हंगरी की मुद्रा फ़ोरिंट इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है, जहां केंद्रीय बैंक के हालिया नीतिगत कदमों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों ने इसके लचीलेपन की कड़ी परीक्षा ली है। नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने ब्याज दर में कटौती के अपने सिलसिले को 5.50 प्रतिशत पर रोक दिया है। इसके साथ ही बैंक ने मध्यम अवधि के मुद्रास्फीति लक्ष्य को 3.0 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत निर्धारित किया है, जो 1 जनवरी 2028 से प्रभावी होगा। हालांकि इस नए लक्ष्य के साथ 1 प्रतिशत अंक का मौजूदा टॉलरेंस बैंड बरकरार रखा गया है, लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्य में कटौती का सीधा मतलब है कि केंद्रीय बैंक के पास महंगाई में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को सहन करने की गुंजाइश काफी कम हो गई है। अगर बैंक अपने इस नए फ्रेमवर्क को बाजार में विश्वसनीय बनाए रखना चाहता है, तो यह केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं रह सकता बल्कि इसके लिए सख्त नीतिगत रुख की दरकार होगी।
महंगाई अनुमानों में उछाल और ऊर्जा कीमतों का असर
एक तरफ जहां नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी ने महंगाई के प्रति अपनी सहनशीलता को सीमित किया है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के लिए मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। केंद्रीय बैंक के ताजा आकलन के अनुसार, 2026 के लिए औसत महंगाई का अनुमान 1.8 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है, लेकिन 2027 के मुद्रास्फीति अनुमान को 2.3 प्रतिशत से तेजी से बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस तेज उछाल के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें तथा सरकार द्वारा तंबाकू उत्पाद शुल्क में की गई बढ़ोतरी जिम्मेदार है। इसके चलते 2027 में कोर मुद्रास्फीति भी 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि समग्र महंगाई दर 2027 के मध्य में लगभग 3 प्रतिशत पर पहुंचने के बाद ही नीचे आने की उम्मीद है।
यह अनुमानित रफ्तार केंद्रीय बैंक के नए 2.5 प्रतिशत के लक्ष्य की तुलना में काफी तेज है। विश्लेषकों का आकलन है कि टिकाऊ आधार पर 2.5 प्रतिशत का लक्ष्य केवल 2028 के मध्य तक ही हासिल किया जा सकेगा। कॉमर्शबैंक के विश्लेषक तथा घोष के अनुसार, जब केंद्रीय बैंक अपने मध्यम अवधि के लक्ष्य को घटाता है और उसी समय आने वाले वर्षों के महंगाई अनुमानों को बढ़ाता है, तो सैद्धांतिक रूप से इसका नतीजा और अधिक प्रतिबंधात्मक मौद्रिक रुख होना चाहिए। इसके बावजूद नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी अब भी दरों को स्थिर रखने या उनमें कटौती करने की चर्चा कर रहा है। चुनाव के बाद मध्य पूर्व में जोखिम की स्थिति बिगड़ने के कारण फ़ोरिंट अपनी चमक खो चुका है और जब तक केंद्रीय बैंक स्पष्ट रूप से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को स्वीकार नहीं करता, तब तक मुद्रा में किसी मजबूत सुधार की उम्मीद बेहद सीमित नजर आती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर का दबदबा
हंगेरियन फ़ोरिंट की यह कमजोरी केवल आंतरिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के मुद्रा बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और सुरक्षित संपत्तियों की भारी मांग के दबाव में हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दी है, जिसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। भू-राजनीतिक तनावों और सख्त फेडरल नीतियों के चलते अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिसने अन्य प्रमुख और उभरती हुई मुद्राओं पर भारी दबाव बना रखा है।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) रातों-रात 200-दिवसीय एसएमए से नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के स्तर के पास काफी कमजोर नजर आया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के कयासों पर अमेरिकी डॉलर की तेजी पूरी तरह हावी रही। इसी तरह, सोने की कीमतों में भी कोई खास बढ़त नहीं देखी गई और मजबूत डॉलर तथा ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण यह यूरोपीय कारोबारी सत्र में अपने साप्ताहिक निचले स्तर के पास एक सीमित दायरे में फंसा रहा।
बैंक ऑफ़ जापान का नीतिगत कदम और येन की चाल
दूसरी तरफ, बैंक ऑफ़ जापान ने भी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला बैंक की नीतिगत बैठक में 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था। हालांकि इस दर वृद्धि के बावजूद बैंक ऑफ़ जापान का रुख समग्र रूप से नरम आंका गया, जिसने येन की बढ़त को सीमित करने का काम किया।
शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 159.00 के तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर पर रुकने के बाद मामूली गिरावट के साथ देखा गया। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित करेंसी हस्तक्षेप के डर से सटोरियों ने थोड़ी सावधानी बरती। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, USD/JPY वर्तमान में 157.98 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 158.26 के बंद भाव से 0.18 प्रतिशत नीचे है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-अवधि का आरएसआई 55 पर है, जबकि एमएसीडी -0.32 पर है और सिग्नल लाइन -0.82 पर है, जो 0.50 के हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक गति दर्शाता है। 50-दिवसीय ईएमए 158.06 पर और 200-दिवसीय ईएमए 157.67 पर होने के साथ गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। वर्तमान में पिवट 158.24 पर स्थित है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस 158.59 और दूसरा 159.20 पर है, जबकि सपोर्ट 157.63 और 157.29 पर मौजूद है।
उभरते बाजारों के लिए सख्त नीतियों की चुनौती
फ़ोरिंट और अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए आगे का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। जब तक प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रीय बैंक महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाते रहेंगे और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी रहेगी, तब तक छोटी अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों के पास नरम रुख अपनाने की गुंजाइश नहीं होगी। नेशनल बैंक ऑफ़ हंगरी के सामने अब सबसे बड़ा इम्तिहान यह है कि वह 2027 में 3.1 प्रतिशत तक जाने वाली महंगाई और 2.5 प्रतिशत के नए लक्ष्य के बीच के अंतर को पाटने के लिए किस तरह अपनी नीतियों को सख्त रूप में पेश करता है, ताकि फ़ोरिंट में निवेशकों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।
















