अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव गहराता जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों के दम पर अमेरिकी डॉलर ने व्यापक बढ़त बना ली है। विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड स्टर्लिंग के खिलाफ मंदी के सौदे, जिन्हें नेट शॉर्ट पोजीशन कहा जाता है, उनमें 40 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेज उछाल के साथ ही पाउंड पर सट्टेबाजी के मंदी वाले सौदे अगस्त महीने के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि व्यापारी आने वाले दिनों में ब्रिटेन की मुद्रा में और गिरावट की आशंका जता रहे हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड का यथास्थिति का फैसला और पाउंड की सुस्ती
ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 18 सितंबर को अपनी मौद्रिक नीति बैठक में मुख्य नीतिगत दर, जिसे बैंक रेट कहा जाता है, 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया था। नीतिगत दर में यह ठहराव व्यापक बाजार की अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप था, लेकिन यह निर्णय पाउंड को नई मजबूती देने में विफल रहा। कच्चे तेल के चढ़ते भाव से अमेरिकी डॉलर को भारी समर्थन मिल रहा है, और पाउंड इस तेल-संचालित डॉलर की रैली के सामने लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है, जिससे मुद्रा बाजार में नकारात्मक धारणा और गहरी हो गई है।
अमेरिकी डॉलर की चौतरफा बढ़त से अन्य प्रमुख मुद्राओं पर असर
डॉलर की मजबूती केवल ब्रिटिश पाउंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी इसका व्यापक असर साफ नजर आ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी, AUD/USD, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के अहम स्तर का बचाव करती हुई दिखाई दे रही है। यह स्तर 4 अगस्त के बाद से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के आसपास टिकी हुई है, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती लागत से पैदा हुए मुद्रास्फीति के खतरों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं से सहारा मिल रहा है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ा दिया है, जिससे मंगलवार को आने वाली रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की नीतिगत घोषणाओं से ठीक पहले इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बना हुआ है।
जापानी येन और केंद्रीय बैंकों का ब्याज दर रुख
विदेशी मुद्रा बाजार में USD/JPY की चाल पर नजर डालें तो वहां निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय होते दिखाई दिए हैं। इसने शुक्रवार को दर्ज की गई उस गिरावट के एक हिस्से की भरपाई कर ली है, जो अधिकारियों द्वारा जापानी येन को सहारा देने के लिए बाजार में दखल देने की अटकलों के कारण आई थी। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नरम मौद्रिक नीति वाली बैठक के मिनट्स ने जापानी येन की बढ़त को सीमित कर दिया। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों को मिल रहा समर्थन मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा रहा है और अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि के दांव को पुख्ता कर रहा है। इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव ने इस जोड़ी को फिर से 158.00 के स्तर की दिशा में आगे बढ़ा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने ही 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी की थी, दोनों ही मुद्रास्फीति के दबावों का सामना कर रहे हैं और दोनों ने ही साफ संकेत दिया है कि उनके आगामी नीतिगत फैसले भविष्य के आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर भी छाया असर
मजबूत होते डॉलर और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल का असर सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले सोने पर भी देखा गया। सोना नए हफ्ते की शुरुआत में कमजोरी के रुख के साथ खुला और बिकवाली के भारी दबाव में फिसलते हुए 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गया, जो कि अगस्त की शुरुआत के बाद पहली बार देखा गया स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की तेजी और डॉलर के मजबूत रुख ने पीली धातु पर सोमवार को जबरदस्त दबाव बनाए रखा। वहीं डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार करता नजर आया। पिछले हफ्ते बिटकॉइन में 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई थी, लेकिन हालिया ऊंचाई के करीब पहुंचते ही इस तेजी की रफ्तार धीमी पड़ गई, हालांकि स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में आ रहे निवेश के जरिए मजबूत संस्थागत मांग इसे आधार प्रदान कर रही है।
ब्रिटेन में ईंधन की रिकॉर्ड महंगाई और व्यापक आर्थिक चिंताएं
ब्रिटेन के घरेलू मोर्चे पर आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, जहां ब्रिटेन में डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। बढ़ती ईंधन लागत ने समग्र आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वित्तीय बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आक्रामक दर वृद्धि का चक्र अपना सकता है, हालांकि बाजार हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वाकई इसकी जरूरत है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद तेल आपूर्ति की कुछ चिंताएं फिलहाल कम होती दिख रही हैं, जबकि निवेशक यह भी देख रहे हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े व्यापार का अगला चरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।
















