अमेरिकी अर्थव्यवस्था में वृद्धि के स्थिर रुझान और मुद्रास्फीति में नरमी के संकेतों के बीच अमेरिकी डॉलर को निकट भविष्य में मजबूती मिलने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने की संभावना है। इसके साथ ही सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE और रोजगार लागत सूचकांक यानी ECI जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े मुद्रा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक वृद्धि के विविध अनुमान
अमेरिका की वास्तविक GDP वृद्धि दर दूसरी तिमाही में 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पहली तिमाही के 2.1 प्रतिशत के आंकड़े के ही समान है। आर्थिक गतिविधियों में इस स्थिरता का मुख्य श्रेय व्यक्तिगत उपभोक्ता खर्च और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े कॉर्पोरेट निवेश में हुई वृद्धि को दिया जा रहा है। यदि यह आंकड़ा अनुमान के अनुरूप रहता है, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उसके 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक रुझान से मामूली रूप से ऊपर बनी रहेगी।
दूसरी तिमाही की विकास दर को लेकर विभिन्न वित्तीय संस्थानों के अनुमानों में भिन्नता देखने को मिल रही है। उदाहरण के लिए, अटलांटा फेड के GDPNow मॉडल में वृद्धि दर 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके विपरीत, न्यू यॉर्क फेड के GDP Nowcast मॉडल का अनुमान 2.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का संकेत देता है। वहीं दूसरी ओर, एसएंडपी ग्लोबल PMI के आंकड़े आर्थिक वृद्धि को 1.2 प्रतिशत के काफी करीब दर्शाते हैं।
मुद्रास्फीति के आंकड़े और फेडरल रिजर्व का दृष्टिकोण
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर मुख्य PCE सूचकांक में मासिक आधार पर 0.1 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना जताई गई है, जबकि मई महीने में इसमें 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इस नरमी की मुख्य वजह पेट्रोल और ईंधन की कीमतों में आई कमी है। वार्षिक आधार पर देखें तो मुख्य PCE दर घटकर 3.7 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, जो मई में 4.1 प्रतिशत के स्तर पर थी।
खाद्य और ऊर्जा वस्तुओं को अलग रखकर मापे जाने वाले कोर PCE में मासिक स्तर पर 0.2 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है, जो मई के 0.3 प्रतिशत से कम है। सालाना आधार पर कोर PCE दर के 3.3 प्रतिशत पर आने की उम्मीद जताई गई है, जो इससे पहले 3.4 प्रतिशत पर थी। इसके अतिरिक्त, FOMC के वर्ष 2026 के मध्यवर्ती अनुमानों के अनुसार हेडलाइन PCE मुद्रास्फीति 3.6 प्रतिशत और कोर PCE मुद्रास्फीति 3.3 प्रतिशत रहने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में हलचल और मुद्रा युग्मों का हाल
डॉलर सूचकांक में उतार-चढ़ाव का सीधा असर वैश्विक मुद्रा बाजार पर देखने को मिला है। GBP/USD मुद्रा युग्म में शुक्रवार को तीन हफ्ते के निचले स्तर से सुधार के बाद नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में बढ़त का रुझान लगातार दूसरे दिन जारी रहा। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी के चलते यह जोड़ी 1.3300 के मध्य स्तर से ऊपर चढ़ने में सफल रही।
इसी प्रकार EUR/USD जोड़ी ने भी सोमवार को एशियाई सत्र में बढ़त के साथ शुरुआत करते हुए 1.1400 के स्तर को फिर से पार कर लिया। डॉलर पर बने दबाव के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच पांच महीने से जारी तनाव के कूटनीतिक समाधान की बढ़ती उम्मीदों को जिम्मेदार माना जा रहा है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए वर्ष की पहली छमाही काफी उतार-चढ़ाव भरी रही, जहां यह चार साल के उच्चतम स्तर को छूने के बाद सुधरा था। मध्य पूर्व में तनाव के कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दूसरी छमाही का परिदृश्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आई हैं, लेकिन सोमवार की शुरुआत में 4,100 डॉलर के स्तर के पास कारोबार करते हुए इन्होंने अपनी शुरुआती बढ़त को बनाए रखा। निवेशक मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो कार्डानो यानी ADA पर दबाव बना हुआ है और यह सोमवार को गिरकर 0.165 डॉलर पर कारोबार करता दिखा। डेरिवेटिव आंकड़ों में कमजोरी और सुस्त तकनीकी संकेतकों के कारण कार्डानो में अल्पकालिक सुधार की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है, जिससे ट्रेडर्स के बीच गिरावट का जोखिम प्राथमिक चिंता बना हुआ है।



















