फ्रांस में आगामी सप्ताह संसद के भीतर बजट पर होने वाली अहम बातचीत से पहले राजनैतिक और आर्थिक स्तर पर बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। सड़कों पर उतरकर राहत और वित्तीय सहायता की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे सरकार के सामने एक जटिल परिस्थिति खड़ी हो गई है। ऐसे माहौल में कोई भी संभावित राष्ट्रपति पद का दावेदार कड़े और कष्टकारी मितव्ययिता उपायों का खुलकर समर्थन करने से बच रहा है। इसके बावजूद जानकारों का आकलन है कि हाल के वर्षों की तुलना में इस बार बिना बजट के गतिरोध रह जाने का जोखिम शायद अपेक्षाकृत कम है।
संसद में संतुलन और ले पेन का राजनैतिक रुख
राजनैतिक समीकरणों को देखा जाए तो मौजूदा चुनावी सर्वेक्षणों में सबसे आगे चल रही ले पेन का मानना है कि बिना किसी बजट के काम चलाने के मुकाबले एक कमजोर या असंतोषजनक बजट का होना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प है। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, एक बेहद बंटी हुई संसद के भीतर नए सिरे से बजट का प्रारूप तैयार करने की तुलना में पहले से पारित किसी बजट में जरूरी संशोधन करना ज्यादा आसान रहेगा। उनके राजकोषीय प्रारूप की साख पर भले ही सवाल उठते रहे हों, लेकिन उन्होंने यह बात स्पष्ट रूप से सामने रखी है कि वह फ्रांस के भारी कर्ज के बोझ से किस तरह निपटना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी माना है कि यह वित्तीय संकट अपने आप खत्म नहीं होने वाला है।
अनुच्छेद 49.3 और पांच प्रतिशत घाटे का लक्ष्य
अगर संसद के पटल पर बजट प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार बिना मतदान के कानून पारित कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 49.3 का सहारा लेगी। इस संवैधानिक कदम के बाद सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन मौजूदा राजनैतिक प्राथमिकताओं और बजट की अनिवार्यता के चलते सरकार के बचे रहने की प्रबल उम्मीद जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में पांच प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करना मुमकिन नजर आता है। हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या यूरोपीय आयोग इस पांच प्रतिशत घाटे के आंकड़े को पर्याप्त मानकर अपनी सहमति देगा। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह कदम फ्रांस के बुनियादी वित्तीय संकट को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, और जोखिम बरकरार रहने के बावजूद वित्तीय बाजारों ने इस स्थिति का परीक्षण करते हुए फिलहाल इसे अलग रख दिया है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
यूरोपीय राजकोषीय चिंताओं के बीच एशियाई कारोबारी सत्र में वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गईं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बीते दिन के साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए बढ़त को आगे बढ़ाया और शुक्रवार को 0.7000 के स्तर की दिशा में आगे बढ़ा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में रात भर आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा युग्म को आवश्यक सहारा मिला। इसके अलावा रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया को लेकर नीतिगत सख्ती की उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के इर्द-गिर्द अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। शुक्रवार को सामने आए आंकड़ों से पता चला कि जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट आई है, जिससे येन पर दबाव बढ़ गया। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फ़ेडरल रिज़र्व की सख्त नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स की गिरावट ने अमेरिकी डॉलर के लिए एक मिलाजुला रुख पेश किया, जिससे गिरावट सीमित रही।
सोने की कीमतों पर बिकवाली का असर
कमोडिटी बाजार में सोने ने सप्ताह के उच्च स्तर को छूने के शुरुआती प्रयासों के बाद अपनी बढ़त गंवा दी। शुक्रवार को पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के महत्वपूर्ण आंकड़े से नीचे फिसल गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूत गति और विभिन्न अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में आ रही तेजी ने सोने के आगामी उछाल पर कड़ा दबाव बनाए रखा है। निवेशक वैश्विक स्तर पर राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों में होने वाले बदलावों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।


















