अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार बने दबाव और जिद्दी मुद्रास्फीति के स्वरूप ने केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीतियों को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। बीएनवाई मार्केट्स के रणनीतिकार जॉन वेलिस का आकलन है कि वर्तमान में अमेरिका के भीतर महंगाई का दबाव ऐसे घटकों की वजह से बना हुआ है जिन पर ब्याज दरों में बदलाव का सीधा या त्वरित असर नहीं पड़ता। कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर के भीतर मौजूद गैर-ब्याज संवेदनशील तत्वों के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी की वास्तविक प्रभावशीलता काफी हद तक सीमित हो जाती है। विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2026 के दिसंबर माह की बैठक में फेडरल रिजर्व एक और दर वृद्धि लागू कर सकता है, परंतु वित्तीय बाजारों ने 2027 के लिए जिस आक्रामक दर वृद्धि पथ का अनुमान लगाया है, उसके वास्तविक रूप से धरातल पर उतरने को लेकर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुद्रास्फीति की प्रकृति और नीतिगत विश्वसनीयता का संतुलन
जॉन वेलिस का स्पष्ट कहना है कि आपूर्ति पक्ष से जुड़े झटकों और मांग में संभावित गिरावट के माहौल में केंद्रीय बैंक के लिए आगे का रास्ता जटिल हो चुका है। फेडरल रिजर्व वर्ष 2026 के अंत में दिसंबर की बैठक के दौरान दरों में एक और इजाफा करने की दिशा में बढ़ सकता है, मगर 2027 के दौरान बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप फैसले लेना काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि चालू मुद्रास्फीति झटके के सामने सख्त नीतियां कितनी असरदार साबित होती हैं। जानकारों का मानना है कि नीति निर्माताओं का यह कदम केवल तात्कालिक तौर पर मूल्य वृद्धि को थामने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा उद्देश्य बाजार में अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखना भी है।
फेडरल रिजर्व की मौजूदा रणनीति को लेकर वेलिस ने रेखांकित किया कि मौजूदा नीतिगत व्यवस्था मुद्रास्फीति से मुकाबला करने की साख को अक्षुण्ण रखने के बारे में अधिक है। दरों में बढ़ोतरी अपने आप में तब तक बढ़ती कीमतों को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं हो सकती जब तक कि समग्र मांग में भी उसी अनुपात में कमी न आए। इसके अतिरिक्त, यदि ऊर्जा बाजार से थोड़ी राहत मिलती भी है और अर्थव्यवस्था के सामने अनुकूल आपूर्ति स्थिति बनती है, तो भी पारंपरिक मांग-प्रेरित दबावों की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के कदम
फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के संयुक्त प्रभाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर को समर्थन प्रदान किया है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की गतिशीलता में उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों के बाद एयूडी/यूएसडी जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में कामयाब रही। इसके बावजूद, मध्य पूर्व का तनाव और अमेरिकी डॉलर का दबदबा इस जोड़ी के ऊपरी स्तरों को सीमित कर रहा है। इसी सप्ताह होने वाला महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कारोबारियों के लिए प्रमुख फोकस बना हुआ है।
जापानी बाजार में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत बैंक ऑफ जापान ने अपने अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है और यह दरें 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। नीतिगत बदलाव के बावजूद केंद्रीय बैंक के समग्र रुख को लेकर बाजार ने इसे आक्रामक नहीं माना। इसी कारण मंगलवार को यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 157.50 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करती दिखी। बाजार में आधिकारिक हस्तक्षेप की आशंका ने जापानी येन के नुकसान को सीमित तो किया, लेकिन अमेरिकी डॉलर की अंतर्निहित मजबूती इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दे रही है।
कीमती धातुओं पर दबाव और क्रिप्टो बाजार में ठहराव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के दृष्टिकोण का असर गैर-उपज वाली संपत्तियों पर साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले मामूली इंट्राडे बढ़त गंवाने के बाद सोना गिरकर 4,315 डॉलर के दायरे में आ गया, जो पिछले तीन दिनों का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल की मजबूती निवेशकों को कीमती धातुओं से दूर कर रही है, जिससे सुरक्षित निवेश की पारंपरिक मांग भी प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिटकॉइन एक बड़ी तेजी के बाद सुस्त होता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी दिन 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद मंगलवार को बिटकॉइन मुनाफावसूली का सामना करते हुए 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था। इस मामूली गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग काफी मजबूत बनी हुई है। स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को लगभग 1 अरब डॉलर का बड़ा प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने कॉरपोरेट खजाने में 950 बीटीसी और शामिल किए हैं, जिससे दीर्घकालिक धारणा को ठोस आधार मिल रहा है।



















