अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक अस्थिरता और आपूर्ति संकट की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर मजबूती दर्ज की गई है। मंगलवार को अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई के भाव सुधरकर 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए। इससे पहले कारोबारी सत्र के दौरान भाव गिरकर 86.32 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक चले गए थे, जो 1 सितंबर के बाद का सबसे निचला स्तर था। मध्य पूर्व में तनाव, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने कच्चे तेल की कीमतों को नीचे फिसलने से रोक लिया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बना गतिरोध भी बाजार की चिंताओं को बढ़ा रहा है।
फारस की खाड़ी से निर्यात में सुधार और जी7 का रिजर्व रिलीज
बाजार में आपूर्ति की स्थिति पर नजर डालें तो हाल के दिनों में मध्य पूर्व से तेल की खेप में कुछ बढ़ोतरी देखी गई है। केपलर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर के अंतिम सप्ताह में ईरान को छोड़कर फारस की खाड़ी के देशों से कच्चे तेल का निर्यात औसतन 18.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा। खाड़ी क्षेत्र से निर्यात में इस सुधार की मुख्य वजह सऊदी अरब की ओर से बढ़ाई गई आपूर्ति रही। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों को काबू में रखने के मकसद से जी7 देशों ने शुक्रवार को अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से मिलने वाली राहत काफी सीमित साबित हो रही है, क्योंकि वास्तविक आपूर्ति मार्ग पर बने खतरे इन प्रयासों पर भारी पड़ रहे हैं।
सऊदी अरब की वैकल्पिक पाइपलाइन और समुद्री सुरक्षा के खतरे
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने मंगलवार को जानकारी दी कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल का प्रवाह 5.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन के स्तर तक पहुंच गया है। यह पाइपलाइन लाल सागर के तट पर स्थित यानबू निर्यात केंद्र तक कच्चा तेल पहुंचाती है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना तेल निर्यात का एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होता है। इसके बावजूद फारस की खाड़ी में समुद्री आवागमन के जोखिम लगातार ऊंचे बने हुए हैं। शिपिंग इंटेलिजेंस सेवा मारिस्क के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान टैंकरों से जुड़ी कम से कम सात घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूतियों के बीच जारी संघर्ष के कारण क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे पर नए हमलों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। टीडी सिक्योरिटीज का कहना है कि चीनी उत्पाद निर्यात प्रतिबंध और रिफाइनरियों की बढ़ती मांग आपूर्ति में हो रही इस बढ़ोतरी को सोख रही है, जिससे कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और जोखिम ऊपर की ओर झुका हुआ है।
वैश्विक मांग अनुमान में कटौती और अमेरिकी इन्वेंट्री पर नजर
एक तरफ जहां आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाएं हैं, वहीं दूसरी तरफ मांग के मोर्चे पर मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। ईआईए ने वैश्विक तेल मांग के अपने पूर्वानुमानों में संशोधन किया है। एजेंसी ने 2026 के लिए अपने मांग अनुमान को 102.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटाकर 102.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। इसी तरह 2027 के लिए मांग अनुमान को पूर्व के 105 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटाकर 104.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है। फिलहाल तेल कारोबारी आपूर्ति और मांग के ताजा संकेतों के लिए अमेरिकी तेल भंडार के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी एपीआई की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट मंगलवार को जारी होने वाली है, जिसके बाद बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी ईआईए के आधिकारिक इन्वेंट्री आंकड़े सामने आएंगे।
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया
डब्ल्यूटीआई क्रूड अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बिकने वाले प्रमुख कच्चे तेलों में से एक है। इसका पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है, जो ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों के तीन मुख्य बेंचमार्क बनाता है। अपेक्षाकृत कम घनत्व और कम सल्फर सामग्री के कारण डब्ल्यूटीआई को हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है। इसका उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है। डब्ल्यूटीआई तेल बाजार के लिए एक प्रमुख पैमाना है और वित्तीय जगत में इसके भावों पर करीबी नजर रखी जाती है।
किसी भी अन्य वित्तीय परिसंपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतें भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से तय होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि मजबूत होने पर ऊर्जा की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों में तेजी आती है, जबकि कमजोर वैश्विक विकास मांग को घटाता है। इसके अलावा राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर कीमतों को तेजी से बढ़ा सकते हैं। तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के फैसले भी कीमतों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी सीधे तौर पर असर डालती है। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमतें दोनों बढ़ सकती हैं।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका
अमेरिकी बाजार में तेल की खपत और आपूर्ति को समझने के लिए एपीआई और ईआईए द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यदि भंडार में गिरावट आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे तेल के दाम बढ़ते हैं। इसके विपरीत इन्वेंट्री में अप्रत्याशित वृद्धि अतिरिक्त आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। एपीआई की रिपोर्ट हर मंगलवार को और ईआईए की रिपोर्ट अगले दिन बुधवार को आती है। आमतौर पर दोनों के आंकड़े काफी मिलते-जुलते होते हैं और लगभग 75 प्रतिशत मामलों में उनके बीच का अंतर 1 प्रतिशत से कम रहता है। हालांकि ईआईए एक सरकारी एजेंसी होने के कारण इसके आंकड़ों को वित्तीय बाजारों में अधिक प्रामाणिक माना जाता है।
वहीं दूसरी तरफ 12 तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक हर छह महीने पर बैठक कर अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक उत्पादन में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति घटती है और डब्ल्यूटीआई के दाम चढ़ते हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने पर कीमतें गिरती हैं। ओपेक प्लस इस समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें रूस सहित दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य देश शामिल हैं, जो वैश्विक तेल उत्पादन के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं।
मुद्रा, सोना और डिजिटल परिसंपत्तियों की चाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों का प्रभाव विभिन्न परिसंपत्तियों पर साफ नजर आ रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है। इसके चलते एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी की दो दिवसीय रिकवरी थम गई, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक आरबीए द्वारा ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कुछ सहारा दे रही हैं। दूसरी ओर यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है, क्योंकि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के बावजूद जापानी येन में कोई खास मजबूती नहीं दिखी है।
कमोडिटी बाजार में सोने ने सोमवार के मामूली उछाल को आगे बढ़ाया, लेकिन मंगलवार को यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को दोबारा हासिल करने के लिए संघर्ष करता दिखा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और डॉलर पर दबाव ने सोने को सहारा दिया है। वहीं डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन का मजबूत रुख बना हुआ है और यह 85,837 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। अन्य क्रिप्टोकरेंसीज में एथेरियम 2,700 डॉलर के ऊपर सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जबकि रिपल 1.50 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास बना हुआ है। यूरोप में मुद्रास्फीति के दबावों के बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने ब्याज दरों को लेकर नीतिगत असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

















