अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर की तेजी पर थोड़ा अंकुश लगाया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों से उबरने का सहारा मिला है। वॉल स्ट्रीट के गुरुवार को बंद होने के बाद मुद्रा जोड़ी ने अपने पिछले तीन दिनों के लगातार नुकसान के सिलसिले को तोड़ दिया और 0.7100 के स्तर से ऊपर वापसी दर्ज की। तकनीकी चार्ट पर यह सुधार 50-दिवसीय और 100-दिवसीय एसएमए के संगम स्तर से देखने को मिला है। हालांकि, फेडरल रिजर्व की हालिया सख्त टिप्पणियों और ब्याज दरों में वृद्धि के फैसलों को बाजार अब भी पूरी तरह पचाने में जुटा है, जिससे वैश्विक मुद्राओं में हलचल बनी हुई है।
फेडरल रिजर्व की सख्ती और अमेरिकी ब्याज दरों का परिदृश्य
अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में सर्वसम्मति से फेड फंड टारगेट रेंज को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का स्पष्ट कहना है कि यह कदम मुद्रास्फीति को उसके 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से वापस लाने में मदद करेगा। फेड के अध्यक्ष वॉर्श ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वास्तविकता यही है कि महंगाई अब भी बहुत अधिक और लगातार बनी हुई है। फेडरल रिजर्व के आधिकारिक ब्याज दर अनुमानों को दर्शाने वाला डॉट प्लॉट बताता है कि फेड फंड्स दर लगभग 4.10 प्रतिशत पर रह सकती है, जिसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में एक और ब्याज दर वृद्धि देखने को मिल सकती है।
यह अनुमान मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों के अनुरूप ही है, क्योंकि पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स यानी पीसीई सूचकांक के इस साल 3.7 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया गया है। यह सूचकांक साल 2028 तक ही धीरे-धीरे फेड के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद है। वित्तीय बाजारों के आंकड़ों के अनुसार, मनी मार्केट्स ने अक्टूबर की आगामी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की 53 प्रतिशत संभावना को पहले ही अपने भावों में शामिल कर लिया है। अमेरिका में लगातार ऊंची दरों की यह संभावना डॉलर को बुनियादी मजबूती दे रही है, लेकिन ऊर्जा बाजार में आई हालिया सुस्ती ने इसकी तात्कालिक रफ्तार को सीमित किया है।
कच्चे तेल में गिरावट और कमोडिटी बाजार का हाल
अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल के हालिया सत्र में कीमत 100.30 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जो पिछले बंद स्तर 101.91 डॉलर के मुकाबले 1.58 प्रतिशत की दैनिक गिरावट दर्शाती है। हालांकि 52 हफ्तों के दायरे 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर को देखते हुए कच्चा तेल अब भी दीर्घकालिक अपट्रेंड में बना हुआ है, जहां 50-दिवसीय ईएमए 89.11 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.29 डॉलर पर गोल्डन क्रॉस की स्थिति बनी है। लेकिन ताजा स्तरों पर इसका धुरी स्तर 100.99 डॉलर, पहला समर्थन 98.50 डॉलर और प्रतिरोध 102.79 डॉलर देखा जा रहा है। आरएसआई 64 और एडीएक्स 34 के स्तर पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहे हैं। तेल की इस तात्कालिक नरमी ने डॉलर इंडेक्स की बढ़त को धीमा किया, जिससे गैर-अमेरिकी मुद्राओं को संभलने का अवसर मिला।
कमोडिटी बाजार के अन्य हिस्सों में सोने ने भी शानदार छलांग लगाई है। सोने की कीमतों ने गुरुवार को तेज बढ़त दर्ज करते हुए ताजा साप्ताहिक उच्च स्तर को छुआ, हालांकि बुल रन को 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में कुछ शुरुआती तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा। सोने में यह उछाल लगातार तीन सत्रों की गिरावट के बाद आया, जिसे अमेरिकी डॉलर में आए हल्के सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में जारी नकारात्मक रुझान से बल मिला। जब तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो मुद्रास्फीति के तात्कालिक दबाव कम होने की उम्मीद से बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर थोड़ा दबाव पड़ता है, जिसका सीधा फायदा धातुओं और जोखिम वाली मुद्राओं को मिलता है।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्थिक कारकों का प्रभाव
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा तय की जाने वाली नीतिगत ब्याज दरें हैं। आरबीए मुख्य रूप से उस ब्याज दर का स्तर तय करता है जिस पर ऑस्ट्रेलियाई बैंक आपस में एक-दूसरे को कर्ज देते हैं, जो बाद में पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों की सामान्य लागत को तय करता है। आरबीए का मुख्य उद्देश्य ब्याज दरों को ऊपर या नीचे समायोजित करके मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऑस्ट्रेलिया में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें मुद्रा को सहारा देती हैं, जबकि अपेक्षाकृत कम दरें इसके मूल्य को घटाती हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक क्रेडिट स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिनमें से ईजिंग मुद्रा के लिए नकारात्मक और टाइटनिंग सकारात्मक असर डालती है।
ऑस्ट्रेलियाई कैलेंडर पर हालिया दिनों में कोई बड़ा आर्थिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ था, लेकिन बाजार के सभी प्रतिभागियों की नजरें रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक के संबोधन पर टिकी हैं, जो 00:00 जीएमटी पर अपना भाषण देने वाली हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को कड़ा किए जाने के बाद अब मिशेल बुलॉक का यह संबोधन ऑस्ट्रेलिया में भविष्य की ब्याज दर अपेक्षाओं को नया आकार दे सकता है। यदि आरबीए भी महंगाई से निपटने के लिए आक्रामक रुख अपनाने के संकेत देता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।
लौह अयस्क और चीन की अर्थव्यवस्था की भूमिका
चूंकि ऑस्ट्रेलिया एक संसाधन संपन्न देश है, इसलिए उसकी मुद्रा का दूसरा सबसे बड़ा प्रेरक उसके सबसे बड़े निर्यात यानी लौह अयस्क की अंतरराष्ट्रीय कीमत है। साल 2021 के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का लौह अयस्क निर्यात सालाना 118 अरब डॉलर का रहा था, जिसका प्राथमिक गंतव्य चीन था। लौह अयस्क की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ता है। सामान्य तौर पर, जब लौह अयस्क की कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की मांग बढ़ने से इसका मूल्य भी बढ़ता है। इसके विपरीत, जब लौह अयस्क की कीमतों में गिरावट आती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव बनता है। लौह अयस्क के ऊंचे भाव ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन के पक्ष में रहने की संभावना को भी काफी बढ़ा देते हैं, जो मुद्रा के लिए लाभदायक होता है।
इसके साथ ही चीन का ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होना भी एक निर्णायक कारक है। जब चीनी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से अधिक कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की खरीदारी करती है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वैश्विक मांग बढ़ती है और उसकी कीमत मजबूत होती है। इसके विपरीत जब चीन की आर्थिक वृद्धि उम्मीद के मुताबिक तेज नहीं रहती, तो मांग सुस्त पड़ जाती है। यही कारण है कि चीन के आर्थिक विकास के सकारात्मक या नकारात्मक आंकड़े सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और इसके ट्रेडिंग जोड़ों को प्रभावित करते हैं।
व्यापार संतुलन और वैश्विक बाजार की धारणा
ऑस्ट्रेलिया का ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन भी मुद्रा के मूल्य निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है। व्यापार संतुलन किसी देश द्वारा अपने निर्यातों से अर्जित की जाने वाली राशि और आयातों के लिए चुकाए जाने वाले खर्च के बीच का अंतर होता है। जब ऑस्ट्रेलिया ऐसी वस्तुओं का निर्यात करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो आयातों पर होने वाले खर्च की तुलना में विदेशी खरीदारों द्वारा पैदा की गई अतिरिक्त मुद्रा मांग के कारण इसकी करेंसी मजबूत होती है। इसलिए, शुद्ध रूप से सकारात्मक व्यापार संतुलन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती देता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन इसे कमजोर करता है।
इसके अलावा व्यापक बाजार धारणा भी एक बड़ा कारक है कि निवेशक जोखिम लेने के मूड में हैं या सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं। जब निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों की तरफ रुख करते हैं यानी रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तो यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी वृद्धि से जुड़ी मुद्राओं के लिए बेहद सकारात्मक माना जाता है। इसके विपरीत सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागने यानी रिस्क-ऑफ की स्थिति में डॉलर को नुकसान उठाना पड़ता है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान पर नजर
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के दूसरे छोर पर यूएसडी/जेपीवाई एशियाई बाजार खुलने से पहले 156.00 के क्षेत्र में उल्लेखनीय नुकसान के साथ कारोबार कर रहा था। इस मुद्रा जोड़ी ने भी अपनी हालिया तीन दिनों की बढ़त की गति को गंवा दिया और 156.50 के स्तर से ठीक पहले फिसल गई। वैश्विक निवेशकों का पूरा ध्यान अब शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे के फैसले पर है, जहां बाजार व्यापक रूप से 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।
जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया में पूंजी जुटाने के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान नीतिगत दरों को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो लंबे समय से चला आ रहा वह सस्ता फंडिंग फायदा एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है। जब दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में जोरदार बढ़ोतरी की थी, तब जापान अकेला ऐसा देश था जो बेहद ढीली मौद्रिक नीति पर अडिग रहा था। अब वहां नीतिगत बदलाव के संकेत वैश्विक पूंजी प्रवाह की दिशा बदल सकते हैं।



















