अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अचानक आई बड़ी हलचल के चलते कच्चे तेल की कीमतों पर गहरा दबाव देखा गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को आगामी सात दिनों के भीतर दोबारा खोलने के ईरानी प्रस्ताव के सामने आने के बाद वैश्विक बाजारों में ब्रॉड सेलिंग शुरू हो गई। शुरुआती कारोबारी सत्र में बढ़त हासिल करने के बाद अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.65 प्रतिशत फिसलकर 90.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। समुद्री व्यापार मार्ग में सुधार की संभावनाओं ने तेल आपूर्ति को लेकर बनी घबराहट को तुरंत कम कर दिया, जिसके चलते ट्रेडर्स मुनाफावसूली में जुट गए और भाव में यह गिरावट दर्ज की गई।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड का स्वरूप और वैश्विक महत्व
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में बिकने वाले प्रमुख कच्चे तेलों में डब्ल्यूटीआई का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार मुख्य रूप से तीन बड़े बेंचमार्क पर काम करता है, जिसमें डब्ल्यूटीआई के अलावा ब्रेंट और दुबई क्रूड शामिल हैं। डब्ल्यूटीआई को उद्योग में अक्सर हल्का और मीठा तेल कहा जाता है, जिसका कारण इसका अपेक्षाकृत कम गुरुत्वाकर्षण और काफी कम सल्फर स्तर है। इस विशिष्ट संरचना के चलते रिफाइनरियों के लिए इसे गैसोलीन और डीजल जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलना काफी आसान होता है। इस उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे तेल का मुख्य स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका है। वहां से इसका वितरण कुशिंग हब के रास्ते किया जाता है, जिसे पाइपलाइन चौराहों की वैश्विक राजधानी माना जाता है। मीडिया और वित्तीय बाजारों में इसी डब्ल्यूटीआई की दरों को तेल की दिशा मापने के लिए नियमित तौर पर उद्धृत किया जाता है।
मांग और आपूर्ति के बुनियादी समीकरण जो तय करते हैं कीमतें
किसी भी अन्य वित्तीय संपत्ति की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड के भाव भी बुनियादी रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करते हैं। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि तेज होती है, तब कारखानों, परिवहन और बिजली उत्पादन में ईंधन की खपत बढ़ने से तेल की मांग में उछाल आता है। इसके विपरीत जब वैश्विक विकास की रफ्तार कमजोर पड़ती है, तो खपत घट जाती है और कीमतों पर दबाव बनता है। दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, कूटनीतिक तनाव और आर्थिक प्रतिबंध अचानक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकते हैं, जिससे बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक द्वारा लिए जाने वाले उत्पादन संबंधी फैसले भी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की दिशा को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई के लिए बेहद निर्णायक साबित होता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में आंका और खरीदा जाता है, इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य मुद्रा धारकों के लिए तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जबकि मजबूत डॉलर आयात को महंगा बना देता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री आंकड़े और भंडारण का बाजार पर असर
अमेरिका में तेल के साप्ताहिक भंडारण से जुड़ी रिपोर्टें डब्ल्यूटीआई की दैनिक चाल पर सीधा असर डालती हैं। इस सिलसिले में अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और सरकारी एजेंसी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी होने वाले साप्ताहिक भंडार आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्वेंट्री में होने वाले बदलाव वास्तविक समय में आपूर्ति और मांग के बदलते रुझानों को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट यह दिखाती है कि तेल भंडारों में गिरावट आई है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे कीमतों को ऊपर की ओर समर्थन मिलता है। इसके उलट जब इन्वेंट्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है, तो यह बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देती है, जिससे कीमतों में गिरावट का रुख बनता है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट अपनी रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को प्रस्तुत करता है, जबकि एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के सरकारी आंकड़े उसके ठीक अगले दिन बुधवार को जारी होते हैं। ऐतिहासिक रूप से दोनों के निष्कर्ष काफी मिलते-जुलते रहते हैं और करीब 75 प्रतिशत मौकों पर उनके आंकड़ों में अंतर 1 प्रतिशत से भी कम रहता है। इसके बावजूद बाजार एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय और आधिकारिक मानता है क्योंकि यह एक स्वतंत्र सरकारी एजेंसी है।
ओपेक और ओपेक प्लस की उत्पादन रणनीतियों का प्रभाव
बारह प्रमुख तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक हर साल दो बार अपनी औपचारिक बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से तय करता है। संगठन के इन निर्णयों का सीधा असर डब्ल्यूटीआई के भाव पर पड़ता है। जब ओपेक उत्पादन कोटे में कटौती का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति कड़ी हो जाती है और कीमतें ऊपर की ओर भागती हैं। वहीं जब यह समूह बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने या मांग पूरी करने के लिए उत्पादन में बढ़ोतरी करता है, तो अतिरिक्त आपूर्ति कीमतों को नीचे ले आती है। तेल कूटनीति के विस्तार के तहत ओपेक प्लस अस्तित्व में आया, जिसमें ओपेक के बारह मूल सदस्यों के अतिरिक्त दस गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं। इन गैर-ओपेक सहयोगियों में रूस सबसे प्रमुख और प्रभावशाली देश है, जिसकी भागीदारी से समूह की उत्पादन नीतियां और अधिक असरदार हो जाती हैं।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों का रुख
मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में मुद्रा बाजार में भी खासी गतिविधियां दर्ज की गईं। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त और आक्रामक टिप्पणियों के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में सफल रही। हालांकि मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर की अंतर्निहित मजबूती को बनाए रखा है, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके अलावा बाजार प्रतिभागी इस सप्ताह के अंत में होने वाले बेहद अहम ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर नजरें गड़ाए हुए हैं। दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 157.50 के स्तर के पास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन में बड़ी गिरावट को थामा। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीतिगत ब्याज दर को 31 साल के उच्चतम स्तर पर ले जाने के बावजूद उसका नीतिगत बयान नरम माना गया, जिससे येन के खरीदार दबाव में रहे।
सोने और बिटकॉइन की कीमतों में ताजा सुधार
अन्य संपत्तियों की बात करें तो सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। दिन के शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी दिखाने के बाद पीली धातु फिसलकर 4,315 डॉलर के दायरे में आ गई, जो मंगलवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक तीन दिन का निचला स्तर था। फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर दृष्टिकोण के चलते निवेशक बिना ब्याज वाली संपत्तियों से पूंजी निकालकर नकदी की ओर मोड़ रहे हैं। इस बीच डिजिटल संपत्ति बाजार में बिटकॉइन ने एक दिन पहले की 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग के बाद थोड़ी राहत की सांस ली और मंगलवार को हल्का पुलबैक लेते हुए 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार करता दिखा। इसके बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग मजबूत बनी हुई है, जहां स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को करीब 1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ और स्ट्रेटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी जोड़े। उधर बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो बाजार की हफ्तों पुरानी अपेक्षाओं के बिल्कुल अनुरूप रहा।

















