यूरोपीय संघ में राजकोषीय और बजटीय चिंताओं के गहराने से मुद्रा बाजार में सुरक्षित संपत्तियों की मांग काफी तेज हो गई है। निवेशकों का रुझान स्विस फ्रैंक की तरफ बढ़ने से यूरो के मुकाबले इसकी स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। राबोबैंक के तकनीकी और नीतिगत विश्लेषण के अनुसार, आगामी हफ्तों में EUR/CHF विनिमय दर 0.93 के दायरे के करीब टिके रहने का अनुमान है। हालांकि स्विस फ्रैंक का अत्यधिक मूल्यांकन और स्विट्जरलैंड में दर्ज की जा रही बेहद कम मुद्रास्फीति स्विस नेशनल बैंक के लिए आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन फिलहाल नीति निर्माता इस पर तत्काल कड़े कदम उठाने के दबाव में नहीं दिख रहे हैं।
स्विस फ्रैंक की मजबूती और स्विस नेशनल बैंक की रणनीति
विदेशी मुद्रा बाजार में विश्लेषकों ने समग्र यूरो पूर्वानुमानों में हालिया कटौती के साथ ही EUR/CHF के अनुमान को भी घटा दिया है। तकनीकी मानकों और मौजूदा आर्थिक मॉडलों के आधार पर स्विस फ्रैंक काफी महंगा और ओवरवैल्यूड नजर आ रहा है। स्विट्जरलैंड की कम मुद्रास्फीति दर के बीच मजबूत फ्रैंक देश के निर्यातकों और आर्थिक नीति के अनुकूल नहीं है। इसके बावजूद, वर्तमान विनिमय स्तर 2026 के निचले स्तर से पर्याप्त दूरी बनाए हुए हैं, जिससे नीति निर्माताओं को तत्काल घबराने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्तर मार्च में हुए विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप से पहले के स्तरों की तुलना में काफी ऊपर हैं। हालांकि, यदि इस शरद ऋतु में फ्रैंक की खरीदारी में अप्रत्याशित उछाल आता है, तो स्विस नेशनल बैंक को बाजार में अतिरिक्त हस्तक्षेप के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। चार्ट पर EUR/CHF के लिए 0.93 के पास स्थित 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज मजबूत समर्थन प्रदान कर रहा है, जिसके नीचे 0.9240 के आसपास 200-दिवसीय मूविंग एवरेज अगला प्रमुख स्तर है। यदि फ्रांस के बजटीय हालात में कुछ स्थिरता आती है, तो मध्यम अवधि में यूरो धीरे-धीरे इस दबाव से बाहर निकल सकता है।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत गतिरोध
यूरोपीय संघ में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति से निपटने का स्पष्ट समाधान नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक माहौल बेहद जटिल बना हुआ है। सरकारी बॉन्ड बाजार पहले ही यील्ड बढ़ाकर आंशिक रूप से वित्तीय सख्ती का काम कर रहा है। इसके चलते यूरोपीय केंद्रीय बैंक के सामने आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाए बिना महंगाई थामने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। लाइव बाजार आंकड़ों में EUR/USD जोड़ी 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो अपने 52-सप्ताह के दायरे 1.12 से 1.20 के निचले छोर पर है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 14 के स्तर पर ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शा रहा है, जबकि ईएमए50 और ईएमए200 के बीच डेथ क्रॉस बना हुआ है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी आने से अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती मिली है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक डॉलर की ओर खिंचे चले आए हैं, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं को नुकसान उठाना पड़ा है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की पिछली बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले ट्रेडर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपनी हालिया रिकवरी को बरकरार रखने में नाकाम रहा और AUD/USD जोड़ी 0.7000 के नीचे नकारात्मक दायरे में फिसल गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत अपेक्षाओं के बावजूद अमेरिकी डॉलर के दबाव ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को नीचे रखा। दूसरी ओर, बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले बयानों और मजबूत डॉलर के तालमेल ने USD/JPY को 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। जापानी येन के खरीदार अब 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट का रुख
डॉलर की व्यापक तेजी के चलते कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखी गई। मंगलवार की बढ़त गंवाते हुए सोना बुधवार को फिर से मंदी के रुझान में लौट आया। XAU/USD $4,180 के स्तर से फिसलकर $4,120 के नीचे आ गया और दो महीने के निचले स्तर $4,104 के करीब पहुंच गया। निवेशक ब्याज दरों के भविष्य के रुख को समझने के लिए फेडरल रिजर्व के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्तियों में डॉगकॉइन पर मंदी का दबाव गहरा गया है। DOGE इस सप्ताह 5% से अधिक टूटकर $0.090 के आसपास कारोबार कर रहा है। डेरिवेटिव्स बाजार में शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि कमजोर मोमेंटम इंडिकेटर आने वाले दिनों में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक का फैसला और रुपये पर असर
बुधवार को संपन्न हुई मौद्रिक नीति बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया। फरवरी 2023 के बाद नीतिगत दरों में यह पहली बढ़ोतरी थी। इसके बावजूद बाजार की ठंडी प्रतिक्रिया के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गया। विदेशी मुद्रा बाजार में USD/INR उछलकर 96.72 के करीब पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों का उच्चतम स्तर है। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने घरेलू मुद्रा पर भारी दबाव बना दिया है।






















