फेडरल रिजर्व के अधिकारी वॉरश द्वारा जैक्सन होल सम्मेलन में दिए गए सख्त बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और सोना $4,600 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गया। कीमती धातुओं में इस बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में हुआ उछाल रहा। मौद्रिक नीति की भावी दिशा को लेकर निवेशकों की धारणा बदलते ही अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, 0.38% से अधिक की तेजी के साथ 99.49 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 1.5 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.686% पर पहुंच गई। वित्तीय बाजारों में आए इस बदलाव से वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं फिर से गहरा गई हैं।
जैक्सन होल सम्मेलन में मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण
वार्षिक जैक्सन होल सम्मेलन को संबोधित करते हुए वॉरश ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई पर नियंत्रण पाना सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है। अपने वक्तव्य में वॉरश ने स्वीकार किया कि अंतर्निहित महंगाई के आंकड़ों में कोई ठोस सुधार नहीं देखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि नीति निर्माताओं को अपने रुख में नरमी नहीं लानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्रीय बैंक को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य की ओर मजबूती से लौट रही है, और यदि ऐसा नहीं होता है तो नीति निर्माताओं को और सख्त कदम उठाने होंगे। हालांकि उन्होंने यह माना कि उपभोक्ता खर्च बेहतर बना हुआ है और श्रम बाजार में मजबूती बनी हुई है, लेकिन मूल्य स्थिरता के आंकड़े अधिक चिंताजनक हैं। इन टिप्पणियों से साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान महंगाई को नियंत्रित करने पर केंद्रित रहेगा।
जैक्सन होल से मिले इन सख्त संकेतों ने आगामी मौद्रिक नीति बैठकों के प्रति बाजार की उम्मीदों को काफी हद तक बदल दिया है। हालांकि सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की तत्काल आशंकाएं थोड़ी कम हुई हैं, लेकिन दिसंबर महीने में दर वृद्धि किए जाने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका से बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग पर विपरीत असर पड़ता है, क्योंकि सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड भौतिक सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ा देती है।
विदेशी मुद्रा बाजार पर प्रभाव और अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां
अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल का असर वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार पर व्यापक रूप से देखा गया। अमेरिकी मुद्रा की मजबूती के सामने प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़े दबाव में आ गए। GBP/USD मुद्रा जोड़े में साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह बिकवाली के भारी दबाव के कारण 1.3530 के स्तर की तरफ गिर गया। इस गिरावट को अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के वार्षिक संशोधन आंकड़ों से भी बल मिला, जिसमें रोजगार सृजन में -79K की कटौती दर्ज की गई थी।
इसी तरह EUR/USD मुद्रा जोड़े में भी बिकवाली तेज हो गई और यह सप्ताहांत तक 1.1600 के स्तर से नीचे गिरकर सात दिनों के निचले स्तर पर आ गया। यूरोपीय मुद्रा बाजार को एक तरफ वॉरश के सख्त बयानों और दूसरी तरफ अमेरिका के कमजोर रोजगार संशोधनों के दोहरे दबाव का सामना करना पड़ा। अन्य केंद्रीय बैंकों की बात करें तो रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जहां बाजार की नजरें भविष्य के मार्गदर्शन पर टिकी होंगी। दूसरी ओर बैंक ऑफ कनाडा (BoC) द्वारा अपनी नीतिगत दरों को स्थिर रखे जाने की उम्मीद है, हालांकि निवेशक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या कनाडा 2027 में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
इसके अलावा विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशक आगामी इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) मैन्युफैक्चरिंग PMI और आधिकारिक पेरोल आंकड़ों पर भी नजर बनाए हुए हैं, जो अमेरिकी डॉलर की आगे की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
सोने (XAU/USD) का तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से सोने की कीमतों में प्रमुख मूविंग एवरेज के आसपास काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआती बिकवाली के दौरान सोने की कीमत ने $4,527 प्रति औंस के करीब स्थित अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को लगभग छू लिया था। हालांकि वॉरश के संबोधन के बाद सोने में आंशिक सुधार हुआ और यह फिर से $4,550 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर आ गया। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार सोना $4,609 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जो $3,400 से $5,586 के 52-सप्ताह के दायरे के बीच -0.03% का मामूली दैनिक बदलाव दर्शाता है। इस दौरान बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत से 17.90 गुना अधिक दर्ज किया गया।
मोमेंटम इंडिकेटर्स दर्शाते हैं कि यद्यपि खरीदारों का दीर्घकालिक रुझान पर नियंत्रण बना हुआ है, लेकिन अल्पकालिक अवधि में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 70 पर स्थित है, जो ओवरबॉट स्थिति को दर्शाता है और नीचे की तरफ झुक रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि व्यापारी हर उछाल पर बिकवाली कर रहे हैं। मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) $4,445 पर, 50-दिवसीय EMA $4,341 पर, 200-दिवसीय EMA $4,349 पर, 50-दिवसीय SMA $4,211 पर और 200-दिवसीय SMA $4,514 पर बना हुआ है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय EMA के बीच डेथ क्रॉस बना हुआ है, हालांकि दीर्घकालिक रुझान अभी भी ऊपर की ओर है।
बॉलिंजर बैंड्स (20, 2) की सीमाएं $4,074 से $4,762 के बीच बनी हुई हैं जिसका मध्य बैंड $4,418 है, जो वर्तमान मूल्य को सामान्य उतार-चढ़ाव के दायरे में रखता है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 31 दर्ज किया गया है जो मजबूत ट्रेंड की उपस्थिति की पुष्टि करता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 79 और सिग्नल लाइन 81 पर है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 71.63 अंक पर है जो जोखिम प्रबंधन और स्टॉप-लॉस निर्धारित करने के लिए दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा तय करता है।
सोने के अल्पकालिक कारोबार के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर निर्धारित हैं। यदि XAU/USD 200-दिवसीय SMA के नीचे गिरता है, तो यह $4,500 के मुख्य मनोवैज्ञानिक सपोर्ट स्तर तक जा सकता है। इसके नीचे 100-दिवसीय SMA $4,374 पर अगला प्रमुख सपोर्ट क्षेत्र है। लाइव पिवट प्वाइंट्स के अनुसार प्राथमिक सपोर्ट S1 $4,563 पर और द्वितीयक सपोर्ट S2 $4,518 पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट $4,027 के आसपास है। दूसरी ओर, यदि खरीदार वापसी करते हैं तो पहला रेजिस्टेंस $4,600 पर मिलेगा। इस स्तर से ऊपर जाने पर सोना 27 अगस्त के उच्चतम स्तर $4,643 को चुनौती दे सकता है, जिसके बाद पिवट रेजिस्टेंस R1 $4,671, 20-दिवसीय रेजिस्टेंस $4,688 और मुख्य रेजिस्टेंस R2 $4,733 रहेगा, जो $4,700 के अगले लक्ष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का महत्व और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
मानव इतिहास में सोना हमेशा से मूल्य संचय करने के विश्वसनीय साधन और विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करता रहा है। आधुनिक वित्तीय प्रणाली में गहनों और औद्योगिक उपयोग के अलावा, सोने को संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी या वित्तीय उथल-पुथल की स्थिति बनती है, निवेशक सुरक्षा के लिए सोने का रुख करते हैं। चूंकि सोने का मूल्य किसी विशेष सरकार या देश पर निर्भर नहीं करता, इसलिए यह महंगाई और घटती मुद्रा दरों के खिलाफ एक मजबूत बचाव का काम करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को समर्थन देने और अर्थव्यवस्था की साख मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार देश की वित्तीय स्थिरता और देनदारी क्षमता के प्रति वैश्विक बाजारों में विश्वास पैदा करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में कुल 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कीमत लगभग $70 अरब थी। यह आधुनिक रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी स्वर्ण खरीदारी थी। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडारों में तेजी से बढ़ोतरी कर रहे हैं।
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा संबंध होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने के दाम बढ़ते हैं, जिससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार, शेयर बाजार और जोखिम भरी संपत्तियों के साथ भी सोने का विपरीत संबंध है। शेयर बाजार में तेजी आने पर सोने की मांग कम होती है, जबकि बाजारों में गिरावट आने पर सोने में निवेश बढ़ता है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें घटने पर सोना अधिक आकर्षक हो जाता है और दरें बढ़ने पर इसकी कीमतों पर दबाव बनता है।
क्रिप्टोकरेंसी और ईंधन बाजार पर असर
अमेरिकी डॉलर में आई तेजी और सख्त मौद्रिक नीति का असर डिजिटल संपत्तियों और ऊर्जा बाजार पर भी देखा गया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जहां बिटकॉइन $81,000 से $82,000 के रेजिस्टेंस स्तर को पार करने के दूसरे प्रयास में विफल रहने के बाद $80,000 के स्तर से नीचे आ गया। एथेरियम (ETH) गिरकर $2,500 पर आ गया और रिपल (XRP) फिसलकर $1.40 के सपोर्ट स्तर की तरफ बढ़ गया।
दूसरी तरफ ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही स्थिर दिख रही हों, लेकिन प्रसंस्कृत ईंधन बाजार में भारी किल्लत के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो WTI कच्चे तेल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स के प्रीमियम को मापता है, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और $102.00 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। डीजल क्रैक स्प्रेड में आया यह उछाल रिफाइनरी क्षमताओं पर दबाव और रिफाइंड उत्पादों की सीमित आपूर्ति को उजागर करता है।



















