यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र में हालिया गतिविधियों से मिले-जुले संकेत सामने आ रहे हैं, जहाँ सेवा और समग्र गतिविधियों में कुछ तेजी के बावजूद बुनियादी विनिर्माण क्षेत्र अभी भी व्यापक रिकवरी से दूर बना हुआ है। हालिया परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई के नए आंकड़े जहां कुछ राहत पेश करते हैं, वहीं एसएंडपी ग्लोबल के ब्योरे यह रेखांकित करते हैं कि समग्र आर्थिक बढ़त सभी मोर्चों पर समान नहीं है। विशेष रूप से फ्रांस और इटली के कारखानों में जारी दबाव इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहा है कि औद्योगिक धुरी अभी भी चुनौतियों से जूझ रही है, जिस पर घरेलू राजनीति और आगामी वित्तीय सख्ती का अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
फ्रांस और इटली के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर गहराता संकट
यूरोपीय संघ की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कारखानों की स्थिति नीति निर्माताओं के लिए चिंता का सबब बन रही है। फ्रांस का पीएमआई स्तर चालू वर्ष के अधिकांश समय 50 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास ही मंडराता रहा है। आर्थिक मानकों के अनुसार 50 से नीचे की मामूली गिरावट अपने आप में किसी गंभीर मंदी या बड़े आर्थिक मोड़ की ओर इशारा नहीं करती, मगर यह स्थिरता के अभाव को दर्शाती है। इसके साथ ही फ्रांस में घरेलू राजनीतिक अनिश्चितता का अतिरिक्त तनाव औद्योगिक वातावरण को निरंतर प्रभावित कर रहा है, जिससे व्यावसायिक आत्मविश्वास कमजोर बना हुआ है।
दूसरी ओर, इटली के विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति अधिक गहरी चिंता पैदा कर रही है। दूसरी तिमाही की अपनी मजबूत ऊंचाइयों से फिसलने के बाद इटली की औद्योगिक रफ्तार लगातार धीमी पड़ती दिख रही है। एसएंडपी ग्लोबल के आकलन में यह आगाह किया गया है कि उत्पादन की गति और नए ऑर्डरों में तेज गिरावट आने से वहां का कारोबारी उत्साह तेजी से घट रहा है। चूँकि यूरोप की कुल अर्थव्यवस्था में फ्रांस और इटली की हिस्सेदारी अत्यंत व्यापक है, इसलिए इन दोनों देशों में औद्योगिक गतिविधियों की लंबी कमजोरी पूरे यूरोजोन के समग्र आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मंदी लंबी खिंचती है, तो यूरोपियन सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी को अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं में बड़ा फेरबदल करने पर विवश होना पड़ सकता है।
फिस्कल सख्ती और मांग पर मंडराता जोखिम
यूरोपीय महाद्वीप में केवल मौद्रिक चुनौतियां ही नहीं हैं, बल्कि सरकारी खर्चों पर नियंत्रण और कड़े बजट उपायों का जोखिम भी गहरा रहा है। यूरोजोन के विभिन्न देशों में अपेक्षा से अधिक सख्त राजकोषीय नीतियां लागू होने की संभावना बढ़ रही है। यदि सरकारों ने खर्चों में भारी कटौती की, तो इससे घरेलू स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की मांग काफी हद तक प्रभावित हो सकती है। घरेलू मांग के कुंद पड़ने से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी होगी, जिससे केंद्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी नीतिगत अपेक्षाओं और ब्याज दरों के अनुमानों को दोबारा समायोजित करना पड़ेगा।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से डॉलर पर भारी बिकवाली
वैश्विक विदेशी मुद्रा और बांड बाजारों में उस समय व्यापक फेरबदल देखने को मिला जब अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की शुरुआती मतगणना ने राजनीतिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया। वाशिंगटन में संभावित राजनीतिक गतिरोध के संकेतों ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की तलाश करने पर प्रेरित किया। इसका सीधा प्रहार अमेरिकी डॉलर पर पड़ा, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स फिसलकर एक महीने के निचले स्तर पर आ गया।
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर की कमजोरी के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई। सरकारी बांड यील्ड में इस गिरावट ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं से मिलने वाले समर्थन को बेअसर कर दिया। परिणामस्वरूप, यूएसडी/जेपीवाई भारी बिकवाली दबाव में आ गया और गिरकर 158.00 के स्तर से नीचे आ गया। इसी तरह, एशियाई सत्र में शुरुआती चुनावी हलचलों के बीच एयूडी/यूएसडी अपने दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के आसपास मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए के अपेक्षाकृत कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा।
सोने की जोरदार वापसी और 4,000 डॉलर का आंकड़ा पार
लगातार दो दिनों की तकनीकी गिरावट और दबाव को पीछे छोड़ते हुए सोने की कीमतों में बुधवार को उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई। सोने की इस तेज वापसी को कई व्यापक आर्थिक कारकों से एक साथ सहारा मिला। अमेरिकी डॉलर में आई भारी गिरावट, अमेरिकी सरकारी ट्रेजरी यील्ड के नीचे फिसलने और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने मिलकर गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया। वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने को दोबारा तेज रफ्तार दी।
क्रिप्टो बाजार में हरियाली और बिटकॉइन में उछाल
व्यापक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता सुधरने से डिजिटल परिसंपत्तियों में भी तेजी का रुख देखा गया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में धारणा सकारात्मक होने के चलते बुधवार को प्रमुख क्रिप्टो टोकन मजबूत स्तरों पर पहुंच गए। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार निकलकर कारोबार करती देखी गई।
बिटकॉइन में आई इस रिकवरी की सीधी झलक अन्य प्रमुख टोकनों पर भी साफ नजर आई। एथेरियम ने भी इसी सकारात्मक गति को दोहराते हुए 2,300 डॉलर के स्तर के ऊपर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। वहीं रिपल में भी जोरदार खरीदारी देखी गई, जहाँ टोकन 1.28 डॉलर के स्तर से ऊपर हाथ बदलता रहा और इसने लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की। वैश्विक स्तर पर वित्तीय और चुनावी अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश और उच्च जोखिम वाली परिसंपत्तियों में अलग-अलग समीकरण बनते दिख रहे हैं।



















