अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा भारी दबाव का सामना कर रही है, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यह अपने 16 महीने के सबसे निचले स्तर पर फिसल गई। कारोबारी सत्र के दौरान यूरो ने जून 2025 के बाद का सबसे कमजोर स्तर छुआ, हालांकि बाद में कुछ इंट्राडे नुकसान की भरपाई की गई। यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में गहराते वित्तीय असंतुलन और विधायी खींचतान ने निवेशकों के भरोसे को झटका दिया है। इंग्लिश चैनल के दोनों तरफ के आर्थिक हालात को तौलते हुए मुद्रा व्यापारी पाउंड की तुलना में यूरो पर ज्यादा जोखिम देख रहे हैं।
फ्रांस के बजट घाटे और राजनीतिक खींचतान का असर
यूरोपीय मुद्रा पर सबसे बड़ा दबाव फ्रांस के अनिश्चित वित्तीय परिदृश्य से आ रहा है। बाजार के विश्लेषक और निवेशक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि पेरिस प्रशासन अपने भारी बजट घाटे पर समय रहते काबू पाने में कामयाब होगा या नहीं। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नू ने देश के वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मौजूदा 5.4 प्रतिशत से घटाकर वर्ष 2027 तक 5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके बावजूद, देश की संसद में विपक्षी दलों के कड़े रुख के कारण नए बजट प्रस्तावों को मंजूरी दिलाना बेहद जटिल चुनौती साबित हो रहा है। अगर बजटीय प्रावधान अटके रहते हैं, तो राजकोषीय घाटा कम करने की योजना पटरी से उतर सकती है, जिससे साझा मुद्रा की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड की स्थिति
मुद्रा विनिमय बाजार में ब्रिटिश पाउंड प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दिया। विभिन्न मुद्राओं के मुकाबले दैनिक उतार-चढ़ाव की स्थिति देखने पर पाउंड का सबसे सशक्त प्रदर्शन यूरो के खिलाफ दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्रों में राजकोषीय चिंताएं मौजूद होने के बावजूद बाजार की धारणा ब्रिटेन के पक्ष में ज्यादा झुकी दिखी, जिससे ईयूआर/जीबीपी जोड़ी लगातार कमजोरी के दायरे में बनी रही।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति की पहेली
यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के समक्ष नीतिगत निर्णय लेने की स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी गति से बढ़ रही हो, तो केंद्रीय बैंक का स्वाभाविक कदम ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन मौजूदा हालात बेहद असामान्य हैं। बॉन्ड बाजार में यील्ड में आई तेजी पहले से ही वित्तीय परिस्थितियों को कड़ा करने का काम कर रही है। बॉन्ड बाजार द्वारा स्वाभाविक सख्ती किए जाने के कारण ईसीबी के नीति निर्माताओं के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है कि वे आर्थिक मंदी के जोखिम के बीच दरों को लेकर कौन सा रास्ता चुनें।
इधर विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD में भी दबाव साफ दिखाई दे रहा है। नवीनतम कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, यह जोड़ी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.12 के स्तर पर पहुंच गई है, जो इसके पिछले बंद भाव के बराबर है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान 1.12 से 1.20 के दायरे में कारोबार करने वाली इस मुद्रा जोड़ी का वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत के 1.00 गुना पर रहा। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 14 के स्तर पर दर्ज किया गया, जो ओवरसोल्ड स्थिति की ओर संकेत करता है। वहीं एमएसीडी -0.01 और सिग्नल लाइन -0.01 पर मंदी का रुझान दर्शा रही है। चलती औसत के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 1.14, 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर बना हुआ है, जहां 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे आना डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 1.12 से 1.17 के बीच फैले हैं और एडीएक्स 47 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग दौर दिखा रहा है। स्टोकैस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 2 और सिग्नल लाइन 14 पर है। दैनिक उतार-चढ़ाव का पैमाना यानी 14-दिवसीय एटीआर 0.01 दर्ज हुआ है, जिसमें 20 दिनों का अहम समर्थन स्तर 1.12 और प्रतिरोध स्तर 1.16 पर आंका गया है। आगामी दिनों के लिए मुख्य पिवट स्तर 1.12 बना हुआ है, जबकि प्रतिरोध आर1 1.12 और आर2 1.13 तथा समर्थन एस1 1.11 और एस2 1.11 पर स्थित हैं। यूरोपीय संघ में मुद्रास्फीति अमेरिकी मूल्य वृद्धि से आगे निकल रही है, जिससे ईसीबी और यूएस फेड की आगामी बैठकों पर नजरें टिकी हुई हैं।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक बिकवाली का माहौल
बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान समग्र वैश्विक जोखिम धारणा लगातार कमजोर होती नजर आई। केवल यूरोपीय मुद्रा ही नहीं, बल्कि विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में बिकवाली का दबाव गहराया। ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर कारोबार करने लगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का डर फिर से पैदा कर दिया है। इसके साथ ही यूरोप के प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेज गिरावट देखी गई और निवेशकों की बिकवाली और गहरी हो गई। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने की कीमतों में भी 1.20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी देखने को मिली। बाजार प्रतिभागी अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एफओएमसी मिनट्स की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे इस साल के अंत से पहले ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी की संभावनाओं पर स्थिति साफ हो सके।
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD अपनी पिछली रिकवरी को बरकरार रखने में नाकाम रहा और 0.7000 के अहम स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी आरबीए की ओर से आक्रामक रुख की उम्मीदों के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण इस जोड़ी पर दबाव बना रहा। उधर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन यानी USD/JPY बुधवार को एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के पास डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर के करीब बना रहा। बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत नरमी के बयानों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की मजबूती ने इस जोड़ी को सहारा दिया, जहां तेजी के सौदागर अब 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी सुधारात्मक गिरावट देखने को मिली। 87,200 डॉलर के आपूर्ति स्तर के आसपास बिकवाली का सामना करने के बाद बिटकॉइन नीचे आया। अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों में भी गिरावट का रुझान रहा, जहां इथेरियम 2,600 डॉलर के प्रमुख समर्थन स्तर की ओर लुढ़क गया, जबकि रिपल अपने डाउन लेग को बढ़ाते हुए 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के करीब पहुंच गया। समग्र वित्तीय परिदृश्य में भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।






















