अमेरिकी श्रम बाजार के स्वास्थ्य को मापने के लिए नॉन-फार्म पेरोल यानी NFP के आंकड़ों को दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सबसे अहम पैमाना माना जाता है। ब्याज दरों के भविष्य, डॉलर के रुख और बॉन्ड यील्ड की चाल तय करने में यह रिपोर्ट केंद्रीय भूमिका निभाती है। हालांकि, महीने के पहले शुक्रवार को जारी होने वाले शुरुआती आंकड़े और बाद में आने वाले संशोधित अंतिम आंकड़ों के बीच अक्सर भारी अंतर देखने को मिलता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अर्थशास्त्री डैन पैन ने एक विस्तृत शोध में यह पड़ताल की है कि कैलेंडर वर्ष के कौन से महीनों में आने वाले शुरुआती NFP आंकड़े सबसे भरोसेमंद संकेत देते हैं और किन महीनों के डेटा पर तुरंत दांव लगाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
शुरुआती रिलीज और बेंचमार्क संशोधनों में अप्रैल तथा नवंबर सबसे सटीक
डैन पैन ने शुरुआती आंकड़ों और बाद में आने वाले अंतिम बेंचमार्क संशोधनों के बीच मीन एब्सोल्यूट एरर यानी MAE की तुलना करते हुए विभिन्न महीनों की विश्वसनीयता जांची। इस अध्ययन में यह सामने आया कि अप्रैल और नवंबर के शुरुआती आंकड़े वास्तविक स्थिति के सबसे करीब होते हैं। एकल महीने के आधार पर अप्रैल के पहले आंकड़े में MAE का स्तर सबसे कम दर्ज किया गया। इसके अलावा, जब तीन महीने के मूविंग एवरेज यानी 3mma के पैमाने पर देखा गया, तब भी अप्रैल दूसरा सबसे कम MAE दर्ज करने वाला महीना रहा।
नवंबर के महीने में भी सिंगल-मंथ आधार पर MAE काफी कम रहता है, हालांकि महामारी के बाद के दौर में इसकी सटीकता में कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई है। डैन पैन का कहना है कि जब यह तय करना हो कि किन महीनों के शुरुआती आंकड़े अंतिम अनुमानों के सबसे नजदीक होते हैं, तो अप्रैल और नवंबर सबसे अलग और सटीक नजर आते हैं। इन महीनों में आने वाले रोजगार के आंकड़े बाजार के लिए सबसे वास्तविक तस्वीर पेश करते हैं, जिससे नीति निर्धारकों और निवेशकों को गुमराह होने का जोखिम कम रहता है।
जनवरी, सितंबर, मार्च और मई में भारी उलटफेर का खतरा
इसके ठीक उलट, साल के कुछ महीने ऐसे हैं जहां शुरुआती रिलीज और अंतिम आंकड़ों के बीच सबसे बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। अध्ययन के मुताबिक जनवरी, सितंबर, मार्च और मई ऐसे महीने हैं जहां संशोधनों का आकार सबसे बड़ा होता है। सबसे कम भरोसेमंद महीनों में दर्ज होने वाला MAE सबसे सटीक महीनों की तुलना में लगभग दोगुना तक पहुंच जाता है। ऐसे में इन महीनों में आने वाले शुरुआती चौंकाने वाले आंकड़ों पर तुरंत आक्रामक ट्रेड लेना भारी नुकसान का सबब बन सकता है।
डैन पैन ने इस अंतर की गंभीरता को रेखांकित करते हुए साफ किया है कि सबसे कम और सबसे ज्यादा भरोसेमंद महीनों के बीच का अंतर मामूली नहीं है। इसलिए इन महीनों के शुरुआती आश्चर्यों पर अपनी जोखिम पर ही कारोबार करना चाहिए। अक्सर मौसमी बदलावों, साल की शुरुआत में नई नियुक्तियों के मॉडल और साल के अंत की छुट्टियों के चलते गणना में ऐसी विसंगतियां पैदा हो जाती हैं जो बाद के महीनों में बड़े डाउनवर्ड या अपवर्ड रिवीजन का कारण बनती हैं।
तीन महीने के मूविंग एवरेज में भी बना रहता है अंतर
आमतौर पर अर्थशास्त्री एकल महीने की अस्थिरता से बचने के लिए तीन महीने के मूविंग एवरेज का सहारा लेते हैं। अध्ययन में यह पुष्टि हुई कि 3mma के आधार पर MAE का स्तर एकल महीने की तुलना में कम रहता है, क्योंकि एक महीने की गणना संबंधी खामी अक्सर अगले महीने में संतुलित हो जाती है। इसके बावजूद महीनों के बीच का विश्वसनीयता अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होता।
तीन महीने के मूविंग एवरेज के आधार पर अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर सबसे भरोसेमंद बनकर उभरे हैं। वहीं दूसरी तरफ, जनवरी, मई और सितंबर के 3mma आंकड़े सबसे कम विश्वसनीय पाए गए। यहां भी सबसे मजबूत और सबसे कमजोर महीनों के बीच का अंतर काफी बड़ा है। डैन पैन बताते हैं कि जनवरी और मई के 3mma में अक्सर वास्तविक ट्रेंड को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की प्रवृत्ति देखी जाती है, क्योंकि पिछले महीनों से चली आ रही अपवर्ड बायस इसमें जुड़ जाती है। महामारी से पहले NFP के आंकड़ों में अक्सर स्थिति को कम करके आंकने की आदत देखी जाती थी, लेकिन महामारी के बाद के वर्षों में रोजगार के रुझान को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना ज्यादा आम हो चुका है।
बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक मुद्राओं पर दबाव
इस बीच, व्यापक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नई तेजी ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर में निचले स्तरों पर लिवाली को बढ़ावा दिया है। इसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में आ गया और AUD/USD की जोड़ी 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करती दिखी। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी RBA की तरफ से सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदों के बावजूद यह जोड़ी अपनी हालिया बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही। अब सभी निवेशकों की निगाहें FOMC मिनट्स पर टिकी हैं।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में लगभग डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर 158.50 के करीब बनी रही। बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की ओर से नरम बयानों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने डॉलर को नई मजबूती दी है। खरीदार अब 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA की बाधा पार होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि FOMC मिनट्स से पहले आगे की रणनीति बनाई जा सके।
सोने में 1.20% की गिरावट, ब्रेंट क्रूड $102 के पार
अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में दोबारा शुरू हुई तेजी का सीधा असर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर पड़ा है। सोने की कीमतों में लगभग 1.20% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कारोबारी साल के अंत से पहले ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना तलाशने के लिए FOMC मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। यूरोप के शेयर बाजारों में बिकवाली गहराती जा रही है और पूरे सत्र में जोखिम से बचने की भावना और मजबूत हुई है।
कमोडिटी बाजार में सप्लाई और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। वहीं अगर अमेरिकी क्रूड ऑयल के लाइव तकनीकी स्तरों को देखें तो यह 90.12 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 89.44 डॉलर से 0.76% अधिक है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर रहा है। 14-दिवसीय RSI 46 पर है और MACD -0.21 पर बना हुआ है, जबकि सिग्नल लाइन 0.91 पर है। इसके मुख्य सपोर्ट स्तर 89.43 डॉलर और 88.74 डॉलर हैं, जबकि प्रतिरोध स्तर 90.71 डॉलर और 91.30 डॉलर पर स्थित हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दुविधा
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी मुनाफावसूली का दौर देखा जा रहा है। बिटकॉइन हाल ही में 87,200 डॉलर के करीब मिले भारी सप्लाई दबाव के बाद करेक्शन के दौर से गुजर रहा है। ऑल्टकॉइन भी इसी गिरावट के दायरे में हैं, जहां इथेरियम फिसलकर अपने अगले अहम सपोर्ट 2,600 डॉलर की तरफ बढ़ रहा है और रिपल कमजोर होकर 1.45 डॉलर के डिमांड क्षेत्र के नजदीक आ गया है।
यूरोप में नीति निर्माताओं के सामने अलग तरह की चुनौती खड़ी है। आमतौर पर जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा विकल्प होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड मार्केट में पहले से ही सख्ती देखने को मिल रही है, जिससे वित्तीय स्थितियां अपने आप कड़ी हो रही हैं। यह स्थिति ECB को एक अत्यंत जटिल दुविधा में डाल रही है कि दरों को और बढ़ाकर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया जाए या बाजार की चाल पर भरोसा किया जाए।





















