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जून के फैक्ट्री आंकड़े बुधवार को दिखाएंगे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग की असली रफ्तारबाज़ार
2 घंटे पहले· 2

जून के फैक्ट्री आंकड़े बुधवार को दिखाएंगे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग की असली रफ्तार

बुधवार को आने वाला जून का ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI 54 पर टिके रहने की उम्मीद है, जो लगातार छठे महीने फैक्ट्री गतिविधि में बढ़त का संकेत होगा, जबकि डॉलर मजबूत है और सोना फिसल रहा है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 7 मिनट पढ़ें AI के लिए
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GC━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण1 जुलाई 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

GC अभी $4,007 पर है, जबकि EMA20 $4,190, EMA50 $4,382 और EMA200 $4,277 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($4,190) के पास थम सकती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

GC का RSI 33 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

ADXAverage Directional Index (14)

यह क्या है

ADX नापता है कि रुझान कितना मजबूत है, उसकी दिशा नहीं। 25 के ऊपर असली, कारोबार लायक रुझान; 20 के नीचे उतार-चढ़ाव वाला दायरा जहाँ ब्रेकआउट अक्सर नाकाम होते हैं।

अभी यह कहाँ है

GC का ADX 39 है।

आगे संभावित चाल

जब तक ADX ऊंचा है, ट्रेंड ट्रेड बेहतर रहते हैं।

बाजार की नजरें अब बुधवार को आने वाले जून के ISM मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) पर टिकी हैं। यह अमेरिकी फैक्ट्री क्षेत्र की सेहत नापने वाले सबसे भरोसेमंद पैमानों में से एक है और पूरी अर्थव्यवस्था की धड़कन का अंदाजा भी इसी से मिलता है। जानकारों का अनुमान है कि हेडलाइन आंकड़ा 54 पर ही ठहरा रहेगा, ठीक उसी स्तर पर जहां वह मई में था। अगर ऐसा हुआ तो यह लगातार छठा महीना होगा जब यह इंडेक्स 50.0 की अहम रेखा के ऊपर बना रहेगा। यही 50.0 का आंकड़ा तेजी और मंदी के बीच की सीमा तय करता है, और इसके ऊपर रहना बताता है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि आगे बढ़ती रहेगी।

लेकिन कहानी सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। ऊंची ब्याज दरों के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने खुद को हैरान करने वाली मजबूती के साथ संभाले रखा है। उम्मीद से बेहतर ग्रोथ और काफी हद तक टिका रहा नौकरी बाजार, दोनों ने मिलकर इस मजबूती को बनाए रखा है। यही वजह है कि फैक्ट्री गतिविधि भले ही सुस्त दिख रही हो, पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के असाधारण होने की कहानी अब भी जिंदा है।

हेडलाइन आंकड़े से आगे क्यों देखेंगे निवेशक

निवेशकों के लिए सिर्फ मुख्य आंकड़ा ही मायने नहीं रखता। असली नजर उन हिस्सों पर रहेगी जो आगे की दिशा तय करते हैं। अगर मांग सुधरने, नए ऑर्डर बढ़ने या रोजगार में तेजी आने के संकेत मिलते हैं, तो भरोसा मजबूत होगा कि मैन्युफैक्चरिंग धीरे-धीरे संभल रही है। इसके उलट, एक और निराश करने वाली रिपोर्ट इस चिंता को और गहरा कर देगी कि अर्थव्यवस्था की बाकी ताकत के बावजूद यह क्षेत्र ठोस रफ्तार पकड़ने में जूझ रहा है।

मई की रिपोर्ट ने क्या तस्वीर दिखाई थी

मई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने करीब दो साल में सबसे ऊंचे स्तर छू लिए थे। कारोबारी गतिविधि लगातार पांचवें महीने बढ़त के दायरे में बनी रही, जिसने साल की शुभ शुरुआत को और आगे बढ़ाया।

सबसे बड़ी छलांग नए ऑर्डर में देखी गई। इससे जुड़ा इंडेक्स चढ़कर 56.8 पर पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों में इसका सबसे ऊंचा स्तर था और यह बताता है कि मांग मजबूत बनी हुई थी। साथ ही कीमतों का दबाव भी कुछ ढीला पड़ा, क्योंकि प्राइसेज पेड इंडेक्स 84.5 से गिरकर 82.1 पर आ गया। इससे संकेत मिला कि मैन्युफैक्चरिंग में महंगाई का दबाव धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा है। नौकरी बाजार की तस्वीर में भी थोड़ा सुधार दिखा, क्योंकि एम्प्लॉयमेंट इंडेक्स पिछले महीने के 46.4 से बढ़कर 48.6 पर आ गया। हालांकि यह अब भी 50.0 के आंकड़े से काफी नीचे रहा, जो बताता है कि भर्ती की परिस्थितियां अब भी कठिन बनी हुई हैं।

50 और 42.5 का गणित

ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI में 50.0 से ऊपर का आंकड़ा आम तौर पर फैक्ट्री गतिविधि में बढ़त का संकेत माना जाता है, जबकि इससे नीचे का स्तर संकुचन यानी सिकुड़न दर्शाता है। लेकिन इतिहास बताता है कि 42.5 से ऊपर बना रहने वाला स्तर भी आम तौर पर पूरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुरूप ही माना जाता है। यानी भले ही फैक्ट्री का आंकड़ा 50 के करीब खिसके, अर्थव्यवस्था तब भी विस्तार की राह पर बनी रह सकती है।

डॉलर के मुकाबले कहां खड़ा है यूरो

करेंसी बाजार में EUR/USD की चाल पर भी कारोबारियों की खास नजर है। पियोवानो के मुताबिक, गिरावट की तरफ इस जोड़ी को सबसे पहले 1.1324 के स्तर पर सहारा मिलेगा, जो 24 जून का 2026 का निचला स्तर है। इस स्तर के टूटने पर 1.1300 के गोल आंकड़े की परीक्षा हो सकती है, और उसके बाद 29 मई 2025 का साप्ताहिक तल 1.1210 सामने आ सकता है।

पियोवानो ने यह भी जोड़ा कि जब तक भाव अपने 200-दिन के SMA के नीचे कारोबार कर रहा है, तब तक नजरिया और कमजोरी की ओर झुका रहेगा। उन्होंने बताया कि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 37 के आसपास घूम रहा है, जो मंदी के रुख के मजबूत होने का इशारा है, जबकि एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) करीब 36 पर होना बताता है कि मौजूदा ट्रेंड काफी दमदार है।

दुनिया के बाजारों पर डॉलर की पकड़

अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है और कई दूसरे देशों की वास्तविक मुद्रा भी, जहां यह स्थानीय नोटों के साथ चलन में मौजूद रहता है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार होने वाली मुद्रा है। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का 88 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले डॉलर का है, जो रोजाना औसतन 6.6 लाख करोड़ डॉलर के लेनदेन के बराबर बैठता है।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा हासिल किया। अपने इतिहास के ज्यादातर हिस्से में डॉलर सोने के भरोसे टिका रहा, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हो गया और यह कड़ी टूट गई।

फेडरल रिजर्व क्यों है केंद्र में

डॉलर की कीमत पर सबसे बड़ा असर मौद्रिक नीति का पड़ता है, जिसे फेडरल रिजर्व (फेड) तय करता है। फेड के पास दो जिम्मेदारियां हैं, कीमतों में स्थिरता यानी महंगाई पर काबू और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने का इसका मुख्य हथियार ब्याज दरों में फेरबदल है।

जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो फेड दरें बढ़ा देता है, जिससे डॉलर की कीमत को सहारा मिलता है। इसके उलट, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे चली जाए या बेरोजगारी दर बहुत ऊंची हो, तो फेड दरें घटा सकता है, जिससे डॉलर पर दबाव आ जाता है।

QE, QT और डॉलर का रिश्ता

बेहद गंभीर हालात में फेडरल रिजर्व ज्यादा डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) भी लागू कर सकता है। QE वह प्रक्रिया है जिसके जरिए फेड जमे हुए वित्तीय तंत्र में कर्ज की धारा को खासा बढ़ा देता है। यह एक गैर-पारंपरिक कदम है, जिसे तब आजमाया जाता है जब बैंक आपसी अविश्वास के कारण एक-दूसरे को उधार देना बंद कर देते हैं और कर्ज सूख जाता है। यह आखिरी उपाय होता है, जब सिर्फ ब्याज दरें घटाने से काम बनने की उम्मीद नहीं रहती। 2008 की महामंदी के दौरान क्रेडिट संकट से लड़ने के लिए फेड ने यही हथियार चुना था। इसमें फेड ज्यादा डॉलर छापकर मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है। QE आम तौर पर डॉलर को कमजोर करता है।

क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसकी उलटी प्रक्रिया है, जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद परिपक्व होते बॉन्ड से मिली रकम को नए बॉन्ड में दोबारा नहीं लगाता। यह आम तौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक साबित होता है।

अभी कहां हैं बाकी करेंसी जोड़ियां और सोना

बुधवार के एशियाई सत्र में GBP/USD जोड़ी पर नई बिकवाली का दबाव देखा गया और यह पिछले दिन छुए गए करीब दो हफ्ते के ऊंचे स्तर 1.3275 के दायरे से नीचे खिसक गई। भाव फिलहाल 1.3235 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो दिन में 0.20 प्रतिशत की गिरावट है। कारोबारी अब बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषणों से नई दिशा तलाश रहे हैं।

वहीं EUR/USD बुधवार को यूरोपीय कारोबार में 1.1400 के करीब दबाव में बना रहा। यूरोजोन और जर्मनी के नरम महंगाई आंकड़ों और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की ओर से आक्रामक सख्ती की घटती उम्मीदों ने इस पर बोझ डाला। कारोबारी दिन में बाद में आने वाले अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग PMI से और संकेत जुटाएंगे।

सोना बुधवार को 4,000 डॉलर के नीचे बिकवाली के दबाव में रहा और लगातार तीसरे दिन लाल निशान में कारोबार करता दिखा। ईरान से जुड़ी अनिश्चितता और फेड के दरें बढ़ाने के अनुमानों ने डॉलर को सहारा दिया, जिसका सीधा असर इस बहुमूल्य धातु पर पड़ा। ताजा लाइव आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब 4,007 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,023 डॉलर से 0.40 प्रतिशत नीचे है। इसका RSI 33 के आसपास और गति के संकेतक अब भी मंदी की ओर झुके हुए हैं, जबकि 52 हफ्तों का दायरा 3,264 से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। कारोबारी अब वॉर्श के भाषण और अमेरिकी आंकड़ों से नई चाल की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

सिंत्रा पर टिकी दुनिया की नजर

इस हफ्ते वित्तीय बाजारों को सिंत्रा के सपने जैसे खूबसूरत नजारों से एक अहम दिशा मिल सकती है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक फोरम हर साल की तरह इस बार भी दुनिया के दिग्गज केंद्रीय बैंकरों को एक मंच पर ला रहा है। फेडरल रिजर्व का नया मुखिया, जिसने साफ कह दिया है कि फेड को हर बात की सफाई देना बंद कर देना चाहिए, यहां बोलेगा, और कारोबारियों के लिए उसे ध्यान से सुनना जरूरी होगा।

इसका आप पर असर

  • निवेशकों के लिए: PMI का 54 पर टिकना डॉलर को मजबूती दे सकता है, जिससे विदेशी करेंसी और सोने में कारोबार करने वालों को उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा।
  • सोने के खरीदारों के लिए: डॉलर की मजबूती और फेड के दरें बढ़ाने के अनुमानों के बीच सोना 4,000 डॉलर के नीचे दबाव में है, इसलिए कीमतों में और गिरावट की गुंजाइश बनी हुई है।

सवाल-जवाब

जून का ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI कब जारी होगा?
यह आंकड़ा बुधवार को जारी होने वाला है और बाजार की खास नजर इसी पर टिकी है।
PMI का कितना आंकड़ा अनुमानित है?
बाजार को उम्मीद है कि हेडलाइन इंडेक्स 54 पर ही स्थिर रहेगा, जो मई के स्तर के बराबर है।
54 का आंकड़ा क्यों अहम है?
अगर यह 54 पर टिका रहा तो यह लगातार छठा महीना होगा जब इंडेक्स 50.0 की तेजी-मंदी वाली रेखा के ऊपर रहेगा।
मई में नए ऑर्डर का इंडेक्स कहां पहुंचा था?
मई में नए ऑर्डर का इंडेक्स चढ़कर 56.8 पर पहुंच गया था, जो पिछले चार महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।
मई में महंगाई और रोजगार के आंकड़े कैसे रहे?
प्राइसेज पेड इंडेक्स 84.5 से गिरकर 82.1 पर आया, जबकि एम्प्लॉयमेंट इंडेक्स 46.4 से बढ़कर 48.6 पर पहुंचा, पर 50.0 से नीचे ही रहा।
EUR/USD के लिए अहम सहारा स्तर कौन से हैं?
पियोवानो के मुताबिक पहला सहारा 24 जून के 1.1324 पर है, इसके बाद 1.1300 और फिर 29 मई 2025 का 1.1210 का स्तर आता है।
सोना अभी किस भाव पर कारोबार कर रहा है?
ताजा लाइव आंकड़ों के अनुसार सोना करीब 4,007 डॉलर पर है, जो पिछले बंद भाव 4,023 डॉलर से 0.40 प्रतिशत नीचे है।
इस हफ्ते सिंत्रा में क्या हो रहा है?
सिंत्रा में यूरोपियन सेंट्रल बैंक फोरम में दुनिया के दिग्गज केंद्रीय बैंकर जुट रहे हैं, जहां फेडरल रिजर्व के नए मुखिया के भाषण पर नजर रहेगी।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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