अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जिसे नीतिगत ब्याज दरों में हालिया बढ़ोतरी और निवेशकों के भविष्य के आकलनों से लगातार समर्थन मिल रहा है। राबोबैंक की राबोरिसर्च ग्लोबल इकोनॉमिक्स एंड मार्केट्स एफएक्स स्ट्रैटेजी टीम के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी मुद्रा में सट्टा कारोबारियों की शुद्ध लॉन्ग पोजीशन लगभग स्थिर रही है। इस दौरान लॉन्ग और शॉर्ट दोनों ही तरह के दांवों में मामूली स्तर पर बराबर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सट्टा कारोबारियों ने लॉन्ग और शॉर्ट दोनों पोजीशन में दो-दो हजार कॉन्ट्रैक्ट की वृद्धि की, जिससे कुल मिलाकर शुद्ध संतुलन में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
फेडरल रिजर्व की नीति और ओआईएस कर्व के संकेत
फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत समीक्षा के तहत 16 सितंबर को ओवरनाइट पॉलिसी दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार की आम अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा। इस निर्णय के बाद भी ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप यानी ओआईएस कर्व यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि निवेशक आगामी वर्ष के अंत तक तीन से अधिक दरों में वृद्धि के दांव लगाकर चल रहे हैं। बाजार यह मानकर चल रहा है कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए अपनी सख्त मौद्रिक नीति को आगे भी बरकरार रख सकता है।
इसके साथ ही, बाजार में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर वृद्धि का यह सिलसिला वास्तव में जरूरी है। यूके में डीजल की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने समग्र आर्थिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है। कच्चे तेल के बाजार में आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाएं कुछ हद तक शांत हुई हैं, हालांकि इसके बावजूद ईंधन के दाम ऊंचे स्तरों पर टिके हुए हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय बाजारों की नजर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश सौदों के अगले रुख पर भी बनी हुई है।
बैंक ऑफ जापान और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कदमों की समानता
वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के हालिया नीतिगत कदमों में एक उल्लेखनीय समानता दिखाई दी है। दोनों ही केंद्रीय बैंकों ने पिछले सप्ताह अपनी ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया है। दोनों प्रमुख संस्थान बढ़ती मुद्रास्फीति के जोखिमों का सीधे तौर पर सामना कर रहे हैं और दोनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी भविष्य की नीतिगत कार्रवाइयां आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर ही निर्भर करेंगी।
इसके बावजूद मुद्रा बाजार में जापानी येन की चाल उतार-चढ़ाव भरी बनी हुई है। यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में गिरावट पर खरीदारी करने वाले निवेशक फिर से सक्रिय हुए हैं। इस जोड़ी ने शुक्रवार की उस गिरावट का एक हिस्सा वापस हासिल कर लिया, जो इस अटकल के कारण आई थी कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को संभालने के लिए बाजार में दोबारा हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के मिनट्स में नरमी के रुख ने येन की मजबूती को सीमित कर दिया। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के चलते कच्चे तेल की कीमतों को सहारा मिला है, जिसने मुद्रास्फीति की आशंकाओं को हवा देकर अक्टूबर में फेड द्वारा दर वृद्धि के दांव को पुख्ता किया है। इन सब वजहों से यूएसडी/जेपीवाई को और मजबूती मिली और यह जोड़ी 158.00 के स्तर की ओर वापस बढ़ती नजर आई।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी डॉलर के आक्रामक रुख के बीच नई कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में एयूडी/यूएसडी 0.7000 के स्तर का बचाव करने में जुटा रहा। यह जोड़ी 4 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ती महंगाई के जोखिम और अक्टूबर महीने में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने के बढ़ते अनुमानों के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच राजनीतिक गतिरोध सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा दे रहा है। डॉलर की इस मजबूती का सीधा नुकसान ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को उठाना पड़ रहा है, और मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की नीतिगत घोषणाओं से ठीक पहले यह दबाव साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के रुख को लेकर सतर्क बने हुए हैं, जिससे जोड़ी में कमजोरी का रुख बना हुआ है।
सोने और बिटकॉइन की कीमतों पर गहरा असर
कमोडिटी बाजार में सोने ने सप्ताह की शुरुआत भारी दबाव और कमजोरी के साथ की है। सोने की कीमतें गिरकर प्रति ट्रॉय औंस 4,100 डॉलर के करीब पहुंच गईं, जो स्तर आखिरी बार अगस्त की शुरुआत में देखा गया था। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव दोबारा गहराया है, तो दूसरी तरफ मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हो रही बढ़ोतरी ने पीली धातु पर सोमवार को जबरदस्त दबाव बनाए रखा है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 82,800 डॉलर से नीचे कारोबार करता दिखा। पिछले सप्ताह बिटकॉइन ने 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की थी, लेकिन हालिया ऊंचे स्तरों के नजदीक आते ही तेजी की रफ्तार धीमी पड़ गई। हालांकि, स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में आ रहे पूंजी प्रवाह से मिलने वाले मजबूत संस्थागत समर्थन के चलते इस डिजिटल संपत्ति की मांग को अब भी सहारा मिल रहा है। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक खिंचाव और सख्त ब्याज दर चक्र के बीच अमेरिकी डॉलर अन्य वित्तीय संपत्तियों के मुकाबले अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल साबित हो रहा है।
















