सोने की कीमतों में लगातार खरीदारी का सिलसिला बना हुआ है, जिसके चलते यह तीन महीने के उच्चतम स्तर को छूते हुए $4,600 के पार पहुंच गया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में कटौती को लेकर कम होती उम्मीदों और डॉलर के मुकाबले कमजोरी के कारण पीली धातु को बड़ा समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सरकारी कर्ज की रीपरचेज योजनाओं ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया है, जिससे सोने में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
ट्रेजरी बायबैक और बॉन्ड यील्ड का असर
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से लंबी अवधि के सरकारी कर्ज के लिए बायबैक ऑपरेशनों को दोगुना करने के फैसले ने वित्तीय बाजारों का ध्यान खींचा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने बॉन्ड यील्ड में हालिया उछाल के बाद अधिक आक्रामक रूप से हस्तक्षेप करने की बात कही है। विभाग ने सितंबर से लंबी अवधि के बॉन्ड के लिए बायबैक का दायरा बढ़ाकर प्रति इश्यू कम से कम $4 बिलियन करने की घोषणा की है। इस कदम से बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय शिखर से नीचे आ गई है, जिससे डॉलर पर लगातार दबाव बना हुआ है और उसे उबरने में मदद नहीं मिल रही है।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और महंगाई के आंकड़े
जुलाई के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने निकट भविष्य में नीतिगत सख्ती की उम्मीदों को ठंडा कर दिया है, जिससे बाजार का ध्यान आगामी 15-16 सितंबर की FOMC बैठक में दरों को स्थिर रखने की संभावना पर केंद्रित हो गया है। हालांकि, तेल कीमतों की अस्थिरता के बीच बाजार अभी भी इस साल के अंत तक कम से कम एक बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70 प्रतिशत से अधिक संभावना जता रहा है। इस हफ्ते आने वाले पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयर केविन वॉर्श के भाषण पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी, जो भविष्य की मौद्रिक नीति का दिशा तय करेंगे।
मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार में, GBP/USD जोड़ी 1.3600 के आसपास सकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही है, जो पिछले शुक्रवार के उच्च स्तर के करीब है। वहीं EUR/USD भी एशियाई घंटों में 1.1680 के आसपास मजबूत बनी हुई है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी का रुख है जहां बिटकॉइन $77,000 के ऊपर ट्रेड कर रहा है। इस हफ्ते संस्थागत निवेशकों का भारी रुझान देखा गया है, जिसमें $1.92 बिलियन का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया है।
फेडरल रिजर्व की कार्यप्रणाली और मौद्रिक उपकरण
अमेरिका में मौद्रिक नीति फेडरल रिजर्व द्वारा संचालित की जाती है, जिसके मुख्य लक्ष्यों में मूल्य स्थिरता और पूर्ण रोजगार शामिल है। जब महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे उधार लेना महंगा हो जाता है और डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, महंगाई कम होने या बेरोजगारी बढ़ने पर ब्याज दरों में कटौती की जाती है। संकट के समय फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव ईसिंग जैसे गैर-मानक उपायों का भी सहारा लेता है, जिसके तहत वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदे जाते हैं। इसके विपरीत क्वांटिटेटिव टाइटनिंग प्रक्रिया डॉलर के लिए आमतौर पर सकारात्मक मानी जाती है।



















