अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण यूरो में गिरावट देखने को मिल रही है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा उच्च मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेतों के बाद निवेशकों का रुझान डॉलर की ओर बढ़ा है। इस वजह से यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर लगातार दबाव बना हुआ है। बाजार के प्रतिभागी अब फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉरश के आगामी संबोधन का इंतजार कर रहे हैं, ताकि भविष्य की ब्याज दर नीति और आर्थिक दिशा का सटीक अनुमान लगाया जा सके।
मौद्रिक नीति की प्रत्याशा और फेड अधिकारियों के बयान
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हालिया बयानों में स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्षित स्तर पर वापस लाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता बनी हुई है। हाल में जारी अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि मूल्य वृद्धि का दबाव अभी भी केंद्रीय बैंक के सहज स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है। Kansas City Fed के अध्यक्ष जेफरी श्मिड ने भी गुरुवार को कहा था कि नीति निर्माताओं को मूल्य दबाव को काबू में करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित रखना होगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केविन वॉरश का जैक्सन होल संगोष्ठी में दिया जाने वाला भाषण नीतिगत परिदृश्य को स्पष्ट करेगा। यह तीन दिवसीय संगोष्ठी 27 अगस्त से 29 अगस्त तक आयोजित की जा रही है, जिसका आधिकारिक विषय वित्तीय नवाचार और भुगतान तथा नीति पर इसके प्रभाव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी Non-Farm Payrolls के वार्षिक संशोधन में 79,000 नौकरियों की कटौती के आंकड़े ने भी वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता और डॉलर की मांग को बल दिया है।
यूरो और डॉलर तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
तकनीकी चार्ट पर EUR/USD का कारोबार 1.1643 के आसपास देखा गया है, जो एक हल्के नकारात्मक रुझान का संकेत देता है। यह करेंसी जोड़ी वर्तमान में 100-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज जो 1.1658 पर है, और 200-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज जो 1.1655 पर है, दोनों के नीचे बनी हुई है। इसके साथ ही 1.1667 के समीप स्थित अवरोही ट्रेंड लाइन प्रतिरोध भी यूरो की बढ़त को सीमित कर रहा है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 44 के स्तर के पास बना हुआ है, जो बाजार में तटस्थ से सुस्त स्थिति को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिकवाली करने वाले पक्ष की पकड़ मजबूत बनी हुई है और यूरो में किसी भी ऊपरी उछाल को प्रतिरोध स्तरों पर रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। यदि यूरो ऊपर की ओर कदम बढ़ाता है, तो पहला तत्काल प्रतिरोध 200-SMA के 1.1655 और 100-SMA के 1.1658 पर होगा, जिसके बाद 1.1667 पर ट्रेंड लाइन बाधा स्थित है। इस प्रतिरोध समूह को पार करने के बाद ही यूरो 1.1711 के क्षैतिज स्तर की ओर बढ़ सकता है। नीचे की ओर, पहला समर्थन 1.1614 पर है, जिसे तोड़ने पर यूरो में 1.1600 के बहु-दिवसीय निचले स्तरों तक गिरावट आ सकती है।
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार पर व्यापक असर
अमेरिकी डॉलर की बढ़त का असर केवल यूरो तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी इसका प्रभाव साफ दिख रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (GBP/USD) में साप्ताहिक सुधार के बीच बिकवाली का दबाव बढ़ा है और यह 1.3500 के मध्य स्तर पर आ गई है। ग्रीनबैक की मजबूती और रोजगार आंकड़ों के संशोधन के बाद पाउंड में गिरावट की गति तेज हुई है।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें भी अनिश्चितता के घेरे में हैं। वैश्विक बाजार में सोना प्रति ट्रॉय औंस 4,600 डॉलर के प्रमुख स्तर के आसपास उतार-चढ़ाव दर्ज कर रहा है। जैक्सन होल संगोष्ठी से पहले निवेशकों की सतर्कता और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के पुनरीक्षण के कारण कीमती धातुओं में दिशात्मक स्पष्टता का अभाव बना हुआ है।
डिजिटल एसेट्स और ऊर्जा बाजार में हलचल
क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी वैश्विक मौद्रिक नीतियों के कड़े होने की आशंकाओं से अछूता नहीं रहा है। बिटकॉइन 81,000 डॉलर से 82,000 डॉलर के प्रतिरोध क्षेत्र को तोड़ने के दूसरे प्रयास में विफल होने के बाद 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है। इस गिरावट के असर से अन्य प्रमुख डिजिटल एसेट्स भी प्रभावित हुए हैं। एथेरियम फिसलकर 2,500 डॉलर के स्तर पर आ गया है, जबकि रिपल का भाव घटकर 1.40 डॉलर के समर्थन स्तर की ओर चला गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में, हालांकि कच्चे तेल का बाजार अपेक्षाकृत स्थिर प्रतीत होता है, लेकिन डीजल सेगमेंट से अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी WTI कच्चे तेल पर अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है और इसने 102.00 डॉलर से अधिक का इंट्राडे रिकॉर्ड बनाया है। यह स्थिति रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में चल रहे तनाव को उजागर करती है।
निवेशकों के लिए बाजार परिदृश्य और रणनीति
आगामी दिनों में वित्तीय बाजारों की दिशा पूरी तरह से फेडरल रिजर्व के नीतिगत संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। जब तक मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए दरों में सख्ती की संभावना बनी रहेगी, तब तक डॉलर को मजबूती मिलने और जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे प्रमुख तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर कड़ी नजर बनाए रखें।



















