झारखंड के वायुमंडल में अचानक आए बदलाव के चलते समूचे इलाके में मौसमी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रांतीय राजधानी रांची समेत प्रदेश के कई हिस्सों में घने बादलों का डेरा बना हुआ है। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण अनेक क्षेत्रों में धूल भरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ फुहारें गिरने का अनुमान जताया गया है। खुले स्थानों पर मौजूद नागरिकों को आकाशीय बिजली और अचानक तेज होने वाले झोंकों से बचाव के लिए एहतियात बरतने को कहा गया है।
विभिन्न अंचलों में वर्षा का दायरा
प्राकृतिक हलचलों का असर राज्य के लगभग हर कोने में देखने को मिलेगा। संताल परगना क्षेत्र के देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहेबगंज जैसे भूभागों में बौछारें पड़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग और रामगढ़ में भी रुक-रुक कर पानी बरस सकता है। मध्य और पश्चिमी पट्टी के जिलों जैसे खूंटी, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, चतरा, पलामू और गढ़वा में भी बादलों का जमावड़ा रहेगा। वहीं दक्षिणी छोर पर स्थित पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां और सिमडेगा के इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मध्यम स्तर की वर्षा दर्ज की जा सकती है।
हवा की गति और आगामी दिनों का पूर्वानुमान
वायुमंडलीय दबाव में उतार-चढ़ाव की वजह से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के वेग से झोंकेदार हवाएं चलने के आसार हैं। इस मौसमी तंत्र का प्रभाव अगले दिन भी आंशिक रूप से बना रहेगा। आगामी 10 अक्टूबर को 11 चुनिंदा जिलों में छिटपुट मेघ गर्जन और हल्की बूंदों के गिरने की संभावना है, जिनमें प्रमुख रूप से संताल परगना और कोल्हान प्रमंडल के क्षेत्र शामिल हैं। उस दौरान हवा की चाल 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा के दायरे में सिमटने की उम्मीद है।
मानसून की रवानगी और गुलाबी ठंड की दस्तक
आगामी 11 अक्टूबर से वायुमंडल साफ होने की दिशा में बढ़ेगा और धूप खिलने के साथ ही वातावरण में शुष्कता लौटेगी। इसके तुरंत बाद, 12 और 13 अक्टूबर के दरमियान दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य की सीमाओं से अपनी अंतिम विदाई ले सकता है। बारिश की यह अंतिम कड़ी समाप्त होते ही सुबह और रात की पहर में हल्की सिहरन महसूस होगी, जबकि दिन के वक्त धूप निकलने से पारा चढ़ेगा। इसके चलते चौबीस घंटों के भीतर अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का फासला काफी बढ़ जाएगा।





















