उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में तैयार होने वाले सामान की मांग वैश्विक बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। दीपावली का त्योहार समाप्त होने के साथ ही कानपुर सहित राज्य के विभिन्न विनिर्माण केंद्रों में विदेशी खरीदारों के ऑर्डर की बाढ़ आ गई है। वर्ष के अंत में आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय शॉपिंग सीजन को ध्यान में रखते हुए विदेशी कारोबारी बड़े पैमाने पर भारतीय सामान का आयात कर रहे हैं। क्रिसमस, न्यू ईयर, ब्लैक फ्राइडे और साइबर मंडे जैसे बड़े वैश्विक मौकों के लिए उत्तर प्रदेश के बने होम डेकोर और लेदर उत्पादों की मांग में जोरदार उछाल देखा जा रहा है।
अक्टूबर से दिसंबर की खरीदारी से उत्पादन में तेजी
दुनियाभर के बाजारों में अक्टूबर से दिसंबर तक का समय खरीदारी का सबसे बड़ा सीजन माना जाता है। इस दौरान अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों में ग्राहक जमकर खरीदारी करते हैं। ब्लैक फ्राइडे और साइबर मंडे जैसे मौकों पर मिलने वाली भारी छूट के कारण विदेशी रिटेल कारोबारी कई महीने पहले से ही सामान का स्टॉक जमा करने लगते हैं। इस बार उत्तर प्रदेश में तैयार होने वाले सजावटी सामान, फैशन एसेसरीज, चमड़े के जूते, लेदर बैग, कपड़े और फ्लोर कवरिंग उत्पादों की भारी मांग निकलकर सामने आई है। इस मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय फैक्ट्रियों और कारीगरों ने अपना उत्पादन बढ़ा दिया है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच विदेशी ऑर्डर में आई इस बढ़ोतरी से स्थानीय निर्यातकों के चेहरे खिल उठे हैं। उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने से न केवल कारोबारियों का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि राज्य में लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। स्थानीय उद्योगों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में विदेशी खरीदारों से और नए सौदे हासिल होंगे।
व्यापार समझौतों से भारतीय सामान को मिला फायदा
हाल के समय में भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का सीधा लाभ निर्यातकों को मिलता दिख रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि हर साल फेस्टिव सीजन में होम डेकोर, लेदर गुड्स, टेक्सटाइल और फैशन एसेसरीज की विदेशी मांग में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि इस बार भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और नए ऑर्डर लगातार मिल रहे हैं, जिससे व्यापार को नई दिशा मिल रही है।
आलोक श्रीवास्तव के अनुसार ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए एफटीए समझौतों से भारतीय निर्यातकों को बहुत बड़ा सहारा मिला है। इन समझौतों के तहत तय की गई शर्तों के अनुसार भारतीय उत्पादों को सीमा शुल्क में विशेष राहत मिलती है। ड्यूटी में मिलने वाली इस छूट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सामान की कीमतें प्रतिस्पर्धी हो जाती हैं, जिससे विदेशी कारोबारी अन्य देशों के बजाय भारत से सामान खरीदना अधिक पसंद करते हैं।
लेदर उद्योग के लिए खुले नए अंतरराष्ट्रीय रास्ते
उत्तर प्रदेश का चमड़ा उद्योग हमेशा से विदेशी बाजारों में मजबूत पकड़ रखता आया है, और नए समझौतों के बाद इसकी संभावनाएं और बढ़ गई हैं। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट (सीएलई) के वाइस चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने बताया कि एफटीए समझौतों के लागू होने के बाद भारतीय लेदर सेक्टर के लिए कई नए देशों के बाजार खुल गए हैं। उनका कहना है कि हमारे उत्पाद जितने अधिक देशों तक पहुंचेंगे, देश के निर्यातकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को उतना ही अधिक फायदा मिलेगा।
मुख्तारुल अमीन ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बढ़ती मांग और नए बाजारों तक सीधी पहुंच से चमड़ा उद्योग को लंबे समय तक लाभ मिलेगा। त्योहारों के इस वैश्विक सीजन में मिली गति से उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को अपनी क्षमता विस्तार करने का सुनहरा मौका मिला है। कारखानों में तेजी से जारी काम को देखते हुए कारोबारी उम्मीद जता रहे हैं कि यह त्योहारी सीजन पूरे साल के लिए निर्यात वृद्धि की मजबूत नींव रखेगा।



















