव में अस्थायी शांति और कूटनीतिक गुंजाइश
वित्तीय बाजारों में इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य आक्रामकता का थमना माना जा रहा है। सप्ताहांत के दौरान अमेरिकी सेना के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की कि ईरान के भीतर निर्धारित किए गए ठिकानों की सूची पूरी हो जाने के बाद हमलों का सिलसिला फिलहाल रोक दिया गया है। सैन्य कार्रवाई में आए इस ठहराव ने बाजारों को स्थिरता प्रदान की है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्त्ज़ ने स्थिति को लेकर संकेत दिया कि यद्यपि सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार और तैनात हैं, फिर भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए थोड़ा अवसर देना चाहते हैं। पिछले पांच महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को शांतिपूर्वक हल करने के लिए नए सिरे से कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद जागी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल को नया संबल दिया है।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट और वैश्विक शेयर बाजारों की चाल
कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के प्रदर्शन का आकलन करने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 101.20 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर की इस सुस्ती का सीधा फायदा यूरोपीय कारोबार में देखा गया, जहां स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे ज्यादा कमजोर रहा।
यूरोपीय व्यापारिक सत्र में निवेशकों के उत्साह का असर इक्विटी बाजारों में भी साफ झलका। वॉल स्ट्रीट के मानक सूचकांक S&P 500 के वायदा अनुबंध लगभग 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 7,485 के स्तर के पास कारोबार करते देखे गए। यह तेजी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बाजार अब जोखिम लेने के पक्ष में है और निवेशकों का ध्यान अब भू-राजनीतिक तनावों से हटकर व्यापक आर्थिक आंकड़ों की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
प्रमुख मुद्रा जोड़ों और कमोडिटीज की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश पाउंड में भी मजबूती का रुख कायम रहा। GBP/USD मुद्रा जोड़ा शुक्रवार को तीन हफ्ते के निचले स्तर से उबरने के बाद सप्ताह के शुरुआती दिन एशियाई कारोबारी सत्र में मजबूती बनाए रखने में सफल रहा। लगातार दूसरे दिन सकारात्मक बढ़त दर्ज करते हुए पाउंड का हाजिर मूल्य 1.3300 के मध्य स्तर से ऊपर निकल गया। अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी ने पाउंड को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी शुरुआती तेजी का असर कायम दिखा। हफ्ते के पहले दिन शुरुआती कारोबार में बुलियन बाजार ने बढ़त के अंतर को बनाए रखा, हालांकि ऊपरी स्तरों से मामूली मुनाफावसूली के कारण सोना $4,100 प्रति औंस के आसपास संघर्ष करता नजर आया। व्यापारी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों से पहले मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर सावधानीपूर्वक नजर बनाए हुए हैं।
कार्डानो पर दबाव और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का अनिश्चित भविष्य
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में स्थिति थोड़ी भिन्न रही। कार्डानो लगातार बिकवाली के दबाव में बना हुआ है और पिछले हफ्ते के नुकसान के बाद सोमवार को गिरकर $0.165 पर कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव बाजार के कमजोर आंकड़े और घटती रफ्तार यह दर्शाती है कि कार्डानो में तेजी की संभावनाएं फिलहाल सीमित हैं और व्यापारियों के बीच मंदी का माहौल हावी है।
वर्ष के उत्तरार्ध में प्रवेश करते हुए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के सामने अनिश्चितताओं का पहाड़ खड़ा है। साल के शुरुआती छह महीनों में चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। मध्य पूर्व में नए सिरे से उपजी अनिश्चितताओं ने मुद्रास्फीति के परिदृश्य और ब्याज दरों के भविष्य को धुंधला कर दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
फेडरल रिजर्व और यूरोज़ोन के आगामी आर्थिक आंकड़े
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चालू सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। निवेशकों की निगाहें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले पर टिकी हुई हैं। इसके साथ ही यूरोज़ोन के जुलाई महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (HICP) के शुरुआती मुद्रास्फीति आंकड़े भी जारी होने वाले हैं, जो भविष्य की मौद्रिक नीतियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



















