यूरोपीय मुद्रा यूरो पर गहराते दबाव के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यूरो लगातार सातवें कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ है और यह अपने इस साल के निचले दायरे 0.8460 से 0.8455 के बेहद करीब आ पहुंचा है। बाजार में बिकवाली का यह सिलसिला मुख्य रूप से फ्रांस के बढ़ते कर्ज संकट और वहां की राजनीतिक अनिश्चितताओं से जुड़ा हुआ है। निवेशक इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि यदि स्थिति नहीं संभली, तो यह मंदी अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को भी अपनी चपेट में ले सकती है।
फ्रांस के राजकोषीय संकट और चुनावी अनिश्चितता का भारी असर
यूरोपीय संघ की साझी मुद्रा पर इस समय सबसे बड़ा दबाव फ्रांस के ऋण संकट का पड़ रहा है। बाजार सहभागियों में यह डर गहराता जा रहा है कि फ्रांस में कर्ज का बढ़ता स्तर अनियंत्रित हो सकता है और इसका बुरा असर यूरोप के अन्य अधिक कर्ज वाले देशों तक फैल सकता है। अगले साल फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, जिससे पहले देश की भावी वित्तीय और राजकोषीय नीतियों को लेकर अनिश्चितता चरम पर पहुंच गई है। राजनीतिक स्तर पर किसी ठोस योजना के अभाव में निवेशक यूरोपीय परिसंपत्तियों से पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे यूरो में स्वाभाविक कमजोरी बनी हुई है। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की गति नीचे की ओर ही झुकती नजर आ रही है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर: अत्यधिक बिकवाली और संभावित अवरोध
तकनीकी चार्ट्स पर यूरो और ब्रिटिश पाउंड का रुख स्पष्ट रूप से नकारात्मक बना हुआ है, हालांकि कुछ संकेतक अत्यधिक खिंचाव की ओर भी इशारा कर रहे हैं। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD नकारात्मक क्षेत्र में नीचे की ओर झुकती रेखा के साथ बना हुआ है, जो मंदी के दबाव की पुष्टि करता है। वहीं रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI गिरकर 25 के आसपास पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र माना जाता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार 14-दिवसीय RSI 27 पर दर्ज है और MACD बेयरिश संकेत दे रहा है। यह तकनीकी स्थिति दर्शाती है कि बिकवाली का दबाव भले ही हावी हो, लेकिन निचले स्तरों पर बिकवाली जारी रहने के बजाय लिवाली का सहारा मिल सकता है।
यदि इस स्तर से कोई सुधारात्मक उछाल आता है, तो मुद्रा जोड़ी को 0.8500 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर पहले तात्कालिक अवरोध का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद 0.8540 का क्षेत्र दूसरा बड़ा रुकावट बिंदु साबित हो सकता है। यदि बाजार इस बाधा को पार करने में सफल रहता है, तो शॉर्ट कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है, जो इसे 0.8600 के स्तर की ओर ले जा सकती है। यह दायरा 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA200 के साथ मेल खाता है, जो एक अहम धुरी स्तर की भूमिका निभाएगा। जब तक दैनिक आधार पर इस बाधा के ऊपर समापन नहीं होता, तब तक मंदी का रुझान पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से पिवट स्तर 0.8478, पहला सपोर्ट 0.8451 और दूसरा सपोर्ट 0.8430 पर स्थित है, जबकि रेसिस्टेंस 0.8499 और 0.8526 पर मौजूद है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं में यूरो का तुलनात्मक प्रदर्शन
वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरो के प्रदर्शन का आकलन करें तो यह विभिन्न प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मिले-जुले उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। आज के कारोबार में यूरो ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति दिखाई। हालांकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरोपीय मुद्रा भारी दबाव में रही है। मई 2025 के बाद से यूरो-यूएसडी जोड़ी अपने सबसे निचले स्तर पर खिसक गई है। हाल ही में यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क चुकी है, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों का जोखिम, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव इस तेज गिरावट की मुख्य वजहें बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.6900 की तरफ फिसला। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों का ध्यान कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की नीतियों पर बना हुआ है। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 का स्तर फिर से हासिल करने में कामयाब रहा। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त रुख की संभावनाओं और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम के बावजूद डॉलर को बढ़त मिली।
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल सीमित दायरे में बनी रही और यह यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी रोजगार आंकड़ों की निराशा के बावजूद डॉलर में आई मजबूती ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा, यद्यपि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें न बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं ने गिरावट को सीमित भी किया। डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद बीएनबी, जिसे पहले बाइनेंस कॉइन के नाम से जाना जाता था, मामूली गिरावट के साथ 790 डॉलर के आसपास देखा गया। डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट और फंडिंग दरों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि वहां तेजड़ियों का रुख अब भी मजबूत बना हुआ है।
















