अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का दौर लगातार जारी है। फेडरल रिजर्व द्वारा हालिया ब्याज दर बढ़ोतरी के बाद नीति निर्माताओं की ओर से कड़े संकेतों ने डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त सहारा दिया है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि के मामले में अमेरिका की बढ़त बनी हुई है, जिससे यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी मुद्रा का पलड़ा भारी दिख रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों पर होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावनाओं का असर देखने को मिला है, जिससे डॉलर की तेज चाल की रफ्तार कुछ हद तक संतुलित हुई है।
फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने दिए दरें और बढ़ाने के संकेत
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक सख्ती का सिलसिला अभी थमा नहीं है। सेंट लुइस फेड के अध्यक्ष अल्बर्टो मुसालेम, जो इस समय मतदान का अधिकार नहीं रखते हैं, का मानना है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने के लिए दरों में अतिरिक्त वृद्धि की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह 2027 में मताधिकार पाने वाले शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने मांग में अत्यधिक उछाल आने पर सख्ती तेज करने की चेतावनी दी है। गूल्सबी के अनुसार, यदि आर्थिक मांग में जरूरत से ज्यादा तेजी आती है, तो केंद्रीय बैंक को दरों में अधिक आक्रामक कदम उठाने पड़ सकते हैं। बाजार की नजर न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स, फेड उपाध्यक्ष फिलिप जेफरसन और रिचमंड फेड के प्रमुख टॉम बार्किन के बयानों पर भी टिकी हुई है, जिनसे नीतिगत दिशा को लेकर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और आगामी शिखर सम्मेलन
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी का समर्थन हासिल किया। इस तेजी की मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के कड़े नीतिगत बयान रहे। दोनों अधिकारियों के बयानों से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा मिला, मगर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के आक्रामक नजरिए ने डॉलर को नीचे गिरने नहीं दिया। इससे इस मुद्रा जोड़ी में होने वाली बढ़त सीमित दायरे में बंध गई है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक निवेशकों की उत्सुकता इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर टिकी है, जिससे वैश्विक व्यापार की दिशा तय हो सकती है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक फैसला
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.50 के स्तर के आसपास कारोबार करते हुए मामूली बढ़त दर्ज करने में सफल रहा। टोक्यो में नीति निर्माताओं द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन में बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद की। बैंक ऑफ जापान ने एक अहम कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम सात बनाम दो मतों के अंतर से मंजूर हुआ। हालांकि दरें 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक का रुख अपेक्षाकृत नरम रहने के कारण येन के खरीदारों को अपेक्षित मजबूती नहीं मिल सकी। दूसरी ओर, मध्य पूर्व के तनाव और फेड के सख्त दृष्टिकोण से डॉलर को निरंतर गति मिल रही है।
सोने में दो दिन की लगातार गिरावट और बिटकॉइन का कंसॉलिडेशन
बुलियन बाजार में गैर-उपज वाली पीली धातु यानी सोने पर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती का सीधा नकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। यूरोपीय कारोबारी सत्र में सोना लगातार दूसरे दिन दबाव में रहा और मामूली बढ़त गंवाकर 4,315 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास पहुंच गया, जो तीन दिनों का निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर के कड़े रुख के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने से पूंजी निकालकर ब्याज देने वाले साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन ने पिछले दिन की 6.7% की जोरदार छलांग के बाद थोड़ी सुस्ती दिखाई और इसका भाव 85,500 डॉलर से नीचे आ गया। इस मूल्य सुधार के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग काफी मजबूत बनी हुई है। सोमवार के दिन स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ में लगभग 1 अरब डॉलर का बड़ा पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया। इसके अलावा कॉरपोरेट स्तर पर स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी और शामिल किए हैं, जो इस प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में दीर्घकालिक संस्थागत विश्वास को दर्शाता है। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजार वर्तमान में केंद्रीय बैंकों के निर्णयों और भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहे हैं।



















