अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार की शुरुआती एशियाई ट्रेडिंग अवधि के दौरान संयमित हलचल देखी गई। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की विनिमय दर 158.99 से 159.05 के स्तर के आसपास स्थिर बनी रही। वित्तीय बाजारों के निवेशक एक तरफ टोक्यो से आए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के ताजा आंकड़ों और दूसरी तरफ वॉशिंगटन से मिलने वाले आर्थिक संकेतों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। कारोबारी सत्र में आगे आने वाले अमेरिका के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स के शुरुआती आंकड़ों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। लेकिन फिलहाल मुख्य ध्यान जापान में बढ़ती महंगाई और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति पर केंद्रित है। वैश्विक स्तर पर एशियाई केंद्रीय बैंक की ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों के बीच एक संतुलन बनता दिखाई दे रहा है।
उपभोक्ता महंगाई में उछाल से बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि की चर्चा तेज
जापान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि हुई है कि जुलाई महीने में राष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की रफ्तार में बढ़ोतरी दर्ज की गई। जापान का राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जुलाई में सालाना आधार पर बढ़कर 2.0% तक पहुंच गया। इससे पहले जून महीने में यह आंकड़ा 1.6% दर्ज किया गया था, जिसे बाद में संशोधित करके 1.7% किया गया था। महंगाई दर में यह लगातार बढ़ोतरी दर्शाती है कि जापानी अर्थव्यवस्था में लागत मूल्य और घरेलू खपत के दबाव बने हुए हैं।
केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक रहा। इसमें ऊर्जा से जुड़ी वस्तुओं को तो शामिल रखा जाता है लेकिन ताजे भोजन की परिवर्तनशील कीमतों को बाहर रखा जाता है। जुलाई में कोर सीपीआई बढ़कर 1.8% सालाना पर पहुंच गया, जबकि इससे पिछले महीने यह 1.6% के स्तर पर था। कोर महंगाई में आया यह उछाल बैंक ऑफ जापान के उन अधिकारियों के पक्ष को मजबूत करता है जो मौद्रिक ढील को खत्म करने का समर्थन कर रहे हैं। वित्तीय बाजारों ने इन आंकड़ों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है और ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप के अनुसार सितंबर में होने वाली बैंक ऑफ जापान की अगली बैठक में नीतिगत ब्याज दर को 1.0% से बढ़ाकर 1.25% करने की 80% संभावना जताई जा रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा निर्भरता का येन पर असर
जापान में ब्याज दरें बढ़ने के मजबूत संकेतों के बावजूद जापानी येन के सामने कई वैश्विक चुनौतियां खड़ी हैं। जापान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक विदेशी तेल पर निर्भर है और उसका अधिकांश कच्चा तेल मध्य पूर्व से आयात किया जाता है। यही कारण है कि जब भी मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें बढ़ जाती हैं। ऊर्जा आयात का बिल बढ़ने से जापान की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है, जिससे येन में बड़ी मजबूती आने की राह में बाधा उत्पन्न होती है।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के खिलाफ कड़े आर्थिक कदमों का ऐलान किया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन अभूतपूर्व पैमाने पर आर्थिक संघर्ष और अलग-थलग करने की नीति लागू कर रहा है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो देश ईरान को वित्तीय मदद या व्यापारिक सहायता देंगे, उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारी आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बढ़ी इस तनातनी ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे जापानी येन की तेजी सीमित बनी हुई है।
USD/JPY मुद्रा जोड़े का व्यापक तकनीकी विश्लेषण
तकनीकी चार्ट के आधार पर USD/JPY का रुझान दैनिक समय सीमा पर मंदी के दबाव में बना हुआ है, क्योंकि विनिमय दर मुख्य गतिशील स्तरों के नीचे कारोबार कर रही है। यह मुद्रा जोड़ा अपने 100-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 160.00 और बोलिंगर बैंड्स के 20-अवधि के साधारण मूविंग एवरेज 159.45 के नीचे टिका हुआ है। लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज 159.64 पर, 50-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज 160.24 पर और 50-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 161.04 पर मौजूद हैं, जबकि 200-दिवसीय साधारण मूविंग एवरेज 158.30 पर और 200-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज 157.62 पर स्थित हैं।
जापानी येन का ऐतिहासिक संदर्भ और सेफ-हेवन दर्जा
जापानी येन की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक मौद्रिक ढांचे को देखना आवश्यक है। दुनिया की सबसे प्रमुख मुद्राओं में शामिल येन का मूल्य जापान की आर्थिक स्थिति, बैंक ऑफ जापान की नीतियों, अमेरिका और जापान के बॉन्ड यील्ड के अंतर तथा वैश्विक निवेशकों की जोखिम धारणा पर निर्भर करता है। वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल या संकट के समय निवेशकों द्वारा येन को सुरक्षित सेफ-हेवन विकल्प मानने की परंपरा रही है, जिससे इस मुद्रा को मजबूती मिलती है।
साल 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान ने अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने के लिए बेहद ढीली मौद्रिक नीति अपनाई थी। लंबे समय तक ब्याज दरें शून्य के करीब रहने के कारण जापान और अमेरिका के फेडरल रिजर्व की नीतियों में भारी अंतर आ गया था। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से पूंजी जापान से बाहर अमेरिका की तरफ जाने लगी, जिससे पिछले एक दशक में येन के मूल्य में बड़ी गिरावट आई। हालांकि 2024 में बैंक ऑफ जापान द्वारा अति-उदार नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के फैसले से दोनों देशों के ब्याज दर अंतर में कमी आने लगी है, जिससे येन को बुनियादी सहारा मिल रहा है।
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार: GBP/USD और EUR/USD का हाल
वैश्विक मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की हलचल पर नजर डालें तो गुरुवार और शुक्रवार के दौरान यूरोपीय जोड़ों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3620 से 1.3630 के दायरे में कारोबार करता रहा। डॉलर इंडेक्स में देर शाम आई रिकवरी के बावजूद पाउंड अपनी बढ़त का कुछ हिस्सा बनाए रखने में सफल रहा। निवेशक अब यूके के आगामी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, EUR/USD अपनी शुरुआती बढ़त गंवाकर उत्तरी अमेरिकी सत्र के अंत तक 1.1700 के स्तर से नीचे फिसल गया। डॉलर में आई मजबूती ने यूरो पर दबाव बनाया, जिससे यह सपाट बंद हुआ। अब यूरोपीय बाजारों का पूरा ध्यान S&P ग्लोबल द्वारा जारी किए जाने वाले विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स के शुरुआती आंकड़ों पर टिका है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।
कमोडिटीज और बांड बाजार: सोने में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी का कदम
कीमती धातुओं के बाजार में सोना शुक्रवार को एशियाई कारोबारी घंटों में 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिका रहा। इस उछाल के साथ सोना लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें तेजी से न बढ़ाने की संभावनाओं से सोने को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल में आए उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से सोने की रफ्तार थोड़ी सीमित हुई है।
इसी बीच अमेरिका के सरकारी बॉन्ड बाजार में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। बुधवार को 12:32 GMT पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से अलग हटकर लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक कार्यक्रम को बढ़ाने का ऐलान किया। 9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू होने वाले इस फैसले के तहत 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड बायबैक का अधिकतम आकार 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। लिक्विडिटी बढ़ाने के इस कदम का उद्देश्य बॉन्ड बाजार को स्थिरता प्रदान करना है।



















